बटुक भैरव जयंती कब है? जल्दी नोट करें पूजा तिथि, मुहूर्त और जानें धार्मिक महत्व

Edited by Neha Kumari
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भगवान बाल बटुक भैरव की सांकेतिक तस्वीर (एआई)

Batuk Bhairav Jayanti 2026: बटुक भैरव जयंती भगवान शिव के बाल रूप की आराधना का पावन दिन है. साल 2026 में बाल बटुक भैरव जयंती 29 जून, सोमवार के दिन मनाई जाएगी. इस अवसर पर भक्त भगवान बटुक भैरव की पूजा-अर्चना कर जीवन की बाधाओं से मुक्ति और मानसिक शांति की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं.

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Batuk Bhairav Jayanti 2026: भगवान बटुक भैरव, भगवान शिव का सौम्य एवं बाल स्वरूप हैं. हर वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को बटुक भैरव जयंती मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान शिव ने संसार को विपत्तियों से बचाने के लिए पाँच वर्ष के बालक का रूप धारण किया था. मान्यता है कि जो भी भक्त इस दिन सच्चे मन से भगवान बटुक भैरव की आराधना करता है, उसके जीवन के दुख-कष्ट दूर होते हैं. साथ ही कुंडली में राहु-केतु के दोषों का प्रभाव कम होता है तथा सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है.

बटुक भैरव जयंती 2026: शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:04 बजे से 04:44 बजे तक (मंत्र दीक्षा और ध्यान के लिए सर्वोत्तम)
  • लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 05:25 बजे से 07:09 बजे तक
  • अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 07:09 बजे से 08:54 बजे तक
  • शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 10:39 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त (रात्रि पूजा): रात 12:04 बजे से 12:44 बजे तक (तंत्र, विशेष साधना और भैरव उपासना के लिए अत्यंत शुभ)

बटुक भैरव जयंती का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ‘आपद’ नामक एक भयंकर असुर का संहार करने तथा देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने यह बाल स्वरूप धारण किया था. चूंकि यह भगवान शिव का सौम्य रूप माना जाता है, इसलिए गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग भी इनकी पूजा अपने घर में सरलता से कर सकते हैं.

पूजा विधि

  • पूजा के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद व्रत एवं पूजा का संकल्प लें. 
  • पूजा स्थान पर साफ लाल रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान बटुक भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.इसके बाद उन्हें लाल फूल, काले तिल, अक्षत तथा सरसों के तेल का दीपक अर्पित करें. 
  • भगवान बटुक भैरव को खीर, पूरी, मीठी रोटी, हलवा और उबले हुए काले चने का भोग लगाएं.
  • इसके पश्चात बटुक भैरव मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें. मंत्र:  “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ॥”
  • अंत में भगवान बटुक भैरव की आरती करें और पूजा का समापन करें.

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वे धर्म, ज्योतिष, राशिफल, व्रत-त्योहार, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं. उनकी विशेष रुचि धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय विश्लेषण और दैनिक राशिफल को सरल, सटीक और पाठक-हितैषी भाषा में प्रस्तुत करने में है. नेहा का उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धर्म, संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों को आसानी से समझ सकें. उनकी लेखन शैली शोध-आधारित, सरल और स्पष्ट है, जो जटिल विषयों को भी सहज और रोचक बना देती है. वे राशिफल, ग्रह-गोचर, व्रत-त्योहार, धार्मिक मान्यताओं, वास्तु, पौराणिक प्रसंगों और भारतीय रीति-रिवाजों से संबंधित विषयों पर नियमित रूप से लेख लिखती हैं. डिजिटल पत्रकारिता में उनकी रुचि पाठकों की जरूरतों को समझते हुए जानकारीपूर्ण, SEO-अनुकूल और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में है.

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