बीजेपी की हाइब्रिड पॉलिटिक्स, नीतीश फैक्टर और जातीय समीकरण को साधा; जदयू कोटे से दो डिप्टी सीएम बनाए गए

Published by :Rajneesh Anand
Published at :15 Apr 2026 12:40 PM (IST)
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samrat Choudhary bihar new with nitish kumar

बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ नीतीश कुमार

samrat Choudhary : सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है. उनके साथ नीतीश कुमार के सबसे करीबी और विश्वासपात्र दो नेता को जदयू कोटे से प्रदेश का उपमुख्ममंत्री बनाया गया है. ये दोनों है विजेंद्र यादव और विजय कुमार चौधरी. विजय और विजेंद्र को उपमुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने राज्य की जनता को बहुत बड़ा मैसेज दिया है.

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samrat Choudhary : बिहार की राजनीति में यह सत्ता परिवर्तन एक सोची-समझी रणनीति का परिणाम है. इस सत्ता परिवर्तन के जरिए बिहार की राजनीति में बीजेपी अपनी पैठ और बढ़ाना तो चाहती है,लेकिन वह नीतीश कुमार के अनुभवों और उनकी रणनीति का भी पूरा फायदा उठाना चाहती है. बीजेपी ने जिस तरह सम्राट चौधरी को सीएम और विजेंद्र यादव और विजय कुमार चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया है, उसके पीछे की रणनीति को इस तरह डिकोड किया जा सकता है.

बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण को साधा

अति पिछड़ा वर्ग कुशवाहा जाति के सम्राट चौधरी को सीएम बनाकर बीजेपी ने बड़ा सामाजिक संदेश दिया है कि वह पिछड़ों की हितैषी है.बिहार में अति पिछड़ा वर्ग की आबादी बहुत ज्यादा है और नीतीश कुमार ने हमेशा उन्हें साथ रखा. बीजेपी ने नीतीश कुमार की इस रणनीति से सीख ली और अति पिछड़ों को अपने गुडविल में रखने की कोशिश की है. विजय कुमार चौधरी को डिप्टी सीएम बनाकर अगड़ी जातियों को भी खुश करने की कोशिश की गई है, विजय कुमार चौधरी भूमिहार जाति के हैं. विजेंद्र यादव पिछड़ा वर्ग से आते हैं यानी बिहार की सामाजिक संरचना का पूरा ध्यान रखा गया है.

नीतीश के करीबियों को डिप्टी सीएम बनाकर बीजेपी ने दिया सुशासन जारी रखने का संदेश

विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र यादव दोनों बहुत अनुभवी और नीतीश के राइटहैंड माने जाने वाले नेता हैं. इन दोनों को साथ रखकर बीजेपी ने यह साबित करने की कोशिश की है कि वे नीतीश की विदाई के बाद भी प्रदेश में सुशासन कायम रखना चाहते हैं. बीजेपी एक तरह से यह मैसेज देना चाहती है कि शासन का चेहरा बदला है, पूरा ढांचा नहीं.

ट्रांजिशन मॉडल की राजनीति कर रही है बीजेपी

बिहार में सत्ता परिवर्तन जिस तरह से किया गया है, उसे राजनीति का ट्रांजिशन मॉडल कहा जाता सकता है. बीजेपी ने नेतृत्व संभाल लिया है, लेकिन बिहार के नेता जिस नीतीश कुमार पर इतना भरोसा करते थे, उन्हें दरकिनार नहीं किया गया है. उनके नेटवर्क और अनुभवों को साथ रखकर बीजेपी धीरे-धीरे परिवर्तन करना चाहती है. जनता के भरोसे को तोड़ने या उन्हें किसी तरह का झटका देने के मूड में पार्टी नहीं है. बीजेपी भविष्य की राजनीति कर रही है, लेकिन वह वर्तमान में कोई ऐसी गलती नहीं करना चाहती है, जो उसके लिए नुकसानदेह हो. बिहार में जूनियर पार्टनर अब सीनियर बन चुका है, लेकिन वह सीनियर के अनुभवों को दरकिनार करके जनता के 21 साल के भरोसे को खोना नहीं चाहती है.

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विपक्ष को गंभीर संदेश देने के मूड में है बीजेपी

बीजेपी ने बिहार में जो सत्ता परिवर्तन किया है, उसके जरिए वह अपने सबसे कट्टर विरोधी राजद को मजबूत संदेश देना चाहती है. बीजेपी राजद को यह बताना चाहती है कि वह प्रदेश में अब इस स्थिति में है कि वह सामाजिक समीकरणों को साध सकती है. अब बिहार में जो डबल इंजन की सरकार है, उसमें केंद्र और राज्य का नेतृत्व बीजेपी के पास है, लेकिन नीतीश कुमार और जदयू की भागीदारी भी उसमें बहुत अहम है. यह एक मिश्रित राजनीति (Hybrid Politics) है, जिसमें परिणाम बेहतर आने की पूरी उम्मीद है. बीजेपी बिहार में अपनी शक्ति और बढ़ाना चाहती है, जिसमें वह नीतीश फैक्टर का बखूबी इस्तेमाल कर रही है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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