Health Astrology: आपकी कुंडली में छिपा है कैंसर का राज, जानिए ज्योतिषीय संकेत

Updated:
विज्ञापन

कुंडली में रोग संकेत

Health Astrology: कैंसर जैसे गंभीर रोग के ज्योतिषीय संकेत आपकी जन्मकुंडली में छुपे हो सकते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ खास ग्रह-स्थितियाँ और भाव इस बीमारी की संभावना दर्शाते हैं. यदि छठा, आठवां या बारहवां भाव प्रभावित हो, तो कैंसर के योग बढ़ जाते हैं. जानिए ऐसे ही महत्वपूर्ण संकेत.

विज्ञापन

Health Astrology: मानव जीवन में शारीरिक और मानसिक परेशानियाँ आती-जाती रहती हैं. पुराने समय से लोग बीमारियों को ठीक करने के लिए जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों का उपयोग करते आए हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी व्यक्ति के रोगों और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी जन्मकुंडली देखकर समझी जा सकती है. यदि किसी व्यक्ति का सही जन्म समय मालूम हो, तो कुंडली के विश्लेषण से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वह किस प्रकार की बीमारियों से प्रभावित हो सकता है.

विज्ञापन

ऐसे मिलता है भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत

कुंडली में छठा भाव रोगों का भाव माना जाता है. इसी भाव से पता चलता है कि व्यक्ति का स्वास्थ्य कैसा रहेगा और वह किन स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर सकता है. ग्रहों का प्रभाव केवल दैनिक जीवन पर ही नहीं पड़ता, बल्कि भविष्य में होने वाली समस्याओं और घटनाओं का संकेत भी देता है. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्र बताते हैं कि कुंडली से कुछ गंभीर और कष्टदायक बीमारियों के संकेत भी समझे जा सकते हैं.

कैंसर क्या होता है?

कैंसर को दुनिया की सबसे गंभीर और खतरनाक बीमारियों में गिना जाता है. इस रोग से प्रभावित व्यक्ति अक्सर मानसिक रूप से भी बहुत टूट जाता है. शरीर में दो प्रकार के रक्तकण होते हैं—लाल रक्तकण और सफेद रक्तकण. कैंसर का असर अक्सर इन कोशिकाओं की कार्यप्रणाली पर पड़ता है. जब शरीर में लाल रक्तकण कम होने लगते हैं, तो प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है. इसकी वजह से शरीर जल्दी थक जाता है, ऊर्जा कम महसूस होती है और नींद अधिक आने लगती है. कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, यही वजह है कि इसे पहचानना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है.

कैंसर के लक्षण

कैंसर को असाध्य और बेहद जटिल रोग माना जाता है. पुरुषों में आमतौर पर मुंह का कैंसर और महिलाओं में गर्भाशय का कैंसर ज्यादा देखने को मिलता है. शरीर के किसी हिस्से में अचानक कोई अनचाही ग्रंथि या गांठ बन जाए, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है. रोग बढ़ने पर यह गांठ कभी-कभी बाहर भी उभर आती है. इस बीमारी में मुंह के अंदर घाव बन जाते हैं जो लंबे समय तक ठीक नहीं होते. इसके अलावा भोजन पचने में समस्या, खाना निगलने में कठिनाई और बोलने में परेशानी भी इसके लक्षणों में शामिल हैं.

ज्योतिष के अनुसार कैंसर कब होने की संभावना बढ़ती है?

ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि यदि चंद्रमा छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो और उन पर तीन पापी ग्रहों की दृष्टि हो, तो यह कैंसर का योग बनाता है. यदि शनि और गुरु कर्क या मकर राशि में हों, तो भी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का संकेत मिलता है. इसके अलावा—

ये भी देखें: संतान प्राप्ति में आ रही है बाधा? जानिए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार क्या है कारण

  • शनि, केतु और गुरु पर नीच चंद्रमा या नीच मंगल की दृष्टि हो,
  • गुरु, केतु और शुक्र का किसी राशि में योग बने,
  • चंद्रमा-केतु-शनि या चंद्रमा-केतु-मंगल एक साथ बैठे हों,
  • राहु और शनि एक ही भाव में हों—
  • तो व्यक्ति में कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है.
  • इसी तरह छठे भाव में स्थिर राशि का मंगल या द्विस्वभाव राशि का शनि भी कैंसर के महत्वपूर्ण ज्योतिषीय कारक माने जाते हैं.

जन्मकुंडली, वास्तु, तथा व्रत त्यौहार से सम्बंधित किसी भी तरह से जानकारी प्राप्त करने हेतु दिए गए नंबर पर फोन करके जानकारी प्राप्त कर सकते है .

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594/9545290847

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola