महाशिवरात्रि पर शिव चालीसा का पाठ करें, बरसेंगी महादेव की कृपा
Published by : Neha Kumari Updated At : 15 Feb 2026 7:50 AM
महाशिवरात्रि 2026
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक विशेष त्योहार है. इस दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए शिव चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए. यहाँ पढ़ें शिव चालीसा के लिरिक्स.
Mahashivratri 2026: आज, 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पावन पर्व है. यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक है. इस दिन घरों और मंदिरों में भगवान शिव की आराधना की जाती है. भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष रूप से व्रत करते हैं. इस दिन पूजा के समय शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. इससे भक्तों को मानसिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है.
शिव चालीसा हिंदी में (Shiv Chalisa in Hindi)
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥
चौपाई
जय गिरिजा पति दीनदयाला,
सदा करत संत प्रतिपाला।
भाल चन्द्रमा सोहत नीके,
कानन कुण्डल नागफनी के।
अंग गौर शिर गंग बहाए,
मुण्डमाल तन क्षार लगाए।
वस्त्र खाल बाघंबर सोहे,
छवि को देख नाग मन मोहे।
मैना मातु की हवे दुलारी,
बाम अंग सोहत छवि न्यारी।
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी,
करत सदा शत्रुन क्षयकारी।
नंदी गणेश सोहै तहँ कैसे,
सागर मध्य कमल हैं जैसे।
कार्तिक श्याम और गणराऊ,
या छवि को कहि जात न काऊ।
देवन जबहीं जाय पुकारा,
तब ही दुख प्रभु आप निवारा।
किया उपद्रव तारक भारी,
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी।
तुरत षडानन आप पठायउ,
लवनिमेष में मारि गिरायउ।
आप जलंधर असुर संहारा,
सुयश तुम्हार विदित संसार।
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई,
सबहिं कृपा कर लीन बचाई।
किया तपहिं भागीरथ भारी,
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी।
दानिन में तुम सम कोउ नाहीं,
सेवक स्तुति करत सदाहीं।
वेद नाम महिमा तव गाई,
अकथ अनादि भेद नहिं पाई।
प्रकटि उदधि मंथन में ज्वाला,
जरत सुरासुर भए विहाला।
कीन्ही दया तहं करी सहाई,
नीलकण्ठ तब नाम कहाई।
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा,
जीत के लंक विभीषण दीन्हा।
सहस कमल में हो रहे धारी,
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी।
एक कमल प्रभु राखेउ जोई,
कमल नयन पूजन चहं सोई।
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर,
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर।
जय जय जय अनन्त अविनाशी,
करत कृपा सब के घटवासी।
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै,
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै।
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो,
येहि अवसर मोहि आन उबारो।
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो,
संकट से मोहि आन उबारो।
मात-पिता भ्राता सब होई,
संकट में पूछत नहिं कोई।
स्वामी एक है आस तुम्हारी,
आय हरहु मम संकट भारी।
धन निर्धन को देत सदा हीं,
जो कोई जांचे सो फल पाहीं।
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी,
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी।
शंकर हो संकट के नाशन,
मंगल कारण विघ्न विनाशन।
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं,
शारद नारद शीश नवावैं।
नमो नमो जय नमः शिवाय,
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय।
जो यह पाठ करे मन लाई,
ता पर होत है शम्भु सहाई।
ऋणियां जो कोई हो अधिकारी,
पाठ करे सो पावन हारी।
पुत्रहीन कर इच्छा जोई,
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई।
पंडित त्रयोदशी को लावे,
ध्यानपूर्वक होम करावे।
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा,
ताके तन नहीं रहै कलेशा।
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे,
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे।
जन्म जन्म के पाप नसावे,
अंत धाम शिवपुर में पावे।
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी,
जानि सकल दुःख हरहु हमारी।
दोहा
नित्य नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश।
मगर छठि हेमन्त ऋतु, संवत् चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण।
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