सूक्ष्म शरीर की महत्ता

Published at :18 Dec 2015 11:34 PM (IST)
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सूक्ष्म शरीर की महत्ता

हमारे स्थूल शरीर में जो क्रियाएं हो रही हैं, विज्ञान उनको जानता है. किंतु वह यह नहीं जानता कि वे क्रियाएं क्यों हो रही हैं. वह यदि इस बात को समझ पाता कि स्थूल शरीर से आगे सूक्ष्म शरीर का भी अस्तित्व है, जिसके द्वारा सारी व्यवस्थाएं हो रही हैं, जो एक कंट्रोल-रूम की तरह […]

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हमारे स्थूल शरीर में जो क्रियाएं हो रही हैं, विज्ञान उनको जानता है. किंतु वह यह नहीं जानता कि वे क्रियाएं क्यों हो रही हैं. वह यदि इस बात को समझ पाता कि स्थूल शरीर से आगे सूक्ष्म शरीर का भी अस्तित्व है, जिसके द्वारा सारी व्यवस्थाएं हो रही हैं, जो एक कंट्रोल-रूम की तरह है, जो सारे नियंत्रण कर रहा है, तो बहुत सारी समस्याएं सुलझ जातीं. शरीर नामकर्म अनेक शरीरों का निर्माण करता है.
एक है स्थूल शरीर. यह हाड़ा-मांस और रक्तमय शरीर है. एक है तेजस शरीर. यह हमारा विद्युत शरीर है. सारी व्यवस्था के संचालन में इसका योग है. उसके आगे है कर्म शरीर. कर्म शरीर और स्थूल शरीर के बीच सेतु का काम करता है- तेजस शरीर. मैं बोल रहा हूं. मेरे सामने माइक है. मेरे शब्द दूर तक संचरण कर रहे हैं. यह विद्युत के सहारे हो रहा है. विद्युत का काम संवहन करना है.
तेजस शरीर यही काम करता है. कर्म शरीर के द्वारा जो कुछ स्थूल शरीर में आ रहा है, वह सारा तेजस शरीर के द्वारा आ रहा है. यदि यह सेतु नहीं होता, तो सूक्ष्म शरीर या कर्म शरीर कुछ भी नहीं कर पाता. कर्म शरीर, कर्म शरीर बना रहता. स्थूल शरीर में कुछ भी संक्रांत नहीं होता. दोनों के बीच कोई संबंध-सूत्र नहीं रहता.
– आचार्य महाप्रज्ञ
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