नवरात्र का विशेष महत्व

ईश्वर की उपासना के लिए किसी मुहूर्त विशेष की प्रतीक्षा नहीं की जाती. सारा समय भगवान का है, सभी दिन पवित्र हैं, हर घड़ी शुभ मुहूर्त है. हां, प्रकृति में कुछ विशिष्ट अवसर ऐसे आते हैं कि कालचक्र की उस प्रतिक्रिया से मनुष्य सहज ही लाभ उठा सकता है. कालचक्र के सूक्ष्म ज्ञाता ऋषियों ने […]
ईश्वर की उपासना के लिए किसी मुहूर्त विशेष की प्रतीक्षा नहीं की जाती. सारा समय भगवान का है, सभी दिन पवित्र हैं, हर घड़ी शुभ मुहूर्त है. हां, प्रकृति में कुछ विशिष्ट अवसर ऐसे आते हैं कि कालचक्र की उस प्रतिक्रिया से मनुष्य सहज ही लाभ उठा सकता है.
कालचक्र के सूक्ष्म ज्ञाता ऋषियों ने प्रकृति के अंतराल में चल रहे विशिष्ट उभारों को दृष्टिगत रख कर ही ऋतुओं के इस मिलन काल की संधिवेला को नवरात्र की संज्ञा दी है. नवरात्र पर्वों का साधना विज्ञान में विशेष महत्व है. प्रात:कालीन और सायंकालीन संध्या को पूजा-उपासना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है.
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