रोजेदारों ने खोला पहला रोजा, जानें 19 फरवरी से 20 मार्च तक सेहरी और इफ्तार का सही समय

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रमजान 2026 (Social )

Ramadan Sehri-Iftar Timing 2026: पवित्र माह रमजान की शुरुआत के साथ ही पटना में इबादत और रूहानियत का माहौल बन गया. मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पूरे अकीदत और एहतराम के साथ पहला रोजा रखा. सुबह सेहरी के बाद रोजेदारों ने दिनभर भूखे-प्यासे रहकर सब्र और परहेजगारी का पैगाम दिया.

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Ramadan Sehri-Iftar Timing 2026: रमजान का पहला दिन इबादत का सिलसिला जारी रहा. मस्जिदों और घरों में कुरआन की तिलावत की गई. रोजेदारों ने अल्लाह की बारगाह में सज्दा कर अपने गुनाहों की माफी मांगी और मुल्क में अमन-चैन की दुआ की. रमजान को रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना माना जाता है, इसलिए पहले ही दिन से लोगों में खास जोश और उत्साह देखा गया. शाम होते ही जैसे ही मगरिब की अजान की आवाज गूंजी, मस्जिदों में सामूहिक इफ्तार के खूबसूरत नजारे दिखे. कई जगहों पर लोगों ने एक साथ बैठकर खजूर और पानी से रोजा खोला और अपने रब का शुक्र अदा किया.

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रोजेदारों ने दुआ के साथ अपना रोजा खोला

रमजान-उल-मुबारक का महीना इंसान को सब्र, संयम और नेक रास्ते पर चलने की सीख देता है. यह महीना बुराइयों से दूर रहने और इंसानियत को अपनाने का पैगाम देता है. घरों में महिलाओं ने तरह-तरह के पकवान तैयार किए और बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ रोजा रखा. पहले रोजे के साथ ही बाजारों में भी रौनक बढ़ गई. शाम के समय खजूर, फल, पकौड़ी और अन्य इफ्तार सामग्री की दुकानों पर भीड़ देखी गई. जैसे ही इफ्तार का समय होने का सायरन बजा, रोजेदारों ने दुआ के साथ अपना रोजा खोला.

रमजान में बैतुल माल को मजबूत करने की अपील

इमारत ए शरिया बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के अमीर-ए-शरीयत हज़रत मौलाना सैयद अहमद वली फैसल रहमानी ने रमज़ान के मौके पर लोगों से बैतुल माल को मजबूत करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि इमारत ए शरिया एक प्रतिष्ठित धार्मिक और सामाजिक संस्था है, जो समाज की एकता, धार्मिक अधिकारों की रक्षा, शिक्षा के प्रसार और जरूरतमंदों की मदद का काम कर रही है.

इमारत ए शरिया ने लोगों से सहयोग मांगा

मौलाना सैयद अहमद वली फैसल रहमानी ने बताया कि बैतुल माल इमारत ए शरिया की पूरी व्यवस्था का अहम हिस्सा है. इसी के माध्यम से अनाथों, विधवाओं, गरीब छात्रों, जरूरतमंद लड़कियों की शादी, प्राकृतिक आपदा और दंगा प्रभावित लोगों की सहायता की जाती है. संस्था के अंतर्गत मौलाना साज्जाद मेमोरियल अस्पताल सहित कई स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं, जहां गरीब मरीजों का इलाज किया जाता है. इसके अलावा तकनीकी संस्थान, दारुल कज़ा, मदरसे और आधुनिक विद्यालय भी चलाए जा रहे हैं.

सेहरी और इफ्तार का समय

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