चैत्र नवरात्रि 2026 पर खरमास और पंचक का साया, क्या पड़ेगा प्रभाव? 

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मां दुर्गा (एआई द्वारा निर्मित तस्वीर)

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है. लेकिन इस बार यह पावन पर्व खरमास और पंचक के बीच शुरू हो रहा है. ऐसे में इसका पूजा पर क्या प्रभाव पड़ सकता है, आइए विस्तार से जानते हैं.

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Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रही है. इस दौरान खरमास और पंचक दोनों लगे रहेंगे. हिंदू धर्म में खरमास और पंचक दोनों को ही अशुभ अवधि माना जाता है. शास्त्रों में इस अवधि के दौरान शुभ कार्य करना वर्जित बताया गया है. ऐसे में कई श्रद्धालुओं के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या इस अवधि का चैत्र नवरात्रि की पूजा पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है? और अगर पड़ता है, तो उससे बचाव के लिए क्या करना चाहिए? आइए इन सभी सवालों के जवाब आसान भाषा में जानते हैं.

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ज्योतिषीय समीकरण और प्रभाव

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि के दौरान सूर्य मीन राशि में रहेंगे, जिससे खरमास (15 मार्च से 14 अप्रैल) का प्रभाव रहेगा. साथ ही, नवरात्रि के शुरुआती दो दिन (19 और 20 मार्च) पंचक के अंतर्गत आएंगे.

ज्योतिषियों का कहना है कि ‘अशुभ’ माने जाने वाले ये योग केवल भौतिक कार्यों के लिए होते हैं. आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, खरमास और पंचक के दौरान की गई शक्ति उपासना, मंत्र जाप और दान-पुण्य अत्यंत शुभ माने जाते हैं. इसलिए इसका चैत्र नवरात्रि की पूजा पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा.

हालांकि, इस दौरान खरमास और पंचक के नियमों के अनुसार विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और घर की छत डालना जैसे सोलह संस्कार व अन्य शुभ कार्य वर्जित रहेंगे. नए व्यापार की शुरुआत या संपत्ति की खरीदारी को भी इस समय टालना ज्योतिषीय दृष्टि से उचित माना जाता है.

माता दुर्गा की सवारी

शास्त्रों के अनुसार, चैत्र नवरात्रि 2026 में मां दुर्गा का आगमन ‘पालकी’ (डोली) पर हो रहा है. ज्योतिषीय दृष्टि से पालकी की सवारी को बहुत शुभ नहीं माना जाता; यह समाज में महामारी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या राजनीतिक उथल-पुथल का संकेत देती है. वहीं, मां की विदाई ‘हाथी’ पर होगी, जो एक अत्यंत शुभ संकेत है. हाथी पर प्रस्थान भारी वर्षा, अच्छी फसल और देश में आर्थिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.

घटस्थापना शुभ मुहूर्त

  • पहला मुहूर्त (प्रातः काल): सुबह 5:55 बजे से सुबह 7:24 बजे तक
  • दूसरा मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त): सुबह 11:33 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक
  • तीसरा मुहूर्त (चौघड़िया लाभ-अमृत): सुबह 10:28 बजे से दोपहर 1:27 बजे तक

यह भी पढ़ें: Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष 19 मार्च से शुरू, जानें मां दुर्गा की सवारी, घटस्थापना का मुहूर्त

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