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Ranchi News : विदेशी पक्षी बने झारखंडी मेहमान

25 Nov, 2025 9:59 pm
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Ranchi News : विदेशी पक्षी बने झारखंडी मेहमान

झारखंड की वादियां इन दिनों नये-नये पक्षियों से गुलजार है. राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में कई रंग-बिरंगे पक्षी दिखाई दे रहे हैं.

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हरिके बैराज से शुरू होकर झारखंड तक पहुंचती है पंखों की लंबी यात्रा

अच्छे मानसून, भरे जलाशयों और बढ़ते हरित आवरण से लौट रहे विदेशी मेहमान

राज्य में पर्यावरण जागरूकता बढ़ी, जंगलों के विस्तार ने आकर्षित किए प्रवासी परिंदे

गाइड शेरा कुमार गुप्ता ने कई दुर्लभ और पहली बार दिखने वाले पक्षियों की तस्वीरें लीं

रांची. झारखंड की वादियां इन दिनों नये-नये पक्षियों से गुलजार है. राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में कई रंग-बिरंगे पक्षी दिखाई दे रहे हैं. इनमें कई स्थानीय प्रजातियां हैं, तो कई दूर देशों से आये प्रवासी पक्षी. इनके आगमन से प्रकृति की सुंदरता और भी निखर उठी है. पक्षी प्रेमी इनके चित्र कैमरे में कैद कर रहे हैं. कुछ लोग इन पर शोध भी कर रहे हैं. वन विभाग की टीम भी पक्षियों के आगमन पर लगातार नजर बनाये हुए है. पलामू टाइगर रिजर्व के गाइड और पशु-पक्षी प्रेमी शेरा कुमार गुप्ता ने अपने कैमरे में दो दर्जन से अधिक पक्षियों की तस्वीरें कैद की हैं. उन्होंने बताया कि इस बार कई नये प्रजातियों के पक्षी पलामू टाइगर रिजर्व में दिखाई दे रहे हैं. कई प्रजातियां पहली बार यहां दर्ज हुई हैं, जबकि कुछ नियमित रूप से हर वर्ष आती हैं. इस बार कुछ पक्षियों का झारखंड में अपेक्षा से पहले आगमन देखा गया है. शेरा स्वयं कई पक्षियों की आवाज की नकल भी कर लेते हैं. उनका कहना है कि पीटीआर आने वाले पर्यटक इन पक्षियों से खासे आकर्षित हो रहे हैं.

सबसे पहले हरिके बैराज पहुंचते हैं पक्षी

हरिके बैराज पंजाब में सतलुज और व्यास नदियों के संगम पर स्थित एक बांध है, जिसका निर्माण वर्ष 1952 में किया गया था. यह मुख्य रूप से इंदिरा गांधी नहर का स्रोत है, जो पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में सिंचाई और पेयजल की आपूर्ति करती है. बैराज से इंदिरा गांधी नहर और पंजाब की फिरोजपुर फीडर में पानी छोड़ा जाता है. भारत में आने वाले अधिकांश प्रवासी पक्षी सबसे पहले यहीं पहुंचते हैं. इसके बाद वे अपनी अनुकूल परिस्थितियों के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों की ओर फैलते हैं. पूर्व पीसीसीएफ श्री गुप्ता के अनुसार झारखंड में आने वाले अधिकांश प्रवासी पक्षियों का मुख्य मार्ग भी यही है. कुछ पक्षी यहां प्रजनन के लिए जबकि कुछ जलपक्षी भोजन की तलाश में आते हैं.

पर्यावरण जागरूकता से बढ़ा जंगल

झारखंड में पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है. इसी कारण राज्य में हरित आवरण में वृद्धि हुई है. सबसे अधिक बढ़ोतरी वन भूमि के बाहर दर्ज की गयी है, जिससे प्रतीत होता है कि आम लोग भी पौधरोपण को लेकर अधिक रुचि दिखा रहे हैं. इसका सकारात्मक प्रभाव राज्य की जलवायु पर भी पड़ रहा है.

रामगढ़ में मिली 31 प्रजातियां

रामगढ़ में कराये गये एशियन वाटरबर्ड सेंसस में 31 प्रजातियों के पक्षी दर्ज किये गये थे. वहीं, भैरवी डैम में 35 और जोड़ा तालाब में 12 प्रजातियां मिली थीं. पतरातू में नौ प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गयी. बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के राज्य समन्वयक डॉ सत्य प्रकाश के अनुसार बीते वर्ष जनवरी में कोडरमा के तिलैया डैम में 44 प्रजातियां मिली थीं, जिनमें 18 प्रवासी पक्षी थे. इस वर्ष भी पक्षियों की सेंसस प्रक्रिया दिसंबर से शुरू होगी.

झारखंड आने वाली प्रमुख प्रवासी प्रजातियां

बर्ड सेंसस के अनुसार झारखंड में एक दर्जन से अधिक प्रवासी पक्षी आते हैं. इसमें मुख्य रूप से टफटेड डक, ग्रेट क्रेस्टेड ग्रेब, ब्लैक हेडेड गुल, लेसर एडज्यूटेंट, व्हाइट रंप्ड वल्चर, इंडियन वल्चर आदि शामिल हैं.

रूक्का में ब्राह्मणी डक, धुर्वा में रूबी थ्रोट

रूक्का और धुर्वा डैम में इस वर्ष प्रवासी पक्षी अधिक संख्या में दिख रहे हैं. रूक्का डैम में इस बार ब्राह्मणी डक दिखायी दी है, जिसका उल्लेख रामायण में भी मिलता है. सीआइडी फोरेंसिक विभाग में कार्यरत डॉ अमित कुमार के अनुसार यह चिड़िया प्रायः एक-दो की संख्या में आती है. यहां नार्थ सोल्वर और दुर्लभ आस्प्रे भी देखे गए. पर्यावरणप्रेमी डॉ अमित के अनुसार धुर्वा डैम में इस वर्ष गार्गोनी डक, पिंटेल, ग्रेट क्रेस्टेड ग्रेब, टफटेड डक और अत्यंत दुर्लभ रूबी थ्रोट भी दिखायी दी है.

बोटिंग और मत्स्य पालन से पक्षियों को खतरा

राज्य के कई डैमों में बोटिंग शुरू की गयी है. पर्यावरणविदों के अनुसार मशीनचालित नावों से तेल पानी में रिसता है, जिससे जल में मौजूद अल्गी प्रभावित होती है. इसका सीधा असर जल पक्षियों के भोजन पर पड़ता है, जिसके कारण प्रवासी पक्षी धीरे-धीरे इन स्थानों से दूर होने लगते हैं. मत्स्य पालन में प्रयुक्त जाल में पक्षियों के फंसने का भी खतरा रहता है. इससे बचाव के लिए सुझाव दिया गया है कि जलाशयों के सीमित हिस्से में ही नेट डालकर मत्स्य पालन किया जाये.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

इस वर्ष पक्षी अपेक्षा से पहले दिखायी देने लगे हैं. इसका प्रमुख कारण इस वर्ष अच्छा मानसून होना है. जलाशय पूरी तरह भरे हुए हैं. झारखंड में दूसरे देशों से भी कई पक्षी नियमित रूप से आते हैं. पक्षियों के आगमन के पीछे अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर शांति भी महत्वपूर्ण कारक है. भारत में आने वाले कई पक्षियों का मार्ग अफगानिस्तान होकर गुजरता है, जहां इस वर्ष शांति का वातावरण है. इसके कारण पक्षियों की आवाजाही बढ़ी है.

एचएस गुप्ता, पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन विभाग

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MUNNA KUMAR SINGH

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