Rajiv Gauba : पटना के सरकारी स्कूल से राजीव गौबा ने की थी पढ़ाई अब बने नीति आयोग के सदस्य

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राजीव गौबा बने नीति आयोग के सदस्य

Rajiv Gauba : पटना के सरकारी स्कूल से नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य तक राजीव गौबा ने जो यात्रा की है, उसमें उनकी मेहनत और संघर्ष दोनों शामिल है. राजीव गौबा अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने कैबिनेट सचिव के रूप में पांच साल तक सेवा दी और सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले कैबिनेट सचिव बन गए हैं.

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Rajiv Gauba : राजीव गौबा 1982 बैच के झारखंड कैडर के आईएएस अधिकारी हैं, जिन्हें नीति आयोग का फुल टाइम (पूर्णकालिक) मेंबर बनाया गया है. इससे पहले राजीव गौबा कैबिनेट सचिव के रूप में कार्यरत थे. वे इस पद पर 2019 से 2024 तक कार्यरत रहे. इससे पहले राजीव गौबा झारखंड के मुख्य सचिव भी रहे हैं.

राजीव गौबा का झारखंड कनेक्शन

राजीव गौबा झारखंड कैडर के आईएएस अधिकारी तो रहे ही हैं, वे यहां के मुख्य सचिव भी रहे हैं. उन्होंने जनवरी 2015 से मार्च 2016 तक मुख्य सचिव के पद पर अपनी सेवा दी थी. इसके अलावा वे झारखंड में शहरी विकास मंत्रालय के सचिव भी रहे. अपने कार्यकाल के दौरान राजीव गौबा ने काफी ईमानदारी और गंभीरता के साथ काम किया और प्रशासनिक सुधार के लिए कार्य किए, ताकि शासन को प्रभावी बनाया जा सके. राजीव गौबा ने युवाओं को काफी मौका दिया और ग्रामीण इलाकों में सीआरपीएफ के कैंप बनवाने का काम भी किया.

राजीव गौबा का परिचय

  • 1982 बैच के झारखंड कैडर के आईएएस अधिकारी
  • कैबिनेट सचिव, भारत 2019–2024
  • केंद्रीय गृह सचिव 2017 – 2019
  • मुख्य सचिव, झारखंड 2015-2017

बिहार के पटना साइंस कॉलेज के रहे हैं छात्र


राजीव गौबा ने पटना के साइंस कॉलेज से फीजिक्स में बीएससी की पढ़ाई की है, उन्हें गोल्ड मेडल प्राप्त था. उनकी स्कूली शिक्षा भी पटना में ही हुई है. उन्होंने पटना के गर्दनी बाग के सरकारी स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की है.वे अपने स्कूली के टाॅपर रहे थे. उनका जन्म 15 अगस्त 1959 को पंजाब में हुआ है. उनके पिता पटना में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे, माता गृहिणी थीं. राजीव गौबा की पत्नी पम्मी गौबा जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग की डीन और विभागाध्यक्ष हैं.

नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में क्या करेंगे काम?

कैबिनेट सचिव के पद से रिटायर होने के बाद राजीव गौबा नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य बने हैं. नीति आयोग के सदस्य के रूप में इन्हें देश के लिए नीति निर्माण के कार्य में अहम भूमिका निभानी होगी. उन्हें सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन और आर्थिक विकास के लिए नीतियों के निर्माण में भी अपनी भूमिका निभानी होगी. साथ ही केंद्र और राज्यों के बीच कॉर्डिनेशन का काम भी करना होगा. कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक जैसे मुद्दों पर सरकार को सलाह भी देनी होगी.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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