ePaper

विश्व पुस्तक मेला समाप्त, आख़िरी दिन पाठकों ने की जमकर खरीदारी

Updated at : 13 Jan 2020 5:23 PM (IST)
विज्ञापन
विश्व पुस्तक मेला समाप्त, आख़िरी दिन पाठकों ने की जमकर खरीदारी

नयी दिल्ली : किताबें करती हैं बातें दुनिया की, इंसानों की, आज की कल की, एक-एक पल की… विश्व पुस्तक मेला के आख़िरी दिन पाठकों ने जम कर किताबों की ख़रीदारी की. वहीं नयी किताबों के आगमन का सिलसिला भी लगा रहा. राजकमल प्रकाशन के जलसाघर में बहुप्रतीक्षित उपन्यास ‘आईनासाज़’ का लोकार्पण किया गया. कार्यक्रम […]

विज्ञापन

नयी दिल्ली : किताबें करती हैं बातें दुनिया की, इंसानों की, आज की कल की, एक-एक पल की… विश्व पुस्तक मेला के आख़िरी दिन पाठकों ने जम कर किताबों की ख़रीदारी की. वहीं नयी किताबों के आगमन का सिलसिला भी लगा रहा. राजकमल प्रकाशन के जलसाघर में बहुप्रतीक्षित उपन्यास ‘आईनासाज़’ का लोकार्पण किया गया. कार्यक्रम में लेखिका अनामिका के साथ साहित्यकार प्रभात रंजन शामिल थे.

अमीर खुसरों के जीवन पर आधारित उपन्यास आईनासाज़ अनामिका का पहला उपन्यास है. दिल्ली के सात बादशाहों के दरबार में इतिहास लेखक के रूप में काम करने वाले अमीर खुसरो को हिंदी और उर्दू ज़ुबान के आरंभिक कवि के रूप में याद किया जाता है. फ़ारसी ज़ुबान के वे विद्वान थे. सबसे बढ़कर सूफ़ी संत थे, अपने आप में इतिहास के एक बड़े किरदार थे.

उपन्यास पर बात करते हुए अनामिका ने कहा, “अमीर खुसरो को मैंने अपने अनुकूल गढ़ा है. इतिहास की कतरनों से मैंने एक गुड़िया सिली है, आईनासाज़ मेरी गुड़िया है.“

इस मौके पर मशहूर गायिका चिन्मयी त्रिपाठी ने कबीर और अनामिका के लिखे गीतों को गाकर सुनाया. चिन्मयी ने राधावल्लभ त्रिपाठी के नाटक ‘कथा शकुंतला की’ से एक छोटा अंश पढ़ कर भी सुनाया.

जलसाघर में रविवार को कई नयी किताबों का लोकार्पण किया जिसमें उमा शंकर चौधरी की ‘दिल्ली में नींद’, प्रत्यक्षा सिन्हा की ‘ग्लोब के बाहर लड़की’ और अनुपम मिश्र के लेखों का संग्रह ‘विचार का कपड़ा’ और ‘बिन पानी सब सून’ शामिल है. किताबों में साहित्यकार स्वयं प्रकाश की ‘प्रतिनिधि कहानियां’ भी शामिल हैं.

अनिल कुमार यादव की ‘गौ सेवक’ लंबी कहानी का भी मेले में लोकार्पण किया गया. कहानी पर अपनी बात रखते हुए आलोचक संजीव ने कहा, ‘गौसेवक जिस तरह की कहानी है वह कमरे में बैठकर आपके पास नहीं आ सकती इस कहानी के लिए आपको कहानी के पास जाना पड़ेगा.’ किताब पर बात करते हुए अनिल यादव ने कहा, ‘हमारे आस पास का यथार्थ हमारे कल्पना से ज़्यादा जटिल है. जब कोई कहानी छप जाती है तो उसकी अपनी दुनिया हो जाती है.’

9 दिन चले इस मेले पर अपने बात रखते हुए राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने कहा, ‘विश्व पुस्तक मेले में पाठकों को देखकर किताब के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है. बारिश और कड़कती ठंड के बावजूद पाठक किताब के पक्ष में डटे रहे. युवा पाठकों और हिंदी के युवा लेखन में मेरा विश्वास दृढ़ हुआ. लगातार लगता रहा कि हमारे युवा लेखक अपनी परंपरागत विरासत को संभालने के साथ लेखन के क्षेत्र में नये मानक गढ़ने के लिए तैयार हैं. मुझे विश्वास है कि आने वाला साल मेरी इस सोच को सही सबित करेगा. मेले में हमने साठ से अधिक नयी पुस्तकें का प्रकाशन किया. प्राय: सभी पुस्तकें युवा लेखकों द्वारा विभिन्न विधाओं में लिखी पहली-दूसरी कृतियां हैं. मैं आशा करता हूं की भविष्य में यह सिलसिला और बढ़ेगा.’

इस साल कई युवा कवियों की कविताएं भी प्रकाशित हुई जिसे पाठकों ने खूब पसंद किया. इसमें सुधांशु फिरदौस की ‘अधूरे स्वांगों के दरमियान’, अभिषेक शुक्ल की ‘हर्फ़े आवारा’ और व्योमेश शुक्ल की ‘काजल लगाना भूलना’ शामिल है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola