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Guru Purnima Ki Aarti: आज गुरु पूर्णिमा के दिन इस आरती के पाठ से जगाएं सोया भाग्य, देखें लिरिक्स

Updated at : 27 Aug 2025 8:25 AM (IST)
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Guru Purnima Ki Aarti lyrics in Hindi

Guru Purnima Ki Aarti

Guru Purnima Ki Aarti: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गुरु की आरती का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है. यह न केवल गुरु कृपा प्राप्त करने का माध्यम है, बल्कि सोए हुए भाग्य को भी जागृत करने का उपाय है. आइए जानें इस शुभ दिन गाई जाने वाली गुरु आरती के पवित्र लिरिक्स.

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Guru Purnima Ki Aarti: इस वर्ष 2025 में आज, यानी 10 जुलाई को पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है. शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था, जिन्होंने महाभारत और अनेक पुराणों की रचना की. आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को वेदव्यास जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. इस विशेष दिन पर गुरुओं की पूजा और सम्मान करने की परंपरा है. शिष्य अपने गुरु से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उपवास रखते हैं और विशेष पूजन का आयोजन करते हैं. कई स्थानों पर हवन-यज्ञ का भी आयोजन किया जाता है. पूजन के समापन पर गुरु की आरती गाई जाती है, जिसमें उनकी महिमा और उपकारों का गुणगान किया जाता है. यदि आप भी गुरु पूर्णिमा का व्रत कर रहे हैं तो पूजन के अंत में यह आरती अवश्य गाएं. नीचे पढ़ें गुरु आरती के लिरिक्स

गुरु महाराज की आरती हिंदी में

जय गुरुदेव अमल अविनाशी, ज्ञानरूप अन्तर के वासी,
पग पग पर देते प्रकाश, जैसे किरणें दिनकर कीं।
आरती करूं गुरुवर की॥

जब से शरण तुम्हारी आए, अमृत से मीठे फल पाए,
शरण तुम्हारी क्या है छाया, कल्पवृक्ष तरुवर की।
आरती करूं गुरुवर की॥

ब्रह्मज्ञान के पूर्ण प्रकाशक, योगज्ञान के अटल प्रवर्तक।
जय गुरु चरण-सरोज मिटा दी, व्यथा हमारे उर की।
आरती करूं गुरुवर की।

अंधकार से हमें निकाला, दिखलाया है अमर उजाला,
कब से जाने छान रहे थे, खाक सुनो दर-दर की।
आरती करूं गुरुवर की॥

संशय मिटा विवेक कराया, भवसागर से पार लंघाया,
अमर प्रदीप जलाकर कर दी, निशा दूर इस तन की।
आरती करूं गुरुवर की॥

भेदों बीच अभेद बताया, आवागमन विमुक्त कराया,
धन्य हुए हम पाकर धारा, ब्रह्मज्ञान निर्झर की।
आरती करूं गुरुवर की॥

करो कृपा सद्गुरु जग-तारन, सत्पथ-दर्शक भ्रांति-निवारण,
जय हो नित्य ज्योति दिखलाने वाले लीलाधर की।
आरती करूं गुरुवर की॥

आरती करूं सद्गुरु की
प्यारे गुरुवर की आरती, आरती करूं गुरुवर की।

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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