Divorce Yog: कुंडली मिलान के बाद भी क्यों बिगड़ जाता है वैवाहिक जीवन?

Updated at : 31 Jan 2026 1:53 PM (IST)
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Divorce Yog in Kundali

जन्म कुंडली तलाक योग

Divorce Yog: ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, कुंडली में लग्नेश, सप्तमेश और चंद्रमा की विपरीत स्थिति, सप्तम भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव या शुक्र का कमजोर होना वैवाहिक जीवन में तनाव और अलगाव की स्थिति बना सकता है.

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Divorce Yog: अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब शादी से पहले कुंडली अच्छे से मिलाई गई, गुण भी पूरे हुए और कोई बड़ा दोष नहीं था, तो फिर तलाक या अलगाव की स्थिति क्यों बन गई? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, केवल गुण मिलान ही दांपत्य जीवन की गारंटी नहीं होता. विवाह के बाद चलने वाली ग्रह दशा, भावों की स्थिति और ग्रहों का आपसी संबंध भी रिश्ते पर गहरा प्रभाव डालता है.

ज्योतिष में तलाक योग का क्या अर्थ है?

तलाक योग का मतलब यह नहीं है कि विवाह का टूटना तय है.

इसका अर्थ केवल इतना है कि:

  • रिश्ते में तनाव की संभावना अधिक रहती है
  • मानसिक असंतोष और दूरी बन सकती है
  • सही समय पर समझदारी न दिखाई जाए तो हालात बिगड़ सकते हैं

शास्त्र यह मानते हैं कि ग्रह संकेत देते हैं, निर्णय इंसान के हाथ में होता है.

कुंडली के कौन से ग्रह तलाक योग बना सकते हैं?

लग्नेश, सप्तमेश और चंद्रमा की कमजोर स्थिति

लग्नेश व्यक्ति को, सप्तमेश जीवनसाथी को और चंद्रमा मन को दर्शाता है. अगर ये तीनों ग्रह आपस में कमजोर या विपरीत भावों में हों, तो:

  • विचारों में तालमेल नहीं रहता
  • छोटी-छोटी बातों पर तनाव बढ़ता है
  • भावनात्मक जुड़ाव कमजोर हो जाता है

सप्तम भाव का छठे या बारहवें भाव से संबंध

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, यदि सप्तम भाव या उसका स्वामी छठे भाव (झगड़ा, विवाद) या बारहवें भाव (दूरी, अलगाव) में चला जाए, तो वैवाहिक जीवन में संघर्ष, कोर्ट-कचहरी और अलगाव की स्थिति बन सकती है.

सातवें भाव में सूर्य, राहु या शनि

यदि कुंडली के सातवें भाव में सूर्य (अहंकार), राहु (भ्रम और गलतफहमी), शनि (कठोरता और दूरी) स्थित हों और शुक्र कमजोर हो, तो दांपत्य जीवन प्रभावित होता है. खासतौर पर जब शुक्र का संबंध बारहवें भाव से बनता है, तब भावनात्मक दूरी बढ़ती है.

सप्तमेश और बारहवें भाव का आपसी संबंध

जब सप्तम भाव का स्वामी और बारहवें भाव का स्वामी आपस में राशि या दृष्टि संबंध बनाते हैं, तो खर्च बढ़ता है, आपसी दूरी आती है, एक-दूसरे से अलग रहने की स्थिति बन सकती है. इसे भी तलाक योग का संकेत माना जाता है.

चतुर्थ भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव

चतुर्थ भाव घर, सुख और मानसिक शांति का कारक होता है। यदि इस भाव पर राहु, शनि या मंगल का प्रभाव हो, तो घर का माहौल अशांत रहता है, पति-पत्नी के बीच तनाव बना रहता है, वैवाहिक जीवन टूटने की कगार पर पहुंच सकता है.

शुक्र का कमजोर या पीड़ित होना

शुक्र प्रेम और वैवाहिक सुख का मुख्य ग्रह है. अगर शुक्र नीच राशि में हो छठे, आठवें या बारहवें भाव में पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो रिश्तों में ठंडापन और अलगाव की स्थिति बन सकती है.

क्या तलाक होना निश्चित होता है?

नहीं, ज्योतिष शास्त्र यह नहीं कहता कि ग्रह सब कुछ तय कर देते हैं. वे केवल संभावनाएं बताते हैं. समय रहते अगर संवाद बनाए रखा जाए, अहंकार से बचा जाए, सही ज्योतिषीय और व्यवहारिक उपाय किए जाएं, तो कई रिश्ते टूटने से बच सकते हैं.

कुंडली मिलान के बाद भी तलाक होना इस बात का संकेत है कि विवाह के बाद की ग्रह दशाएं उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं. तलाक योग चेतावनी देता है, फैसला नहीं सुनाता. सही समझ, धैर्य और समय पर उठाए गए कदम दांपत्य जीवन को संभाल सकते हैं.

ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा | 20+ वर्षों का अनुभव
ग्रह शांति, विवाह, धन और करियर विशेषज्ञ

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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