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प्रवासी पक्षियों से गुलजार होने लगे जलाशय, हर साल 25-30 हजार पक्षी आते हैं झारखंड

30 Nov, 2025 10:36 pm
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Migrant Birds in Jharkhand

झारखंड पहुंचने लगे दूर देश के पंछी.

Migrant Birds in Jharkhand: साहिबगंज के उधवा अभ्यारण्य प्रवासी पक्षियों के लिए पसंदीदा जगहों में एक है. इस 565 हेक्टेयर के अभ्यारण्य में गंगा नदी 2 दो प्राकृतिक अप्रवाही झीलें हैं, जिनमें पटौरा और बरहले शामिल हैं. साहिबगंज के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) प्रबल गर्ग कहते हैं कि यह झारखंड का एकमात्र रामसर स्थल है. यह लगभग 160 पक्षी प्रजातियों का घर है.

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Migrant Birds in Jharkhand: झारखंड में तापमान में गिरावट के साथ ही प्रवासी पक्षी जलाशयों की ओर रुख कर रहे हैं. पक्षियों की चहचहाहट एवं रंगीन दृश्यों से पक्षी प्रेमी झीलों की ओर आने लगे हैं. ये मेहमान पक्षी उन्हें आकर्षित कर रहे हैं. हर साल की तरह, इस बार भी हजारों प्रवासी पक्षी अपने मूल क्षेत्रों पर पड़ रहे अत्यधिक ठंड से बचने के लिए झारखंड को अपना शीतकालीन ठिकाना बना रहे हैं.

अत्यधिक ठंड से बचने के लिए झारखंड आते हैं प्रवासी पक्षी

एशियाई जलपक्षी गणना (एडब्ल्यूसी) के झारखंड समन्वयक सत्य प्रकाश ने को बताया कि ये पक्षी भोजन के लिए और मध्य एशिया, हिमालयी क्षेत्र, मंगोलिया और तिब्बती पठार में पड़ने वाली अत्यधिक ठंड से खुद को बचाने के लिए झारखंड में सर्दियों के मौसम में बांधों, झीलों, नदियों और अभ्यारण्यों जैसे विभिन्न जलाशयों में शरण लेते हैं.

Migrant Birds in Jharkhand: पक्षी इन झीलों को बनाते हैं अपना आशियाना

सत्य प्रकाश ने बताया कि राजधानी रांची से सटे रामगढ़ जिले के पतरातू बांध, साहिबगंज के उधवा झील पक्षी अभ्यारण्य, तोपचांची झील, तिलैया और मैथन डैम (धनबाद), कांके और रुक्का डैम (रांची) के अलावा जमशेदपुर के प्रसिद्ध डिमना लेक, चतरा के बास्का झील और अन्य जल निकायों में प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है.

साहिबगंज में है झारखंड का एकमात्र रामसर साइट

सत्या ने बताया कि साहिबगंज के उधवा अभ्यारण्य प्रवासी पक्षियों के लिए पसंदीदा जगहों में एक है. इस 565 हेक्टेयर के अभ्यारण्य में गंगा नदी 2 दो प्राकृतिक अप्रवाही झीलें हैं, जिनमें पटौरा और बरहले शामिल हैं. साहिबगंज के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) प्रबल गर्ग कहते हैं कि यह झारखंड का एकमात्र रामसर स्थल है. यह लगभग 160 पक्षी प्रजातियों का घर है.

प्रदेश की प्रकृति में रंग भरते हैं ये पक्षी

उन्होंने कहा कि सर्दियों में सबसे ज्यादा आने वाले पक्षियों में काला धारीदार हंस, धारीदार बत्तख, मुर्गाबी, कलहंस, गैडवॉल, गुरगल बत्तख और लाल चोंच एवं लाल कलगी वाली बत्तख शामिल हैं, जबकि लाल अंजन, घोंघिल, लिटिल ग्रेब और कौड़िल्ला अभ्यारण्य की साल भर की पक्षी विविधता में योगदान करते हैं.

वन सुरक्षा समिति को वन विभाग ने किया सक्रिय

विशेषज्ञ कहते हैं कि हर साल लगभग 25,000 से 30,000 प्रवासी पक्षी राज्य के जलाशयों में आते हैं. वन विभाग ने प्रभागीय वन अधिकारियों को वन सुरक्षा समितियों को सक्रिय करने को कहा गया है, जो जलाशयों में गतिविधियों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर तुरंत वन अधिकारियों को सूचित करने के को भी कहा गया है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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