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Chaitra Navratri 2020 : मां के पांचवें स्वरूप देवी स्‍कंदमाता की पूजा आज ,जानें पूजा विधि और मंत्र...

By ThakurShaktilochan Sandilya
Updated Date

माँ दुर्गा chaitra durga की पांचवी शक्ति व पांचवे स्वरूप का नाम स्कंदमाता maa skandmata है. नवरात्रि उपासना में आज 29 मार्च रविवार के दिन मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी. आज के दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन मां स्कंदमाता के इस भव्य स्वरूप की पूजन-आराधन की जाती है. इस दिन माता के भक्तों को अत्यंत पवित्र मन से देवी की पूजा-उपासना करनी चाहिए. ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है और भक्तों को ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं जो अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं .ऐसी मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि ( Chaitra Navratri 2020 ) के पांचवें दिन स्कंदमाता (Skandmata) की पूजा करने से माता के भक्तों को दोषों से मुक्ति मिलती है. उन्हें शत्रुओं का भय नहीं रहता और दुर्घटनाओं से मां अपने भक्तों की रक्षा करती हैं. बल और पराक्रम की प्राप्ति के साथ ही देवी की पूजा से रक्त, निर्बलता, कुष्ठ आदि रोगों में भी स्वास्थ्य लाभ होता है.

जानिए कौन हैं देवी स्कंदमाता :

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी स्कंदमाता ही हिमालय की पुत्री हैं, इस वजह से इन्हें पार्वती भी कहा जाता है. महादेव की पत्नी होने के चलते इन्हें महेश्वरी भी पुकारते हैं. स्कंदमाता का वर्ण गौर है इसलिए इन्हें देवी गौरी भी कहा जाता है. भगवान स्कंद यानि कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा. स्कंद यानि कार्तिकेय प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं की सेनापति बने थे. इस वजह से पुराणों में स्कंद देव का वर्णन कुमार और शक्ति नाम से है.इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गाजी के इस स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना और पूजा जाता है.

स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं. इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा, जो ऊपर की ओर उठी हुई है, उसमें कमल पुष्प है. बाएं ओर की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल पुष्प ली हुई हैं. इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है. ये.सिंह मां का वाहन है.

माँ स्कंदमाता का श्लोक :

माँ स्कंदमाता की कृपा पाने के लिए इस श्लोक का नवरात्रि में पाँचवें दिन जाप करना चाहिए. इसके जाप करने से मां प्रसन्न होती हैं.

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और स्कंदमाता के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, मैं आपको बारंबार प्रणाम करता / करती हूँ. हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें.

इस दिन साधक का मन 'विशुद्ध' चक्र में अवस्थित होता है. इनके विग्रह में भगवान स्कंदजी बालरूप में इनकी गोद में बैठे होते हैं.

इस मंत्र से ध्यान लगाकर करें माता की अराधना..

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्वनीम्।।

धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पंचम दुर्गा त्रिनेत्रम्।

अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥

पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानांलकार भूषिताम्।

मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल धारिणीम्॥

प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वांधरा कांत कपोला पीन पयोधराम्।

कमनीया लावण्या चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥

पूजा की विधि :

*नवरात्रि के पांचवें दिन स्नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें.

*अब घर के मंदिर या पूजास्थल पर स्‍कंदमाता की तस्‍वीर या प्रतिमा लगाएं.

*माता की पूजा शुरु करें

*गंगाजल से शुद्धिकरण करें.

*माता की मूर्ति को जल से स्नान करायें

*अब एक कलश में पानी लेकर उसमें कुछ सिक्‍के डालें.

*मंत्रोच्चार करते हुए व्रत का संकल्प पढ़ें

*इसके बाद स्‍कंदमाता को रोली-कुमकुम लगाएं

*वस्त्रादि पहनाकर मां को भोग लगाएं

*स्‍कंद माता को केले का भोग लगाएं. मान्‍यता है कि ऐसा करने से मां निरोगी रहने का आशीर्वाद देती हैं

*पुष्प व माला माता को अर्पण करें

*गंगाजल छिड़कर घर के हर कोने को पवित्र करें

*माता की कथा कर मां को प्रसन्न करें.

*अब धूप-दीपक से मां की आरती उतारें.

*आरती के बाद घर के सभी लोगों को प्रसाद बांटें और आप भी ग्रहण करें.

मां स्कंदमाता की आरती..

जय तेरी हो स्कंदमाता

पांचवा नाम तुम्हारा आता

सब के मन की जानन हारी

जग जननी सब की महतारी

तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं

हरदम तुम्हे ध्याता रहूं मैं

कई नामो से तुझे पुकारा

मुझे एक है तेरा सहारा

कहीं पहाड़ों पर है डेरा

कई शहरों में तेरा बसेरा

हर मंदिर में तेरे नजारे गुण गाये

तेरे भगत प्यारे भगति

अपनी मुझे दिला दो शक्ति

मेरी बिगड़ी बना दो

इन्द्र आदी देवता मिल सारे

करे पुकार तुम्हारे द्वारे

दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आये

तुम ही खंडा हाथ उठाये

दासो को सदा बचाने आई

‘चमन’ की आस पुजाने आई

जय तेरी हो स्कंदमाता...

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