Law of Karma: मन, वचन और कर्म, यहीं से तय होता है जीवन का भविष्य

Published by : Shaurya Punj Updated At : 05 Jan 2026 10:45 AM

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कर्म सिद्धांत

Law of Karma: मनुष्य का जीवन मन, वचन और कर्म से संचालित होता है. शास्त्रों के अनुसार हर विचार, वाणी और कार्य कर्मफल बनाता है. वाणी संयम और मानसिक सजगता से जीवन और भाग्य दोनों सुधरते हैं.

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– रामबालक राय ‘प्रहरी’

Law of Karma:  मन, वचन और कर्म के द्वारा मनुष्य अपने जीवन में कार्य करता रहता है. यह कार्य शुभ और अशुभ दोनों तरह के होते हैं. जो सजग नहीं हैं, वे दोनों प्रकार के किये जाने वाले कर्म और उसके कर्मफल से अनजान बने रहते हैं.

वाणी का संयम और वाचा कर्म

बहुतेरे मनुष्य यही समझते हैं कि हाथ-पैर से किये जाने वाले किसी काम को कर्म कहते हैं, परंतु ऐसी बात नहीं है. मनुष्य जब भी कुछ बोलता है, वह भी वाचा कर्म, अर्थात् वचन से किया कर्म होता है. क्या बोलना है, क्या नहीं बोलना है, यह जानना बहुत जरूरी है, क्योंकि बोली गयी हर बात कर्म फल बनाता है.

मानसिक कर्म और मन की गति

 इसी से महापुरुषों ने ‘वाणी संयम’ का महत्व बताया है. बोलकर या शरीर से जब हम कोई कर्म नहीं करते हैं, तब भी मन कर्म करता है. मन की गति बहुत तेज होती है. जाग्रत और सुश्रुप्ता अवस्था में भी मन कार्य करता है. यह चिंतन मन द्वारा शुभ-अशुभ दोनों स्तर पर होता है. यह भी मानसिक कर्म कहलाता है, इसलिए इसका भी कर्म फल बनता  रहता है. मनुष्य भले अनजान बना रहे, परंतु कर्म फल तो अवश्य ही  बनता है.

कर्मफल और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक न्यूटन ने इसे गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत से प्रमाणित किया है. उन्होंने कहा है- ‘प्रत्येक क्रिया के विपरीत एवं समानांतर एक प्रतिक्रिया भी होती है.’ यह प्रतिक्रिया ही कर्मफल को जन्म देती है. जब कर्मफल बनेगा तब उसका भोग भी अवश्य ही करना पड़ेगा. इसीलिए हमारे मनीषियों ने वेदवाणी में कहा है – ‘अवश्यमेव भोग्यतव्यम् कृत कर्म शुभाशुभ्।’ अर्थात्- किये हुए शुभ और अशुभ कर्मों के फलभोग अवश्य ही करना पड़ता है.’ फल भोग से राम-रहीम कोई नहीं बचे हैं. सभी से ही किये जाने वाले कर्मों से सावधान रहने को कहा गया है.

कर्म प्रधानता और संस्कार

कर्म प्रधानता मानी गयी है. मानस में संत तुलसीदास ने कहा है – ‘कर्म प्रधान विश्व करी राखा।जो जस कर हीं सो तस फल चाखा।’ कर्म ही भाग्य का निर्माण करता है. अच्छे संस्कार और बुरे संस्कार कर्म से ही बनता है. यह बना हुआ संस्कार फल भोग के लिए कई जन्मों तक पीछा करता है. बाली ने राम से बदला द्वापर में कृष्ण से शिकारी बन कर लिया था. पूर्व जन्म में भीष्म पितामह ने सांप को अधमरा कर कंटीले बबूल पेड़ पर फेंका था, जिससे शरीर में अनेकों तीर गड़े गये थे. उसका फल भोग महाभारत युद्ध में अर्जुन के माध्यम से शर-शैय्या पर मिला था.

मनुष्य और अन्य जीवों में भेद

मनुष्य को छोड़कर अच्छे-बुरे का ज्ञान अन्य किसी भी जीव को नहीं है. विवेक बुद्धि के कारण ही मनुष्य, पशु से अलग होता है, अन्यथा मनुष्य और पशु भी आहार, निद्रा, भय और मैथुन में एक सामान होता है. ‘आहार, निद्रा, भय, मैथुनचंः समानऐतन पशुभि समानः। धर्मों हि तेसो विशेषो अधिकों, धर्मेन हीनः पशुभिनरानाम्।’ (उपनिषद्)

मनसा, वाचा और कर्मणा सजगता

अतः मनुष्य को मनसा, वाचा और कर्मणा तीनों से किये जाने वाले कर्म से सदा सजग होकर करना चाहिए.तीनों प्रकार से किये जाने वाले शुभ-अशुभ कर्मों पर नित्यप्रति शयनकाल के समय उसकी समीक्षा करनी चाहिए. अशुभ कर्मों को हमारे ऋषियों ने ध्यान, योग के माध्यम से ‘प्रत्याहार’ के द्वारा खत्म करने की बात कही है.

अशुभ कर्मों का निवारण

अशुभ भावनाओं को ध्यान में अपना आहार बनाकर खत्म करते रहना चाहिए. इससे कर्मफल बनने और भोगने से हम बचेंगे. अन्य उपाय उतने कारगर नहीं. वाणी संयम नहीं रहने से कई अशुभ कर्म होते हैं और मनुष्य नुकसान में रहते हैं. शुभ-अशुभ कर्म पर ध्यान देने से हमारा लोक-परलोक दोनों सुंदर बनता है. इसका हमें सदा ख्याल रखना चाहिए. (सुमन सागर)

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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