ePaper

Basant Panchmi 2026 : बसंत पंचमी से पहले जानिए सरस्वती नदी के लुप्त होने की कहानी

22 Jan, 2026 12:57 pm
विज्ञापन
Basant Panchami 2026 story about Saraswati river disappearance

सरस्वती नदी कहां चली गई? बसंत पंचमी से पहले जानिए

Basant Panchmi 2026: बसंत पंचमी से पहले जानिए सरस्वती नदी के लुप्त होने की कहानी. पुराणों में वर्णित श्राप, धार्मिक मान्यताएं और देवी से नदी तक का रहस्यमय सफर.

विज्ञापन

डॉ राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’

Basant Panchmi 2026: इस साल 23 जनवरी को सरस्वती पूजा यानी बसंत पंचमी मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सरस्वती ही नदी के रूप में धरती पर अवतरित हुईं. इसलिए सरस्वती पूजा केवल देवी की नहीं, बल्कि उस पवित्र नदी की भी पूजा मानी जाती है, जो जीवन और ज्ञान दोनों देती है.

वैदिक धर्मग्रंथों के अनुसार धरती पर नदियों की कहानी सरस्वती नदी से शुरू होती है. प्राचीन ग्रंथों में सरस्वती को बहुत विशेष स्थान दिया गया है. ऋग्वेद और महाभारत जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में सरस्वती नदी का बार-बार उल्लेख मिलता है. ऋग्वेद में एक खास नदी सूक्त है, जिसमें कई नदियों का वर्णन किया गया है. लेकिन इन सभी में सरस्वती को सबसे श्रेष्ठ माना गया है. इसी कारण एक सूक्त में सरस्वती को ‘नदीतमा’, यानी सभी नदियों में सबसे महान और पवित्र नदी कहा गया है.

महाभारत काल में सरस्वती नदी को मिला था श्राप

पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि महाभारत काल में सरस्वती नदी को श्राप मिला था. इस श्राप के कारण यह माना जाता है कि कलियुग के आने तक सरस्वती नदी धरती से लुप्त रहेंगी, यानी वे दिखाई नहीं देंगी, लेकिन गुप्त रूप में बहती रहेंगी. सरस्वती नदी के लुप्त होने को लेकर धार्मिक ग्रंथों में अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं. पुराणों में बताया गया है कि सरस्वती को श्राप मिला, जिसके कारण वे धरती से गायब हो गईं. इस विषय में स्कंद पुराण में कई कथाएं वर्णित हैं.

गणेश जी द्वारा दिया गया श्राप

स्कंद पुराण के नागर खंड के 172वें अध्याय के अनुसार, जब महाभारत का लेखन हो रहा था, उस समय सरस्वती नदी बहुत तेज प्रवाह में बह रही थीं. उनके जल की तेज आवाज से गणपति जी को लिखने में बाधा हो रही थी. उन्होंने सरस्वती से निवेदन किया कि वे थोड़ा धीमे बहें, ताकि लेखन कार्य ठीक से हो सके. लेकिन अपने वेग के कारण सरस्वती ने गणेश जी की बातों को अनसुना कर दिया. इससे क्रोधित होकर गणपति जी ने उन्हें पाताल लोक में बहने का श्राप दे दिया. मान्यता है कि इसी श्राप के कारण सरस्वती नदी धरती से लुप्त हो गईं.

दुर्वासा ऋषि का श्राप

सरस्वती के लुप्त होने की एक दूसरी कथा भी स्कंद पुराण के तीर्थ महात्म्य में मिलती है. इसके अनुसार, दुर्वासा ऋषि के श्राप के कारण सरस्वती नदी अदृश्य हो गईं. यह भी कहा जाता है कि कलियुग के अंत तक सरस्वती पूरी तरह से विलुप्त रहेंगी और कल्कि युग में दोबारा प्रकट होंगी.

ये भी देखें:  कल होगी वीणापाणि की पूजा, जानिए मां सरस्वती के नाम में छिपा ज्ञान

वशिष्ठ ऋषि और विश्वामित्र की कथा

एक और मान्यता के अनुसार, विश्वामित्र के क्रोध से उत्पन्न परिस्थितियों में ऋषि वशिष्ठ ने सरस्वती नदी को लुप्त होने का श्राप दिया. इस श्राप के कारण सरस्वती पाताल लोक में जाकर बहने लगीं और धरती पर उनका प्रवाह समाप्त हो गया.

प्राकृतिक कारण भी माने जाते हैं

कुछ विद्वानों का मानना है कि लंबे समय में जलवायु परिवर्तन, भूमि की बनावट में बदलाव, मौसम परिवर्तन और भूस्खलन जैसे प्राकृतिक कारणों से भी सरस्वती नदी धीरे-धीरे सूख गई. लेकिन धार्मिक कथाओं में श्राप की बातें आज भी जुड़ी हुई हैं.

देवी और नदी दोनों रूपों में पूज्य

भगवती शारदे कभी देवी के रूप में तो कभी नदी के रूप में भारत भूमि को ज्ञान और संस्कृति का उपहार देती रही हैं. साल भर उनकी महिमा गाई जाती है, लेकिन वसंत पंचमी के दिन पूरा वातावरण सरस्वतीमय हो जाता है और हर ओर विद्या व ज्ञान की आराधना होती है.

विज्ञापन
Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक समय तक काम करने का अनुभव हासिल किया है. इस दौरान कंटेंट राइटिंग और मीडिया क्षेत्र में मेरी मजबूत पकड़ बनी. पिछले 5 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं, जो मेरे प्रमुख विषय रहे हैं और जिन पर लेखन मेरी खास पहचान है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. इसके अतिरिक्त, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से काम किया है, जिससे मेरी लेखन शैली विविध और व्यापक बनी है. 📩 संपर्क : shaurya.punj@prabhatkhabar.in

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola

अपने पसंदीदा शहर चुनें

ऐप पर पढ़ें