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Chhath Puja 2025: नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ सूर्योपासना का महापर्व, खरना आज, जानें अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त

Updated at : 01 Apr 2025 10:31 PM (IST)
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चैती छठ व्रत पूजा

चैती छठ व्रत पूजा

Chhath Puja 2025: मंगलवार को नहाय-खाय के साथ चैती छठ की शुरुआत हो गयी. छठ व्रती गंगा स्नान कर अपने-अपने घरों में प्रसाद बनाते दिखे. नहाय- खाय के दिन छठ व्रत करने वाले श्रद्धालुओं ने दाल-चावल के साथ कद्दू की सब्जी को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया. वैदिक मान्यताओं के अनुसार नहाय-खाय से छठ के पारण सप्तमी तिथि तक उन भक्तों पर षष्ठी माता की कृपा बरसती है. सूर्य षष्ठी का व्रत आरोग्यता, सौभाग्य व संतान के लिए किया जाता है. आज खरना (लोहंडा) अनुष्ठान के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जायेगा.

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Chhath Puja 2025: आज बुधवार को खरना है. इस दिन व्रती दिन भर उपवास रखने के बाद शाम को गन्ने के रस या गुड़ में बने चावल की खीर के साथ, गेहूं की रोटी का प्रसाद भगवान सूर्य को अर्पित कर ग्रहण करेंगे. इसके बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होगा. खरना को लेकर छठ व्रती मंगलवार को फल व पूजन सामग्री की खरीदारी करते देखे गये. गुरुवार को अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को दिया जायेगा. जबकि, शुक्रवार को उदीयमान भगवान सूर्य को अर्घ दिया जायेगा. उसके बाद व्रती पारण करेंगे.

छठ व्रतियों ने लगायी आस्था की डूबकी

लोक आस्था के महापर्व चैती छठ के पहले दिन नहाय खाय को लेकर सुबह से ही पटना के गंगा घाटों पर छठ व्रतियों और उनके परिजनों को भीड़ देखी गयी. चार दिनों के इस अनुष्ठान में शुद्धता का विशेष ख्याल रखा जाता है और कोई भी काम पूरे शुद्ध तरीके से किया जाता है. इसलिए छठव्रती के अलावा घर के अन्य सदस्य जो छठ में भाग लेते हैं, उन्होंने भी गंगा में आस्था की डूबकी लगायी. प्रसाद बनाने के लिए कई लोग गंगाजल भी ले जाते देखे गये.

छठ में प्रयोग होने वाले प्रसाद का है खास महत्व

छठ महापर्व के पूजन व प्रसाद सामग्री के रूप में व्रती सिंदूर, चावल, बांस की टोकरी, धूप, शकरकंद, पत्ता लगा हुआ गन्ना, नारियल, कुमकुम, कपूर, सुपारी, हल्दी, अदरक, पान, दीपक, घी, गेहूं, गंगाजल आदि का उपयोग करती है. जैसे- सूप, डाला: अर्घ में नये बांस से बनी सूप व डाला का इस्तेमाल किया जाता है. सूप से वंश वृद्धि तथा उनकी रक्षा होती है. ईख: ईख आरोग्यता का घोतक है. ठेकुआ : ठेकुआ समृद्धि का द्योतक होता है. ऋतु फल: ऋतु फल के फल से विशिष्ट फल की प्राप्ति होती है.

पारंपरिक साड़ियों की रही जबरदस्त मांग

नहाय-खाय के साथ चैती छठ की शुरुआत होते ही बाजारों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है. व्रती महिलाएं छठ पूजा की तैयारियों में जुट गयी हैं. महिलाएं इस पर्व के लिए पूरी श्रद्धा से तैयारियां कर रही हैं, जहां वे मंगलवार को साड़ियों और पूजा सामग्री की खरीदारी करती दिखीं. सबसे ज्यादा खरीदारी साड़ियों रही. पटना के बाजार पारंपरिक और आधुनिक साड़ियों के शानदार कलेक्शन से सजे हुए हैं, जहां महिलाओं की भीड़ उमड़ रही है.

खरना व अर्घ्य का मुहूर्त

बुधवार : खरना पूजा – संध्या 06:10-07:15 बजे तक
गुरुवार : अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य : शाम 06:10 बजे तक
शुक्रवार : उदीयमान भगवान सूर्य को अर्घ्य : सुबह 05:49 बजे के बाद

फलों की रही डिमांड, खूब हुई खरीदारी

चैती छठ को लेकर फल बाजार तैयार है. हालांकि गर्मी के कारण कुछ फलों की आवक बहुत कम हो गयी है. इसके कारण फलों की मांग में काफी इजाफा हुआ है. फल विक्रेताओं ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ -साथ फलों की कीमतों में बढ़ोतरी हो गयी है. सबसे अधिक वृद्धि केला, सेब, अंगूर,
संतरा, अनार और अमरूद में हुई है.

41 घाटों पर सूर्य को अर्घ्य दें सकेंगे व्रती

चैती छठ को लेकर गंगा पर 41 छठ घाट और सात तालाब घाट मंगलवार शाम तक बन कर पूरी तरह तैयार हो गये और कपड़े लगा कर और तेज लाइट से इन्हें पूरी तरह जगमग भी कर दिया गया है. घाटों तक पहुंचने वाले रास्ते को भी पूरी तरह साफ सुथरा कर दिया गया है और पूरे रास्ते को बल्ब और फ्लड लाइट लगा कर रौशन कर दिया गया है. घाट पर छठ व्रतियों के कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम बनाकर तैयार हैं. लाइट टावर पर लगे फ्लड लाइट से पूरा घाट जगमगा रहा है. तीन लेयर में छठ घाटों पर बैरिकेडिंग की गयी है ताकि किसी भी छठ व्रती को किसी खतरनाक ढाल वाले या गड्ढे नुमा स्थल पर जाने से रोका जा सके और तेज बहाव वाले स्थलों पर किसी भी प्रकार के दुर्घटना की आशंका से उन्हें बचाया जा सके.

तालाबों की हुई बैरिकेडिंग, बने चेंजिंग रूम

पटना के सात प्रमुख तालाबों पर भी छठ घाट बनाये गये हैं जो मंगलवार रात में रौशनी से पूरी तरह जगमग करते दिखे. तालाब तक पहुंचने वाले रास्ते साफ किये गये हैं और जहां जरूरत पड़ी है वहां उनका निर्माण भी किया गया है. चेंजिंग रूम और लाइट टावर बनाये गये हैं और आने जाने के रास्ते पर भी लाइट लगाये गये है. तालाब के किनारों पर पानी के भीतर बैरिकेडिंग भी की गयी है.

अर्घ्य देने के लिए यहां की गयी है तैयारी

  • अंचल (छठ घाटों की कुल संख्या) – छठ घाटों के नाम
  • अजीमाबाद(नौ)- गाय घाट, कंटाही घाट, भद्र घाट, महावीर घाट, सिद्धी घाट, दुल्ली घाट, आदर्श घाट, मिट्ठन घाट, महाराजा घाट
  • बांकीपुर(12)- घघा घाट, रौशन घाट, पथरी घाट, चौधरी टोला घाट, पटना कॉलेज घाट, रानी घाट, लॉ कॉलेज घाट, बरहरवा घाट, गांधी घाट, कृष्णा घाट, कदम घाट.

काली घाट

  • पटना सिटी(12) – मरचाई घाट, कंगन घाट, किला घाट, खिड़की घाट, गड़ेड़िया घाट, पीरदमड़िया घाट, नूरुद्दीन गंज घाट, दमराही घाट, अब्दुर रहमानपुर घाट, नुरपुर घाट, पंचमुखी घाट, महावीर घाट
  • पाटलिपुत्र (सात)- पाटीपुल घाट, घाट नंबर 83, घाट नंबर 88, घाट नंबर 93, बांस घाट, एलसीटी घाट, कलेक्टेरिएट घाट
  • नूतन राजधानी(एक)- महेंद्रू घाट,

इन तालाबों में अर्घ्य देंगे व्रती

  • बीएमपी 5 तालाब,
  • बेउर गांव तालाब
  • कच्ची तालाब
  • पंचमंदिर 10 नंबर तालाब
  • संजय गांधी जैविक उद्यान तालाब
  • महुआबाग तालाब

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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