वट पूर्णिमा पर बरगद के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है? जानें धार्मिक महत्व
वट वृक्ष की पूजा-अर्चना करते श्रद्धालुओं की सांकेतिक तस्वीर (एआई)
Vat Purnima Vrat: वट पूर्णिमा व्रत के दिन बरगद के पेड़ की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है? यदि नहीं, तो यह खबर आपके लिए है. आइए इस लेख के माध्यम से वट वृक्ष की पूजा के धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में विस्तार से जानते हैं.
Vat Purnima Vrat: हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को वट पूर्णिमा व्रत रखा जाता है. इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए यह व्रत करती हैं. महिलाएं पूरे दिन उपवास रखती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और बरगद के पेड़ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं. साथ ही, बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते हुए उस पर रक्षा सूत्र बांधती हैं. आइए जानते हैं वट वृक्ष की पूजा के महत्व के बारे में विस्तार से.
बरगद के पेड़ में त्रिमूर्ति का वास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ में साक्षात त्रिदेवों का वास होता है. इसे अत्यंत पूजनीय और दिव्य वृक्ष माना गया है. मान्यता है कि बरगद के पेड़ की जड़ों में सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा का निवास होता है. इसके मुख्य तने में सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु का वास माना जाता है, जबकि इसकी शाखाओं में भगवान शिव का निवास माना गया है. यही कारण है कि जब महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं, तो उन्हें एक साथ त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
सावित्री और सत्यवान की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब यमराज सावित्री के पति सत्यवान के प्राण हरकर ले जा रहे थे, तब सावित्री ने अपने तपोबल, पतिव्रता धर्म और बुद्धिमत्ता से यमराज को प्रसन्न कर दिया. इसके बाद यमराज ने उन्हें वरदान स्वरूप सत्यवान के प्राण वापस लौटा दिए. कहा जाता है कि जब सत्यवान को पुनः जीवन मिला, तब वे बरगद के पेड़ के नीचे अचेत अवस्था में लेटे हुए थे. चेतना में आने के बाद सावित्री ने उसी वट वृक्ष को साक्षी मानकर यमराज और देवताओं का आभार व्यक्त किया. तभी से यह मान्यता प्रचलित है कि वट वृक्ष की पूजा करने से अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
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