झारखंड सरकार और राजभवन के बीच फंसा ये विधेयक, अब राज्यपाल ने मंत्री को चर्चा के लिए बुलाया

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अब इस विधेयक पर राज्यपाल ने विभाग के मंत्री बादल पत्रलेख को चर्चा के लिए बुलाया है़ मंगलवार को राज्यपाल के साथ मंत्री व विभागीय अधिकारियों की इस मुद्दे पर चर्चा होनी थी. लेकिन, मंत्री ने एक दिन का समय मांग लिया.

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झारखंड राज्य कृषि और पशुधन विपणन (संवर्धन व सुविधा) विधेयक-2022 को लेकर सरकार और राजभवन के बीच पेच फंसा हुआ है. यह विधेयक पिछले बजट सत्र में 24 मार्च को विधानसभा से पारित होने के बाद राज्यपाल के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया. राज्यपाल ने इस विधेयक को आपत्ति के साथ लौटा दिया था. इसके बाद राज्य सरकार ने इसी विधेयक को पिछले शीतकालीन सत्र के 24 दिसंबर को पारित कर दोबारा राज्यपाल के पास भेजा था.

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अब इस विधेयक पर राज्यपाल ने विभाग के मंत्री बादल पत्रलेख को चर्चा के लिए बुलाया है़ मंगलवार को राज्यपाल के साथ मंत्री व विभागीय अधिकारियों की इस मुद्दे पर चर्चा होनी थी. लेकिन, मंत्री ने एक दिन का समय मांग लिया. इधर, देर शाम इसको लेकर विभाग में हलचल रही. बताया जा रहा है कि बुधवार को कृषि मंत्री इस मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से चर्चा करेंगे, जिसके बाद तय होगा कि वह राज्यपाल से मिलने जायेंगे या नहीं.

पहली बार हिंदी व अंग्रेजी संस्करण में भिन्नता पर उठाये थे सवाल :

पहली बार विधानसभा से पारित होने के 42 दिन के बाद यह विधेयक राज्यपाल के पास पहुंचा था. तब राज्यपाल की ओर से विधेयक के कई बिंदुओं पर सवाल उठाये गये थे. कहा गया था कि विधेयक के हिंदी और अंग्रेजी संस्करण में भिन्नता है. राज्यपाल ने टिप्पणी की थी कि प्रिंटिंग के बाद विभाग ने बिना देखे इसे राजभवन भेज दिया है. विधेयक के कई खंडों में गलतियों में सुधार करने को कहा गया था.

ये प्रावधान थे विधेयक में :

विधेयक में किसानों के उत्पाद को बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से व्यवस्था करने की बात कही गयी थी और ऑनलाइन बाजार सिस्टम को दुरुस्त करने पर जोर दिया गया था. वहीं, अन्य राज्यों से आयातित वस्तुओं पर अधिकतम स्लैब में दो प्रतिशत कृषि शुल्क लगाने का प्रावधान था़ उल्लेखनीय है कि 2015 में पूर्ववर्ती सरकार ने बाजार शुल्क को समाप्त कर दिया था.

इसके अलावा कच्चे माल में एक प्रतिशत और पैक्ड माल यानि जल्द खराब नहीं हाेनेवाले माल पर अधिकतम दो प्रतिशत टैक्स लेने का प्रावधान था. साथ ही बाजार समिति के गठन में भी फेरबदल किया गया था. विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद झारखंड चेंबर ने नये प्रावधान पर आपत्ति जतायी थी. अध्यक्ष किशोर मंत्री के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल रमेश बैश को ज्ञापन भी सौंपा था.

राज्यपाल ने अब तक आठ विधेयक लौटाये

राज्यपाल रमेश बैश अब तक विधानसभा से पारित आठ विधेयक लौटा चुके हैं. वे कई विधेयकों पर आपत्ति भी जता चुके हैं. दो दिन पूर्व ही राज्यपाल विधानसभा से पारित 1932 के खतियान आधारित स्थानीयता से संबंधित विधेयक लौटा चुके हैं. वहीं, पहली बार राज्यपाल ने विधेयक से संबंधित किसी मंत्री को चर्चा के लिए राजभवन बुलाया है़

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