8.8 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

Hindu Rituals: पूजा के समय सिर ढकने की परंपरा, कैसे शांत होता है मन और स्थिर होती है चेतना

Hindu Rituals: पूजा के समय सिर ढकने की परंपरा केवल रीति नहीं, बल्कि चेतना साधना है. इससे मन एकाग्र होता है, विचार शांत होते हैं और सहस्रार चक्र सक्रिय होकर आंतरिक स्थिरता का अनुभव कराता है निरंतर.

Hindu Rituals: भारतीय संस्कृति में पूजा केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि मन, शरीर और चेतना को जोड़ने की साधना है. इसी साधना का एक महत्वपूर्ण नियम है—पूजा के समय सिर ढकना. यह परंपरा केवल स्त्रियों के लिए नहीं, बल्कि पुरुषों के लिए भी समान रूप से मानी गई है.

पौराणिक परंपरा और सम्मान का भाव

पौराणिक कथाओं में देखा जाता है कि देवता, राजा, नायक और यहां तक कि उपनायक व खलनायक भी सिर पर मुकुट धारण करते थे. मुकुट सम्मान, मर्यादा और गरिमा का प्रतीक था. इसी विचारधारा से समाज में यह परंपरा बनी कि भगवान या किसी पूजनीय के सामने सिर ढककर जाना आदर और विनम्रता का संकेत है. यही कारण है कि मंदिर या धार्मिक स्थल पर प्रवेश करते समय सिर ढकना उचित माना गया.

सामाजिक परंपरा और आचरण

प्राचीन समय में सभी धर्मों की महिलाएं दुपट्टा या साड़ी के पल्लू से सिर ढककर रखती थीं. पुरुष भी धार्मिक अनुष्ठानों में सिर ढकते थे. यह आचरण धीरे-धीरे संस्कार का रूप ले गया और पूजा-पाठ का अभिन्न हिस्सा बन गया.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्व

विज्ञान के अनुसार सिर मानव शरीर का सबसे संवेदनशील भाग होता है. सिर के मध्य में ब्रह्मरंध्र स्थित माना गया है, जो शरीर की ऊर्जा प्रणाली से जुड़ा होता है. मौसम में मामूली बदलाव का प्रभाव इसी स्थान के माध्यम से पूरे शरीर पर पड़ सकता है. मान्यता है कि खुले सिर पर आकाशीय विद्युतीय तरंगों का प्रभाव अधिक होता है, जिससे सिरदर्द, क्रोध, मानसिक अशांति और आंखों की कमजोरी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

आध्यात्मिक कारण और एकाग्रता

आध्यात्मिक दृष्टि से सिर के मध्य भाग में सहस्रार चक्र स्थित होता है, जो चेतना और ध्यान का केंद्र है. पूजा के समय सिर ढकने से बाहरी प्रभाव कम होते हैं और मन अधिक एकाग्र रहता है. इससे साधक का ध्यान भटकता नहीं और भक्ति में गहराई आती है.

ये भी पढ़ें: सुबह भूलकर भी न करें ये काम, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव

आज के समय में इसका अर्थ

आज यह परंपरा केवल नियम नहीं, बल्कि भगवान के प्रति सम्मान और समर्पण की अभिव्यक्ति बन चुकी है. यदि सिर पूरी तरह ढकना संभव न हो, तो कम से कम रूमाल से सिर ढक लेना भी पर्याप्त माना गया है. यह छोटा सा आचरण मन में श्रद्धा, विनम्रता और भक्ति का भाव जागृत करता है.

Shaurya Punj
Shaurya Punj
रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक समय तक काम करने का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष मेरे प्रमुख विषय रहे हैं, जिन पर लेखन मेरी विशेषता है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी सक्रिय भागीदारी रही है. इसके अतिरिक्त, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से काम किया है. 📩 संपर्क : shaurya.punj@prabhatkhabar.in

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel