Mughal Harem Stories : बेहतरीन भुने मांस, शराब और नौकाविहार के साथ बादशाह मनाते थे जन्मदिन का उत्सव

मुगल हरम में जन्मदिन की दावत
Mughal Harem Stories : आलीशान सुंदर महल और बगीचों में भुने हुए बेहतरीन मांस, मादक पेय, संगीत– नृत्य और उसके साथ नौका विहार का खास इंतजाम. यह खासियत थी मुगल साम्राज्य में आयोजित जन्मदिवस के दावतों की. इन दावतों में पुरुषों के साथ–साथ महिलाएं भी पूरे उल्लास के साथ शामिल होती थीं.
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Mughal Harem Stories : दुनिया में जब भी अमीर साम्राज्यों और उनकी शानो–शौकत की चर्चा होती है, तो मुगलों का नाम उस फेहरिस्त यानी लिस्ट में सबसे ऊपर होता है. शानदार महल और मयूर सिंहासन, कीमती आभूषण, हीरे मोती से सजे कपड़े और सुंगधित इत्र से सजी रानियां. मुगलों की शान का इससे भली–भांति अंदाजा हो जाता है. एक और अवसर है, जो मुगलों की शान के बारे में बताता है और वह है बादशाहों और शहजादों का जन्मदिन.
मुगल कैसे मनाते थे अपना जन्मदिन
मुगल दरबार में बादशाह और शहजादों का जन्मदिन बहुत खास होता था. इस अवसर पर वजन तौल समारोह आयोजित किया जाता था. अबुल फजल लिखते हैं कि यह एक हिंदू प्रथा थी जिसकी शुरुआत अकबर ने की थी और यह दरबार सह हरम में आयोजित होता था. जहांगीर ने भी कई अवसरों पर अपने संस्मरण में इस बात का उल्लेख किया है. इतिहासकार किशोरी शरण लाल ने अपनी किताब The Mughal Harem में लिखा है कि बादशाह का वजन सौर और चंद्र जन्मदिन पर दो बार किया जाता था, जबकि राजकुमारों, उनके पुत्रों और पौत्रों का वजन प्रत्येक सौर वर्ष में एक बार किया जाता था.
इस समारोह का हरम के लिए विशेष महत्व था जैसा कि ‘जहांगीर के संस्मरण और लाहौरी के पादशाहनामा’ पुष्टि करते हैं. बादशाह और शाहजादों का वजन जिस वस्तु से होता था, वह सामग्री हरम से या शासक सम्राट की मां द्वारा भेजी जाती थी. कभी-कभी यह समारोह स्वयं राजमाता के भवन में आयोजित किया जाता था. वजन तौल समारोह के दौरान हरम में वह डोरी भी सुरक्षित रखी गई जाती थी, जिससे बादशाह की लंबाई मापी जाती थी, हर साल उस पर एक गांठ बांधी जाती थी, इसीलिए उसे सालगिरा या ‘साल की गांठ” कहा जाता था.
बादशाह को सोने–जवाहारात से तौला जाता था
अंग्रेज लेखक एडवर्ड टेरी लिखते हैं कि ‘जहांगीर का हर साल वजन लिया जाता था और उसके हकीम उसका हिसाब रखते थे, जिससे उसकी शारीरिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सके.’ यह परंपरा अकबर के समय से शुरू हुई और औरंगजेब के समय तक यह प्रथा कायम रही. सर थॉमस राॅ ने लिखा है कि बादशाह के वजन समारोह में मैं गया था. मुझे एक सुंदर बगीचे में ले जाया गया. तराजू तैयार किया गया, भारी तह वाली मुहरें, छोटे-छोटे पत्थरों से जड़े किनारे. सोने की बड़ी और भारी-भरकम जंजीरें. यहां कुलीन लोग उपस्थित थे, सभी कालीनों पर बैठे थे और महिलाएं पर्दों के पीछे से देख रही थीं.
राजा… हीरे, माणिक, मोती और अन्य कीमती चीजों से लदे हुए, या यूं कहें कि बड़े, शानदार वस्त्र पहने हुए दिखाई दिए. बादशाह को सोने और जवाहरात से तौला गया. फिर सोने के कपड़े, रेशम, कपड़े, लिनन, मसालों से… अंत में, आटे, मक्खन, अनाज… और बाकी सभी चीजों से तौला गया.
देर रात तक होती थी दावत, परोसी जाती थी शराब
बादशाह और शहजादों के जन्मदिन की दावत बहुत खास होती थी. इसमें ना सिर्फ एक से व्यंजन बनते थे, बल्कि नाच–गाना और नौका विहार का भी आयोजन होता था. सर थॉमस राॅ ने लिखा है कि बादशाह अपने जन्मदिन के मौके पर रात में वह अपने सभी कुलीन लोगों के साथ शानदार थालों में शराब पीता था. महिलाएं भी बड़े उत्साह के साथ इस उत्सव का जश्न मनाती थी.
इस मौके पर गार्डन पार्टी होती थी. अकबर अपनी महिलाओं के साथ नौका विहार करने जाते थे और जहांगीर, विशेष रूप से महिलाओं के साथ सैर और पिकनिक में कई दिन और रात बिताता था. एक अवसर पर वह महिलाओं और बच्चों के साथ दिल्ली में हुमायूं के मकबरे पर गया. दूसरी बार, उसने अधिकांश रात गुजरात जाते समय झील के किनारे महिलाओं के साथ बिताई.
भुने मांस, महिलाएं और शराब होती थी दावत की खासियत
मुगल अकसर ऐसी दावतों का आयोजन करते थे. हर पार्टी में उल्लास होता था, संगीत होता था और उपहार. जहांगीर ने अपने एक संस्मरण में लिखा है–‘ मैंने नूरजहां बेगम के महल (मालवा में) के एक घर में, जो बड़े तालाबों के बीच स्थित था, एक बैठक की और बेगम द्वारा तैयार की गई दावत में अमीरों और दरबारियों को आमंत्रित किया. वहां सभी प्रकार के नशीले पेय थे और सभी प्रकार के भुने हुए मांस. मैंनेमहिलाओं को बुलाया और रात का एक पहर (बाकी) रहने तक इस रमणीय स्थान पर समय बिताया, और आनंद लिया.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
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रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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