Mughal Harem Stories : मुगलों की कहानी हम जितना पढ़ेंगे, इसके प्रति हमारी रुचि बढ़ती ही जाएगी. मुगलों की शान हुआ करता था हरम. इसके बजट का आधिकारिक आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन मुगल बादशाह हरम पर लाखों खर्च करते थे. रानियों को मासिक खर्च मिलता था. नूरजहां जैसी रानियों का खर्च तो करोड़ों में था. हरम में मुगलों की शानो-शौकत थी, प्रतिष्ठा थी, उनका गुरुर था, उनकी राजनीति और उनका षडयंत्र भी था. लेकिन धीरे-धीरे हरम की प्रतिष्ठा धूमिल हो गई. शानो-शौकत खत्म हो गई और एक ऐसा भी दौर आया, जब हरम की औरतों को नंगा कर पीटा गया और कई औरतें भूख से मर गईं.
अकबर के समय गुलजार रहने वाला हरम कब बना सुनसान?
बाबर और हुमायूं के बाद हरम की शान को अगर किसी ने सबसे ज्यादा बढ़ाया, तो वह था मुगल शासक अकबर. अकबर के शासनकाल में हरम में हिंदू औरतों का भी दबदबा था. जहांगीर के समय भी हरम और उसकी शानो-शौकत की खूब चर्चा रही. बादशाह रानियों को महंगे तोहफे देते थे और रानियां भी तहजीब वाली थीं. उन्होंने हमेशा अपने वंश का मान रखा. लेकिन धीरे-धीरे मुगल हरम की स्थिति बिगड़ने लगी. शाहजहां के समय हरम में बहुत अनाचार हुए, हालांकि औरंगजेब ने उस तरह की अव्यवस्था नहीं होने दी. औरंगजेब के बाद तो खैर मुगल साम्राज्य की ही स्थिति खराब हो गई, तो उनके हरम के बारे में क्या कहा जाए! मुगलों का राजस्व कम होने के बाद भी औरंगजेब के उत्तराधिकारियों ने फिजूलखर्ची और अय्याशी बंद नहीं की, परिणाम यह हुआ कि धीरे-धीरे हरम खाली और सुनसान हो गया.
क्या औरंगजेब के उत्तराधिकारी बहुत ही कमजोर शासक थे?
औरंगजेब की मृत्यु 1707 में हुई थी. उसके बाद के शासक बहादुर शाह प्रथम, जहांदार शाह, फर्रुखसियर, मुहम्मद शाह रंगीला भोग-विलास, शराब, नाचने वाली लड़कियों और मनोरंजन में डूबे रहे. परिणाम यह हुआ कि हरम राजनीतिक साजिशों, भ्रष्टाचार, आर्थिक पतन और भोग-विलास का अड्डा बन गया. यह पूरी प्रक्रिया अचानक नहीं हुई बल्कि 150 वर्ष से अधिक का समय लगा और 1850 के आसपास तो हरम का पूरा पतन हो गया. इतिहासकार किशोरी शरण लाल अपनी किताब The Mughal Harem में लिखते हैं कि हरम मुगलों की कुलीन महिलाओं के बजाय दरबारी नर्तकियों, रखैलों और हिजड़ों के कब्जे में चला गया और उन्होंने वहां का माहौल बुरी तरह बिगाड़ दिया. केंद्र में सत्ता कमजोर थी, जिसकी वजह से इन लोगों ने राजकोष पर भी कब्जा कर लिया.
लाल कुंवर ने नूरजहां की नकल करते हुए कैसे नकारे लोगों को सत्ता का हिस्सा बनवाया?

लाल कुंवर औरंगजेब के पोते जहांदार शाह की प्रिय पत्नी थी. हालांकि लाल कुंवर एक तवायफ थी और अपने नृत्य से बादशाहों का मनोरंजन करती थी. एक बार उसने राजमहल में अपना नृत्य पेश किया बस जहांदार शाह उसपर लट्टू हो गया और उसने लाल कुंवर के आगे एक तरह से आत्मसमर्पण कर दिया. उसने लाल कुंवर से निकाह किया और लाल कुंवर ने इसका फायदा उठाते हुए पूरी सत्ता पर कब्जा कर लिया. उसने अपने नकारे लोगों को मुगल प्रशासन में जगह दिलवाई और राजकोष को खाली करवा दिया. परिणाम यह हुआ कि मुगलों का आर्थिक पतन शुरू हुआ और सेना कमजोर हो गई. कर संग्रह बंद होने से राजकोष खाली होने लगा, खर्चे जारी थे. बगावत शुरू हो गई और इस स्थिति में मुगलों पर दो आक्रमण हुए, जिसने हरम को बर्बाद कर दिया.
नादिरशाह और अहमद शाह अब्दाली ने मुगलों को खूब लूटा
फारस के नादिर शाह ने दिल्ली में खूब लूट मचाई, कोहिनूर और तख्त एक ताऊस को लूट कर ले गया, जिसे शाहजहां ने बनवाया था. अहमद शाह अब्दाली ने दिल्ली में ना सिर्फ लूट मचाई बल्कि औरतों को अपमानित किया. उन्हें भूखों मरने पर मजबूर किया. किशोरी शरण लाल लिखते हैं, अब्दाली के हमलों से हरम की सुरक्षा टूट गई. मुगल महिलाएं भूखी मरने लगीं. कइयों ने सम्मान बचाने के लिए कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली. जो बच गईं उनमें से कुछ को नंगा कर सड़क पर पीटा गया. उन्हें गुलाम बनाकर या रखैल बनाकर मध्य एशिया भेजा गया. बदलते राजनीतिक हालात में राजकुमारियों, पत्नियों, रखैलों, नाचने-गाने वाली लड़कियों, औरतों और हिजड़ों की फौज को कब तक हरम में भूखा और नंगा रखा जा सकता था? उनमें से ज़्यादातर को जल्द ही अपने ही साधनों पर निर्भर रहना पड़ा. कई रईसों ने जिनमें सैय्यद अब्दुल्ला खान भी शामिल था उसे औरतें बहुत पसंद थीं, उसने कई को अपने मनोरंजन के लिए रखा. अब्दाली के आक्रमण की वजह से हरम की रसोई बंद हो गई और कई रानियां और राजकुमारियां भूख से भी मर गईं.
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