गोवर्धन पूजा : स्थापित मान्यताओं के विरुद्ध पहला विद्रोह !
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Oct 2019 7:27 AM
दिवाली की अगली सुबह मनाया जाने वाला गोवर्धन पूजा, गोधन पूजा या अन्नकूट उत्तर भारत के पशुपालकों का बड़ा पर्व है. हमारी संस्कृति में सदियों से स्थापित मान्यताओं के विरुद्ध इसे पहला विद्रोह भी माना जा सकता है. देवराज इंद्र की निरंकुश सत्ता के प्रतिरोध में इस पर्व की शुरुआत द्वापर युग में कृष्ण ने […]
दिवाली की अगली सुबह मनाया जाने वाला गोवर्धन पूजा, गोधन पूजा या अन्नकूट उत्तर भारत के पशुपालकों का बड़ा पर्व है. हमारी संस्कृति में सदियों से स्थापित मान्यताओं के विरुद्ध इसे पहला विद्रोह भी माना जा सकता है. देवराज इंद्र की निरंकुश सत्ता के प्रतिरोध में इस पर्व की शुरुआत द्वापर युग में कृष्ण ने की थी.
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार जब अतिवृष्टि से गोकुल और वृंदावन जलमग्न हो गये, तो वहां के तमाम निवासियों ने अपनी और अपने पशुधन की रक्षा के लिए वर्षा के देवता इंद्र से प्रार्थनाएं कीं. इंद्र को प्रसन्न करने के लिए वैदिक अनुष्ठान किये गये, किंतु भरपूर ‘हवि’ पाने के बावजूद न इन्द्र मेहरबान हुए और न ही वर्षा रुकी. जलप्रलय की स्थिति देख कृष्ण ने अहंकारी इंद्र की आराधना और उनको समर्पित वैदिक अनुष्ठान बंद करा दिये. उस युग में शक्तिशाली इंद्र को गौरव से अपदस्थ कर देना स्थापित सत्ता के विरुद्ध किशोरवय कृष्ण का बड़ा क्रांतिकारी कदम था.
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