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Ganesh Chaturthi 2025: इस दिन मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी, यहां से जानें गणपति स्थापना के नियम

Updated at : 21 Aug 2025 2:40 PM (IST)
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Ganesh Chaturthi 2025 Niyam

Ganesh Chaturthi 2025 Niyam (AI Generated Image)

Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी 2025 भारत में धूमधाम से मनाया जाने वाला प्रमुख हिंदू त्योहार है. यह पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस दिन गणपति स्थापना के नियम, शुभ मुहूर्त और इस त्योहार का इतिहास एवं महत्व जानना आवश्यक है.

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Ganesh Chaturthi 2025: भारत में त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि समाज और संस्कृति को जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं. ऐसे ही खास त्योहारों में से एक है गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है. यह पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और इसे पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है. आइए जानते हैं इस साल गणेश चतुर्थी की तिथियां, शुभ मुहूर्त, मूर्ति स्थापना और उत्सव से जुड़ी पूरी जानकारी.

गणेश चतुर्थी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि इस बार 26 अगस्त 2025 को दोपहर 1:54 बजे से शुरू होकर 27 अगस्त 2025 को दोपहर 3:44 बजे तक रहेगी. इस आधार पर गणेश चतुर्थी 2025 27 अगस्त को मनाई जाएगी.

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गणेश पूजा का शुभ समय (पूजा मुहूर्त)

गणपति स्थापना का सबसे शुभ समय दोपहर का माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी समय भगवान गणेश का जन्म हुआ था. 27 अगस्त 2025 को सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक पूजा करना अत्यंत शुभ रहेगा.

गणपति स्थापना के नियम

  • सबसे पहले मंडप में स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं.
  • उस पर फूल और अक्षत (चावल) चढ़ाएं.
  • इसके बाद गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें.
  • मूर्ति को हमेशा उत्तर दिशा की ओर रखें, क्योंकि मान्यता है कि गणेश जी उत्तर दिशा में निवास करते हैं.

गणेश चतुर्थी का इतिहास और महत्व

गणेश चतुर्थी हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है. पहले यह पर्व केवल घर-घर तक सीमित था, लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन के समय 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे सार्वजनिक उत्सव के रूप में मनाने की शुरुआत की. इसका उद्देश्य लोगों को एकजुट करना और देशभक्ति की भावना बढ़ाना था.

आज यह पर्व न केवल धार्मिक रूप से, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद खास है. इस अवसर पर संगीत, कला, नृत्य और परंपराओं को बढ़ावा मिलता है.

गणेश चतुर्थी की शुरुआत और परंपराएं

उत्सव 10 दिनों तक चलता है. इसकी शुरुआत गणपति स्थापना से होती है. भक्त अपने घर और पंडालों में गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं. पहले मूर्तियां शाडू मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनाई जाती थीं. अब पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा का इस्तेमाल बढ़ गया है.

ज्योतिष और व्रत, वास्तु संबंधी जानकारी:
जन्मकुंडली, वास्तु और व्रत-त्यौहार से जुड़ी जानकारी के लिए संपर्क करें:

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594 / 9545290847

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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