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Jyeshtha Month 2025: हिंदू पंचांग का सर्वश्रेष्ठ महीना ज्येष्ठ इस दिन से होगा आरंभ, जानें जरूरी नियम

Updated at : 12 May 2025 12:07 AM (IST)
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Jyeshtha Month 2025

Jyeshtha Month 2025

Jyeshtha Month 2025 : यह महीना आत्मिक उन्नति और पुण्य अर्जन का सर्वोत्तम समय है. अतः इस माह में विशेष ध्यान, पूजा और दान से जीवन में समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है.

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Jyeshtha Month 2025 : ज्येष्ठ माह हिंदू पंचांग का दूसरा महीना होता है, जो विशेष रूप से तप, संयम और साधना का महीना माना जाता है. 2025 में ज्येष्ठ माह 13 मई को प्रारंभ होगा और 11 जून तक रहेगा. यह महीना हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस माह में धार्मिक, आध्यात्मिक और भक्ति कार्यों का विशेष महत्व होता है. इस समय की तपस्विता और साधना से भक्तों को अत्यधिक पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त होता है. आइए, जानते हैं इस माह के विशेष महत्व और जरूरी नियमों के बारे में:-

– ज्येष्ठ माह का महत्व

ज्येष्ठ माह को विशेष रूप से तप, साधना और पुण्य अर्जन का समय माना जाता है.

इस महीने में सूर्य देव की पूजा विशेष रूप से की जाती है, क्योंकि यह माह गर्मी और सूर्य के प्रभाव का प्रतीक होता है.

इस समय सूर्य की तपन में प्रकट होने वाले दोषों से बचने के लिए ध्यान, व्रत, पूजा और साधना करने से विशेष लाभ मिलता है.

– व्रत और उपवास

ज्येष्ठ माह में विशेष रूप से शिव व्रत, गंगा सप्तमी, और वट सावित्री जैसे व्रत किए जाते हैं.

इस माह में विशेष उपवास करने से शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है, साथ ही जीवन में समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है.

शिवलिंग पर जलाभिषेक करना और गंगाजल का उपयोग करना विशेष पुण्यकारी माना जाता है.

– ध्यान और साधना

इस महीने में भगवान विष्णु, शिव और सूर्य देव की पूजा करने के साथ-साथ हनुमान चालीसा का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है.

ध्यान और साधना से मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है.

विशेष रूप से सूर्य देव के मंत्रों का जप करने से स्वास्थ्य में सुधार और जीवन में उज्जवलता आती है.

– दान और पुण्य कार्य

इस महीने में दान का विशेष महत्व है. गंगाजल का दान, पानी का दान, और अन्न का दान करना इस महीने में अत्यंत शुभ माना जाता है.

गरीबों और जरुरतमंदों को भोजन, वस्त्र और अन्य सामान दान करके पुण्य की प्राप्ति होती है.

गायों को घास और जल का दान करना भी विशेष रूप से फलदायक होता है.

– ज्येष्ठ माह में विशेष पूजा और आयोजन

गंगा सप्तमी और वट सावित्री का पर्व इस माह में आता है.

गंगा सप्तमी के दिन गंगाजल का महत्व और श्रद्धा से गंगा स्नान करने का लाभ है.

वट सावित्री व्रत में स्त्रि अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत करती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं.

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ज्येष्ठ माह में तप, साधना और धार्मिक कार्यों को करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं. यह महीना आत्मिक उन्नति और पुण्य अर्जन का सर्वोत्तम समय है. अतः इस माह में विशेष ध्यान, पूजा और दान से जीवन में समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है.

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Ashi Goyal

लेखक के बारे में

By Ashi Goyal

Ashi Goyal is a contributor at Prabhat Khabar.

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