गुरु होने का अर्थ

Updated at :05 Sep 2015 12:40 AM
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गुरु होने का अर्थ

गुरु का एक ही अर्थ है : तुम्हारी नींद को तोड़ देना. तुम्हें जगा दे, तुम्हारे सपने बिखर जाएं, तुम होश से भर जाओ. निश्चित ही काम कठिन है. और न केवल कठिन है, बल्कि शिष्य को निरंतर लगेगा कि गुरु विघ्न डालता है. जब तुम्हें कोई साधारण नींद से भी उठाता है, तब तुम्हें […]

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गुरु का एक ही अर्थ है : तुम्हारी नींद को तोड़ देना. तुम्हें जगा दे, तुम्हारे सपने बिखर जाएं, तुम होश से भर जाओ. निश्चित ही काम कठिन है. और न केवल कठिन है, बल्कि शिष्य को निरंतर लगेगा कि गुरु विघ्न डालता है. जब तुम्हें कोई साधारण नींद से भी उठाता है, तब तुम्हें लगता है, उठानेवाला मित्र नहीं, शत्रु है.

नींद प्यारी है. और यह भी हो सकता है कि तुम एक सुखद सपना देख रहे हो और चाहते थे कि सपना जारी रहे. उठने का मन नहीं होता. मन सदा सोने का ही होता है. मन आलस्य का सूत्र है. इसलिए जो भी तुम्हें झकझोरता है, जगाता है, बुरा मालूम पड़ता है. जो तुम्हें सांत्वना देता है, वह तुम्हें भला मालूम पड़ता है.

सांत्वना की तुम तलाश कर रहे हो, सत्य की नहीं. और इसलिए तुम्हारी सांत्वना की तलाश के कारण ही दुनिया में सौ गुरुओं में निन्यान्बे गुरु झूठे ही होते हैं. क्योंकि जब तुम कुछ मांगते हो, तो कोई न कोई उसकी पूर्ति करनेवाला पैदा हो जाता है. असद्गुरु जीता है, क्योंकि शिष्य कुछ गलत मांग रहे हैं; खोजनेवाले कुछ गलत खोज रहे हैं.

जिस गुरु के पास जाकर तुम्हें नींद गहरी होती मालूम हो, वहां से भागना; वहां एक क्षण रुकना मत. जो गुरु तुम्हें झकझोरता न हो, उससे तुम बचना. गुरु के पास पहुंच कर तुम्हारे शास्त्र, तुम्हारे धर्म, तुम्हारी मसजिद, मंदिर, तुम खुद, तुम्हारा सब छिन जायेगा. इसलिए गुरु के पास जाना बड़े से बड़ा साहस है.

आचार्य रजनीश ओशो

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