कब मनाया जाएगा चैत्र महीने का दूसरा प्रदोष व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Updated at : 23 Mar 2026 2:25 PM (IST)
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Pradosh Vrat.

शिवलिंग की पूजा करते हुए भक्त (एआई तस्वीर)

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत हिंदू धर्म का एक विशेष पर्व है. इस दिन भक्त घरों और मंदिरों में धूमधाम से भगवान शिव की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं. मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी दोषों और पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

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Pradosh Vrat 2026: भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. साल 2026 में चैत्र महीने का दूसरा प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाएगा. साल 2026 में यह तिथि 30 मार्च, सोमवार को पड़ रही है. चूंकि यह व्रत सोमवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोम प्रदोष का व्रत करने से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य और चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है.

सोम प्रदोष व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

  • त्रयोदशी तिथि आरंभ: 30 मार्च 2026 को सुबह 07:09 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 31 मार्च 2026 को सुबह 06:55 बजे

प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद ‘प्रदोष काल’ में की जाती है, इसलिए 30 मार्च को ही व्रत रखा जाएगा.

  • प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: 30 मार्च, सोमवार को शाम 06:38 बजे से रात 08:57 बजे तक
  • कुल अवधि: लगभग 2 घंटे 19 मिनट

सोम प्रदोष व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में सोमवार भगवान शिव को समर्पित दिन माना गया है. ऐसे में जब त्रयोदशी तिथि इस दिन पड़ती है, तो पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है. मान्यता है कि सोम प्रदोष व्रत करने से संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. कुंडली में कमजोर चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और भगवान शिव का आशीर्वाद साधक को प्राप्त होता है.

पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. आप चाहें तो पूरे दिन फलाहार कर सकते हैं या निर्जला व्रत रख सकते हैं.
  • शाम को सूर्यास्त से पहले दोबारा स्नान करें और साफ, सफेद वस्त्र धारण करें.
  • प्रदोष काल में मंदिर या घर पर शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद (पंचामृत) से अभिषेक करें.
  • भोलेनाथ को बेलपत्र, धतूरा, मदार के फूल और भस्म अर्पित करें. माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं.
  • शिव चालीसा का पाठ करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें. व्रत कथा का पाठ करें. अंत में आरती करें.
  • पूजा के अगले दिन पारण कर व्रत को पूर्ण करें.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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