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Astro Tips: त्वचा रोगों के पीछे रहता है ग्रहों का प्रभाव, जानिए ज्योतिषीय उपाय

Updated at : 31 Aug 2024 12:00 PM (IST)
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Astro Tips: त्वचा रोगों के मामले में कई ग्रहों को जिम्मेदार माना गया है. आइए जानें इन ग्रहों के बारे में

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Astro Tips: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव माना जाता है. त्वचा रोगों के मामले में, शनि, राहु और केतु को प्रमुख रूप से जिम्मेदार माना जाता है.

शनि ग्रह

कारण: शनि को कर्मफल दाता कहा जाता है. यदि व्यक्ति ने पिछले जन्मों में त्वचा संबंधी पाप किए हों, तो इस जन्म में शनि ग्रह के दुष्प्रभाव के रूप में त्वचा रोग हो सकते हैं.

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लक्षण: शनि के दुष्प्रभाव से त्वचा रोगों के साथ-साथ शरीर में दर्द, थकान और मानसिक तनाव भी हो सकता है.

उपाय: शनिवार को शनि मंदिर जाकर तेल का दान, काले तिल का दान, और लोहे की वस्तुओं का दान करना चाहिए. हनुमान जी की पूजा और शनि चालीसा का पाठ भी लाभदायक होता है.

राहु और केतु

कारण: राहु और केतु छाया ग्रह हैं, जो अक्सर अशुभ फल देते हैं. ये ग्रह त्वचा रोगों के साथ-साथ एलर्जी और विषाक्त पदार्थों से संबंधित समस्याएं भी पैदा कर सकते हैं.

लक्षण: राहु और केतु के दुष्प्रभाव से त्वचा पर दाग-धब्बे, खुजली और सूजन हो सकती है.

उपाय: राहु और केतु के शांति के लिए पीपल के पेड़ की पूजा, राहु के बीज मंत्र का जाप, और केतु के बीज मंत्र का जाप करना चाहिए.

अन्य ग्रहों का प्रभाव

मंगल: मंगल ग्रह भी त्वचा रोगों के लिए जिम्मेदार हो सकता है. मंगल के दुष्प्रभाव से त्वचा में जलन, लालिमा और फोड़े-फुंसी हो सकती हैं.

सूर्य: सूर्य ग्रह त्वचा रोगों के साथ-साथ आंखों से संबंधित समस्याएं भी पैदा कर सकता है.

त्वचा रोगों के लिए ज्योतिषीय उपाय

रत्न: नीलम, ओपल और मोती जैसे रत्न धारण करने से शनि, राहु और केतु के दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं.

मंत्र जाप: संबंधित ग्रहों के बीज मंत्रों का जाप करने से भी लाभ होता है.

दान: नियमित रूप से दान करने से ग्रहों का प्रकोप कम होता है.
पूजा-पाठ: नियमित रूप से पूजा-पाठ करने से मन शांत रहता है और रोगों से मुक्ति मिलती है.

आहार: सात्विक आहार लेने से शरीर स्वस्थ रहता है और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है.

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि और राहु की युति है और वह त्वचा रोग से पीड़ित है. इस स्थिति में, व्यक्ति को शनिवार को शनि मंदिर जाकर तेल का दान करना चाहिए और हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए. इसके साथ ही राहु के बीज मंत्र का जाप भी करना चाहिए. नीलम और ओपल धारण करने से भी लाभ हो सकता है.

जन्मकुंडली, वास्तु, तथा व्रत त्यौहार से सम्बंधित किसी भी तरह से जानकारी प्राप्त करने हेतु दिए गए नंबर पर फोन करके जानकारी प्राप्त कर सकते है .

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594/9545290847

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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