दीपावली कल, शाम 6.41 से 8.37 बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त

Updated at :22 Oct 2014 7:46 AM
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दीपावली कल, शाम 6.41 से 8.37 बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त

पटना : दीपावली गुरुवार को मनायी जायेगी. पंडित मार्कंडेय शारदेय के अनुसार इस बार दीपावली में विशेष संयोग बन रहा है, जो राज्य व देश के लिए उत्तम है. गुरुवार को शाम चार बजे चंद्रमा तुला राशि में प्रवेश कर रहा है. साथ ही तुला राशि में सूर्य, चंद्र, शुक्र व शनि चार ग्रहों की […]

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पटना : दीपावली गुरुवार को मनायी जायेगी. पंडित मार्कंडेय शारदेय के अनुसार इस बार दीपावली में विशेष संयोग बन रहा है, जो राज्य व देश के लिए उत्तम है. गुरुवार को शाम चार बजे चंद्रमा तुला राशि में प्रवेश कर रहा है. साथ ही तुला राशि में सूर्य, चंद्र, शुक्र व शनि चार ग्रहों की युति हो रही है.

शनि उच्च राशि का और सूर्य नीच राशि का है. हालांकि उच्च ग्रह के साथ नीच ग्रह की युति भी फलदायक होती है. इससे शनि के साथ सूर्य भी उत्तम फल देनेवाला है. दीपावली में अमावस्या तिथि, प्रदोष काल, शुभ लग्न व चौघडि़या मुहूर्त का विशेष महत्व है. इस दिन सूर्यास्त 5.37 बजे होगा. इस अवधि से लेकर 8.14 बजे तक प्रदोष कल रहेगा. इस समय दीपावली पूजन करना अति उत्तम रहेगा. साथ ही प्रदोष काल के स्थिर लग्न में पूजन करना उत्तम है. जो शाम 6.41 बजे से 8.37 बजे तक रहेगा. इस समय प्रदोष काल व स्थिर लग्न के साथ होने से पूजा करना शुभ फलदायी है.

* करें शुभ मुहूर्त में पूजा

इस दिन गृहस्थ और व्यापारी दोनों वर्गों के लोग पूजा करते हैं. व्यापारी इस दिन बही-खाता बदलते हैं, वहीं, गृहस्थ प्रदोष काल में महालक्ष्मी की पूजा कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं. शास्त्रों के अनुसार दीपावली में गोधूलि लग्न से आरंभ होनेवाली पूजा महानिशिथ काल अर्थात अर्धरात्रि तक की जाती है. इस वर्ष प्रदोष काल में वृष लग्न में 6.41 बजे से 8.37 बजे तक महालक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है.

शास्त्रों के अनुसार स्थिर लग्न में वृश्चिक, कंुभ, वृष व सिंह चार लग्न पूजा के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है. वहीं, वृष लग्न में 6.41 बजे से 8.37 बजे तक सर्वोत्तम मुहूर्त है. उसके बाद सिंह लग्न में पूजा करना भी उत्तम माना गया है, जो अर्धरात्रि 1.08 बजे से 3.22 बजे तक है. तांत्रिक जगत व मंत्र सिद्धि के लिए यह पूजन का महत्वपूर्ण समय है. साथ ही अहले सुबह शुक्रवार को सूप बजा कर दरिद्र नारायण का निष्कारण करें.

* ऐसे करें पूजा

भूमि व थाल को शुद्ध करके नवग्रह बनाएं. तांबे का कलश बनाएं, जिसमें गंगाजल, दूध, दही, शहद, सुपारी व लौंग डाल कर उसे लाल कपड़े से ढंक कर एक कच्चा नारियल कपड़े में बांध कर रखें. जहां पर नवग्रह यंत्र बनाया है, वहां सोने-चांदी का सिक्का लक्ष्मी गणेश की मूर्तियों को सजायें. धातु की मूर्ति हो, तो दूध, दही व गंगा जल से स्नान करा अक्षत चंदन से शृंगार कर फल-फूल आदि से सजायें. दाहिने ओर पंचमुखी दीपक जलाएं. फिर गणेश जी का स्मरण कर पूजन करें.

* स्थिर लग्न के शुभ मुहूर्त

वृश्चिक लग्न : सुबह 7.55 बजे से 10.12 बजे तक

कुंभ लग्न : दोपहर 2.02 बजे से 3.33 बजे तक

वृष लग्न : शाम 6.41 बजे से 8.37 बजे तक

सिंह लग्न : रात 1.08 बजे से 3.22 बजे तक

* ऐसे बरतें शुद्धता

– सुबह स्न्नान कर नये वस्त्र धारण कर उपवास रखें

– घर की साफ -सफाई कर पवित्र जल का छिड़काव करें

– पूजन के बाद संध्याकालीन पूरे घरों में दीप जलाएं

* पूजन सामग्री

जल, मौली, चावल, गुड़, फल-फूल, गुलाल, रोली, सिंदूर, धूप, बत्ती, कमल का फूल, दुर्बा, कमल गट्टे की माला.

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