क्या पत्नी संग एक ही थाली में खाना सही? जानिए क्या कहता है शास्त्र

Astro Tips: can husband wife not to eat in same plate
Astro Tips: अक्सर आपने देखा होगा कि पति-पत्नी एक ही थाली में भोजन करते हैं. इसे इस दृष्टिकोण से देखा जाता है कि ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और संबंध मजबूत होता है, लेकिन धार्मिक शास्त्रों में इसे अनुचित माना गया है. शास्त्रों में कहा गया है कि पति-पत्नी को कभी भी एक साथ एक थाली में भोजन नहीं करना चाहिए.
Astro Tips: भारतीय संस्कृति में भोजन को केवल शारीरिक आवश्यकता के रूप में नहीं, बल्कि एक पवित्र कार्य के रूप में देखा गया है. भोजन करते समय कई नियम और कायदे निर्धारित किए गए हैं, जिनका पालन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धता के लिए आवश्यक माना जाता है. इन नियमों में से एक यह है — क्या पति-पत्नी को एक ही थाली में भोजन करना चाहिए या नहीं?
शास्त्रों में भोजन के नियम
धर्मशास्त्रों और आयुर्वेद में भोजन को ध्यान, मौन और एकाग्रता के साथ करने की सलाह दी गई है. “अन्न ब्रह्म” कहा गया है, जिसका अर्थ है कि भोजन को ईश्वर का रूप मानकर उसका आदर करना चाहिए. यह भी कहा गया है कि भोजन के समय अत्यधिक बातचीत, हंसी-मजाक या अन्य ध्यान भटकाने वाले व्यवहार से परहेज करना चाहिए.
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एक ही थाली में खाना – परंपरा या अनुशासन?
कुछ प्राचीन ग्रंथों में यह उल्लेख किया गया है कि पति-पत्नी या दो व्यक्तियों को एक ही थाली में भोजन नहीं करना चाहिए, विशेषकर जब वह भोजन नियमित रूप से किया जा रहा हो. इसके पीछे मुख्यतः स्वास्थ्य और स्वच्छता से संबंधित कारण हैं, जैसे कि थूक का आदान-प्रदान, संक्रमण का खतरा आदि. इसके अतिरिक्त, इसे व्यक्तिगत अनुशासन और एकांत में भोजन करने की परंपरा को बढ़ावा देने वाला नियम माना जाता है.
विवाह संबंधों में सामंजस्य का प्रतीक भी
हालांकि वर्तमान युग में पति-पत्नी का एक ही थाली में प्रेमपूर्वक भोजन करना आपसी स्नेह, संबंध और अपनापन को दर्शाता है. यह भावनात्मक निकटता और रिश्ते में मिठास को बढ़ाने का एक साधन बन सकता है. विशेष रूप से किसी विशेष अवसर पर या कभी-कभी किया गया ऐसा व्यवहार रिश्ते को और मजबूत बना सकता है.
शास्त्रों में एक ही थाली में भोजन करने की अनुशंसा नहीं की गई है, लेकिन यदि इसे स्वच्छता, मर्यादा और सीमित प्रेमभाव के साथ किया जाए तो इसमें कोई हानि नहीं है. यह आवश्यक है कि हम परंपरा और वर्तमान जीवनशैली के बीच संतुलन बनाए रखें.
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लेखक के बारे में
By Shaurya Punj
मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.
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