Jitiya ka Dhaga: संतान की रक्षा के लिए क्यों बांधा जाता है जितिया धागा, जानें धार्मिक आस्था से जुड़ा इसका महत्त्व
Published by : Shaurya Punj Updated At : 10 Sep 2025 1:49 PM
जितिया धागा
Jitiya ka Dhaga: जितिया व्रत में माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए कलाई पर विशेष धागा बांधती हैं. यह धागा आस्था, सुरक्षा और मातृत्व के प्रेम का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह संतान को नकारात्मक शक्तियों से बचाने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला होता है.
Jitiya ka Dhaga: जितिया व्रत, जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहते हैं इस साल 14 सितंबर 2025 रविवार को रखा जाएगा. इस दिन माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है. यह व्रत विशेषकर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में बहुत लोकप्रिय है. इस व्रत का केंद्र बिंदु माँ का अपनी संतान के प्रति अटूट प्रेम और विश्वास है, जिसे जितिया धागे के माध्यम से प्रकट किया जाता है.
तीन दिनों की व्रत परंपरा
यह व्रत तीन दिनों तक चलता है, जिसमें पहले दिन ‘नहाई-खाई’ होता है, दूसरे दिन निर्जला उपवास रखा जाता है और तीसरे दिन व्रत का पारण किया जाता है. व्रत के दौरान, महिलाएं भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान जीमूतवाहन ने एक गरुड़ से एक नाग के जीवन की रक्षा के लिए अपने शरीर का बलिदान दिया था, जिससे उन्हें संतान रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है.
जितिया धागे का प्रतीकात्मक महत्व
व्रत के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में, माताएं अपनी संतान की कलाई पर एक विशेष धागा बांधती हैं, जिसे जितिया धागा कहते हैं. यह धागा अक्सर लाल, नारंगी या पीले रंग का होता है, जो शक्ति, ऊर्जा और शुभता का प्रतीक माना जाता है. इस धागे को बांधते समय, माँ अपनी संतान के लिए दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. यह धागा सिर्फ एक साधारण धागा नहीं है, बल्कि यह माँ के समर्पण, प्रार्थना और प्रेम का प्रतीक है, जो बच्चों को बुरी शक्तियों और संकटों से बचाने का विश्वास दिलाता है.
मां और संतान का अटूट रिश्ता
जितिया व्रत की परंपरा मां और संतान के रिश्ते की गहराई को दर्शाती है. यह व्रत माँ को न सिर्फ मानसिक रूप से मजबूत करता है, बल्कि उन्हें यह भी एहसास दिलाता है कि उनकी आस्था और समर्पण से उनकी संतान सुरक्षित और खुशहाल रहेगी. यह धार्मिक परंपरा सिर्फ एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक माँ के निस्वार्थ प्रेम और बलिदान का प्रतीक भी है.
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पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा
जितिया व्रत और धागे का महत्व पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है, जो यह दर्शाता है कि मातृत्व की शक्ति और प्रेम की कोई सीमा नहीं होती. यह धागा एक सरल प्रतीक है, जो एक माँ की प्रार्थनाओं और प्रेम को उसकी संतान के जीवन में सकारात्मकता और सुरक्षा लाने के लिए प्रेरित करता है.
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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