US Election : कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप के बीच कांटे की टक्कर, भारतीयों के लिए खेला गया दांव
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 01 Nov 2024 11:22 PM
US Election 2024 : विश्व के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति यानी अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में वोटिंग से 3-4 दिन पहले हिंदुओं का मुद्दा छा गया है. वजह साफ है डोनाल्ड ट्रंप डेमोक्रेट्स उम्मीदवार कमला हैरिस को पछाड़ना चाहते हैं क्योंकि लेटेस्ट सर्वे में मुकाबला कांटे की टक्कर का है. भारतीय अमेरिकी हमेशा से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के साथ रहे हैं, लेकिन ट्रंप ने जो दांव खेला है उसके बाद यहां स्थिति बदल रही हैं. जानिए सर्वे के अनुसार कैसा है भारतीय अमेरिकियों का मूड.
US Election 2024 : अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट पांच नवंबर को डाले जाएंगे, यानी चुनाव के लिए वोटर्स को आकर्षित करने की कोशिश चरम पर है. कमला हैरिस जो भारतीय मूल की हैं उन्होंने हिंदुओं को लेकर कोई बयान नहीं दिया है, जबकि दीपावली के मौके पर डोनाल्ड ट्रंप ने हिंदुओं का दिल जीत लिया है. हिंदुओं को अपने पाले में करके ट्रंप ने एक और जंग जीत ली है और वे कमला हैरिस को कड़ी टक्कर दे रहे हैं.
हिंदुओं को लेकर अमेरिका में क्यों मचा है घमासान?
अमेरिकी चुनाव में इस बार हिंदुओं का मुद्दा गरमाया हुआ है. (Indian American Attitudes Survey) भारतीय अमेरिकियों के स्वभाव को समझने के लिए किए गए सर्वे के अनुसार हिंदू अमेरिकी का झुकाव हमेशा से डेमोक्रेट्स उम्मीदवारों की तरफ ही रहा है. इस बार के चुनाव में भी उनकी सहानुभूति कमला हैरिस की तरफ ही है रही है, वजह है उनका भारत कनेक्शन. भारत में 2.6 मिलियन भारतीय अमेरिकी वोटर्स हैं, लेकिन इस बार के चुनाव में इनका झुकाव रिपब्लिकन की तरफ बढ़ रहा है. वजह यह है कि रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने वोटिंग से पहले हिंदू कार्ड खेल दिया है और भारतीयों को अपने पाले में खिंचने की कोशिश की है. ड्रंप ने दीपावली के मौके पर एक संदेश जारी किया है जिसमें उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले का जिक्र किया है और कहा है कि वहां की स्थिति अराजक है. वे हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा पूरे विश्व में करेंगे. अमेरिकी हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए भी वे संकल्प ले चुके हैं. ट्रंप के इस संदेश से अमेरिका के हिंदू वोटर्स प्रभावित हैं और उनका शुक्रिया भी अदा किया है. वहीं कमला हैरिस जिनका भारतीय अमेरिकी समर्थन करते हैं उन्होंने इस मसले पर कुछ नहीं कहा है, जिससे भारतीय अमेरिकी वोटर्स उनसे दूर हो रहे हैं, जबकि पांच नवबंर को मतदान होना है.

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अमेरिकी चुनाव के लेटेस्ट सर्वे में कड़ा मुकाबला, ट्रंप दे रहे टक्कर
अमेरिका के चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है. सर्वे की मानें तो चुनाव से ठीक पहले कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप के बीच कड़ा मुकाबला होता दिख रहा है. लेटेस्ट पोल की मानें तो कमला हैरिस अभी 48 प्रतिशत मत के साथ आगे चल रही हैं, जबकि डोनाल्ड ट्रंप उनके ठीक पीछे 47 प्रतिशत वोटों के साथ नजर आ रहे हैं. राष्ट्रपति चुनाव के रेस से जो बाइडेन के हटने के बाद कमला हैरिस जुलाई महीने में चुनावी मैदान में उतरीं और तब से वो सर्वे में आगे ही चल रही हैं.
क्या कहता है भारतीय अमेरिकियों के लिए किया गया सर्वे
भारतीय अमेरिकी वोटर्स की संख्या अमेरिका में 2.6 मिलियन है. इनके मूड पर ध्यान दें तो 2020 में 56 प्रतिशत भारतीय अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 47 प्रतिशत हो गया है. वहीं रिपब्लिकन पार्टी के साथ जहां 2020 में 21 प्रतिशत भारतीय अमेरिकी थे वे 2024 में 22 प्रतिशत हो गए हैं. पिछले चुनाव में जो बाइडेन को 68 प्रतिशत भारतीयों के वोट मिले थे जबकि कमला हैरिस के समर्थन में 68 प्रतिशत भारतीय अमेरिकी नजर आ रहे हैं, जो सात प्रतिशत की गिरावट को दर्ज कराते हैं जो एक बड़ी गिरावट है. वहीं अगर महिला और पुरुष की बात करें तो 67 प्रतिशत महिलाएं हैरिस के साथ हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत का है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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