Mahakumbh Mela 2025: महाकुंभ में किस घाट पर नहाने का है सबसे अधिक महत्व

Published by :Shaurya Punj
Published at :04 Jan 2025 11:46 AM (IST)
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Mahakumbh Mela 2025

Mahakumbh Mela 2025

Mahakumbh Mela 2025: महाकुंभ के अवसर पर देश-विदेश से श्रद्धालु पवित्र नदी में स्नान करने के लिए आते हैं. सनातन धर्म की परंपराओं के अनुसार, कुंभ मेले में पवित्र नदी में स्नान करना और पूजा-अर्चना करना महत्वपूर्ण माना जाता है.

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Mahakumbh Mela 2025: प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन होने जा रहा है. महाकुंभ के समय पवित्र नदी में स्नान का विशेष महत्व होता है. हालांकि, महाकुंभ के प्रत्येक दिन नदी में स्नान करना पुण्यदायी माना जाता है, लेकिन कुछ विशेष तिथियों पर स्नान को शाही स्नान कहा जाता है. इस अवसर पर देश-विदेश से लोग आते हैं और पुण्य का लाभ उठाते हैं.

कब से कब तक रहेगा महाकुंभ मेला 2025

13 जनवरी से शुरु होकर यह आयोजन 26 जनवरी महाशिवरात्रि के दिन तक रहेगा.

महाकुंभ में घाटों का महत्व

प्रयागराज में महाकुंभ के आयोजन के कारण यह शहर हमेशा चर्चा का विषय बना रहता है. यहां गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती का संगम होता है, जिससे प्रयागराज के घाटों का धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है. यदि आप कुंभ मेले में जाने की योजना बना रहे हैं, तो इन प्रसिद्ध घाटों पर अवश्य समय बिताएं और किसी एक घाट पर स्नान कर पुण्य अर्जित करें.

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दशाश्वमेध घाट

प्रयागराज का दशाश्वमेध घाट धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. मान्यता है कि इस घाट पर भगवान ब्रह्मा ने दस अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया था. महाकुंभ के समय, यह घाट गंगा आरती और भजन-कीर्तन के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है. शाम को गंगा आरती के बाद, यहां आप स्थानीय व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं.

हांडी फोड़ घाट

प्रयागराज के प्राचीन घाटों में से एक, हांडीफोड़ घाट सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है. यह घाट उन लोगों के लिए आदर्श है जो शांत लहरों और नदियों की मधुर ध्वनि का आनंद लेना चाहते हैं. यहां का वातावरण इसे और भी आकर्षक बनाता है.

बलुआ घाट

बलुआ घाट साधु-संतों की एकत्रितता का स्थल है. यहां का माहौल ध्यान और योग के लिए अनुकूल है, जिससे साधु-संत अपने प्रवचन और ध्यान के लिए इसे पसंद करते हैं. यह घाट भीड़-भाड़ से दूर स्थित है, जो इसे और भी विशेष बनाता है.

संगम घाट

महाकुंभ के समय संगम घाट आस्था और आकर्षण का प्रमुख स्थल माना जाता है. यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का संगम होता है, जो मोक्ष की प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है. यहां स्नान करना यात्रियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है. इसके अलावा, नाव की सवारी के माध्यम से त्रिवेणी संगम का अद्भुत दृश्य देखने का अवसर भी मिलता है.

केदार घाट

कुंभ मेले के दौरान केदार घाट पर स्नान और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है. शिव भक्तों के लिए यह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भगवान शिव को समर्पित है.

क्या है कुंभ मेला

कुम्भ मेला हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, जो हर 12 वर्ष में आयोजित होता है. इसके चार प्रमुख स्थल हैं – प्रयागराज (इलाहाबाद), हरिद्वार, उज्जैन और नासिक. इस बार यह महाकुंभ के रूप में प्रयागराज में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना है. कुम्भ मेले का महत्व कुम्भ स्नान के कारण और भी बढ़ जाता है. प्रयागराज को तीन नदियों के संगम स्थल के रूप में जाना जाता है.

इसलिए, यहां स्नान को संगम स्नान कहा जाता है. गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम के तट पर स्नान करके लोग धार्मिक परंपराओं के अनुसार पुण्य कार्य करते हैं. इसके अतिरिक्त, इस अवसर पर अनेक धार्मिक कार्यक्रम, पूजा, ध्यान और योग का आयोजन भी होता है, जो इस मेले की विशेषता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में डिजिटल कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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