समता का अभ्यास

धार्मिक जगत् का एक महत्वपूर्ण शब्द है तपस्वी. साधु का एक अभिधान बताया गया है तपोधन. तपस्या जिसका धन है, वह तपोधन कहलाता है. मुनि तपस्या करे, यह तो वांछनीय है ही, किंतु एक गृहस्थ को भी अपने जीवन में तपस्या करनी चाहिए. जैन वा्मय में तपस्या के बारह भेद बताये गये हैं. वे दो […]
धार्मिक जगत् का एक महत्वपूर्ण शब्द है तपस्वी. साधु का एक अभिधान बताया गया है तपोधन. तपस्या जिसका धन है, वह तपोधन कहलाता है. मुनि तपस्या करे, यह तो वांछनीय है ही, किंतु एक गृहस्थ को भी अपने जीवन में तपस्या करनी चाहिए.
जैन वा्मय में तपस्या के बारह भेद बताये गये हैं. वे दो भागों में विभक्त हैं-बाह्यतप और अभ्यंतरतप. श्रीमद्भगवद्गीता में भी तपस्या के अनेक प्रकार उपलब्ध होते हैं. उनमें एक प्रकार है- मानस तप. मानस तप का प्रथम आयाम है- मानसिक प्रसन्नता. मन में प्रसन्नता रखना भी एक तपस्या है. मानसिक तपस्या तभी संभव है, जब आदमी का मन निर्मल बनता है, निर्विकार होता है.
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