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जम्मू-कश्मीर में पहली बार अलगाववादियों के प्रभाव से मुक्त होंगे विधानसभा चुनाव, ये है बीजेपी की रणनीति

Updated at : 12 Sep 2024 6:27 PM (IST)
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Jammu Kashmir Election 2024

Jammu Kashmir Election 2024 : जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव तीन चरणों में होने वाले हैं और 8 अक्टूबर को मतगणना होगी. इस चुनाव पर पूरे देश की नजर है चूंकि यह चुनाव आर्टिकल 370 हटाए जाने और परिसीमन के बाद हो रहा है. इस चुनाव में लद्दाख के लोग भाग नहीं लेंगे. पहले लद्दाख को मिलाकर 87 सीटें थी अब उसे हटाकर 90 सीटों पर मतदान होगा. इस चुनाव को जीतने के लिए बीजेपी ने क्या रणनीति बनाई है और इस चुनाव में क्या होगा खास?

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Jammu Kashmir Election 2024 : जम्मू-कश्मीर का विधानसभा चुनाव इस बार बहुत खास होने जा रहा है, यही वजह है कि पूरा देश इस चुनाव के बारे में जानने को उत्सुक है. पार्टियों की रणनीति क्या है, कौन से मुद्दे इस चुनाव में हावी रहेंगे हो रहे हैं, पिछले चुनाव से यह चुनाव अलग कैसे है, इत्यादि. 12 सितंबर को नामांकन का अंतिम दिन था, यहां तीन चरणों में मतदान होना है. चुनावी मैदान में मुख्य रूप से तीन पार्टियां आमने-सामने हैं, बीजेपी, पीडीपी, नेशनल काॅन्फ्रेंस और कांग्रेस का गठबंधन. बीजेपी और पीडीपी अपने-अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरी हैं, जबकि नेशनल काॅफ्रेंस और कांग्रेस ने गठबंधन किया है. 

आर्टिकल 370 का मुद्दा पूरे जम्मू-कश्मीर चुनाव पर छाया रहने वाला है. एक ओर तो बीजेपी आर्टिकल 370 के मुद्दे को लेकर अपने वोटर्स के पास जाने वाली है, वहीं पीडीपी और नेशनल काॅन्फ्रेंस 370 को बहाल करने का वादा अपने वोटर्स से कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में आर्टिकल 370 को बहाल करने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 30 सितंबर तक चुनाव कराने को कहा था, उसी आदेश पर चुनाव कराए जा रहे हैं.

जम्मू-कश्मीर में कितनी सीट है?

परिसीमन के बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की 114 सीटें हैं, जिनमें से 24 सीटें पीओके के लिए हैं. फिलवक्त 90 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से 47 सीटें कश्मीर में और 43 सीटें जम्मू में हैं. परिसीमन से पहले जम्मू-कश्मीर में 111 सीटें थी, जिसमें से 46 सीट कश्मीर में, 37 सीट जम्मू में और चार सीट लद्दाख में थी, 24 सीटें पाक अधिकृत कश्मीर के लिए थी. 2024 में जो चुनाव हो रहा है उसमें लद्दाख की चार सीटें शामिल नहीं हैं, क्योंकि 2019 में जब जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया गया, तो जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग कर दिया गया था और इसे अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था. अगर लद्दाख की चार सीटों को हटा दिया जाए तो परिसीमन के पहले की स्थिति में जम्मू-कश्मीर में सिर्फ 107 सीटें रहतीं, लेकिन परिसीमन की वजह से यह 114 है. परिसीमन के जरिए जम्मू में छह सीटों को बढ़ाया गया और यह 37 से 43 हो गया, जबकि कश्मीर में इसे 46 से 47 किया गया.

जम्मू-कश्मीर चुनाव में बीजेपी की क्या होगी रणनीति?

जम्मू-कश्मीर के चुनाव में बीजेपी का फोकस जम्मू पर है, क्योंकि यहां विधानसभा की 43 सीटें हैं. बहुमत के लिए सरकार को 46 सीटों की जरूरत होगी. कश्मीर में बीजेपी का एक भी उम्मीदवार आज तक चुनाव नहीं जीता है, इस बात को बीजेपी भी जानती है कि वह कश्मीर में बहुत अच्छी स्थिति में नहीं है, यही वजह है कि बीजेपी ने महज 19 उम्मीदवार यहां से उतारे हैं. 28 सीटों पर बीजेपी ने अपना कोई उम्मीदवार नहीं दिया है. 

राजनीतिक विश्लेषक उमेश चतुर्वेदी ने कहा कि इस बार के चुनाव में बीजेपी ने जम्मू में क्लीन स्वीप करने का सोचा है इसलिए उसने यहां के 43 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं. बीजेपी जम्मू के इलाके में यह बता रही है कि आर्टिकल 370 हटाने के बाद प्रदेश में क्या बदला है और इससे हिंदू आबादी को कितना लाभ मिला है. साथ ही बीजेपी यह भी बता रही है कि किस तरह आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद अलगाववादी और आतंकियों पर लगाम कसी गई है. स्कूल खुले हैं चुनाव प्रचार हो रहे हैं, स्वतंत्र माहौल में चुनाव हो रहे हैं. 

घाटी में बीजेपी मजबूत नहीं है और उसे बहुत काम करने की जरूरत है, यही वजह है कि इन इलाकों में बीजेपी निर्दलीय उम्मीदवारों के पक्ष में खड़ी और और उसकी कोशिश यह है कि वो निर्दलीयों को साथ लेकर आए और अपनी सरकार बनाए. आजादी के बाद से अबतक जम्मू-कश्मीर में जिस तरह के हालात रहे हैं, वहां के लोग पूरी तरह मुख्यधारा में नहीं आ सके हैं और ना देश की हर चीज को समझ सकें, वे अब इन चीजों को देख और समझ रहे हैं, संभव है कि चुनाव के बाद बीजेपी को इसका फायदा मिले और वह सरकार गठन के कुछ नए फाॅर्मूले लेकर आए. 

बीजेपी को खलनायक बनाना चाहती है पीडीपी और नेशनल काॅन्फ्रेंस

राजनीतिक विश्लेषक अवधेश कुमार ने कहा कि बीजेपी इस चुनाव में खुद को नायक बनाना चाहती है जबकि उसकी विरोधी पार्टियां उसे खलनायक बनाने में जुटी हैं. बीजेपी जिस रणनीति के साथ इस चुनावी मैदान में उतरी है, वह साफ है. बीजेपी ने जम्मू पर फोकस किया है और यह बता रही है कि वह किस तरह प्रदेश में अमन और शांति लेकर आई है. विकास के कितने कार्य हुए हैं. बीजेपी वोटर्स को यह समझा रही है कि आप विकास से महरूम थे, उन्होंने विकास योजनाओं की जानकारी दी. सवा लाख करोड़ रुपए निवेश की बात बताई है. बीजेपी ने यहां एससी और एसटी को आरक्षण दिया है. 

अवधेश कुमार बताते हैं कि कश्मीर घाटी में बीजेपी कमजोर है, इसलिए वह कोशिश में है कि निर्दलीयों को सपोर्ट करके पीडीपी और नेशनल काॅन्फ्रेंस गठबंधन को हराए, ताकि उनकी सरकार प्रदेश में बन जाए. जिस प्रकार होम टूरिस्ट जम्मू-कश्मीर में बढ़े हैं और पार्टियां चुनाव प्रचार शांति से कर पा रही है, बीजेपी उसका भी श्रेय ले रही है. 

पीडीपी और नेशनल काॅन्फ्रेंस जिसका कांग्रेस के साथ गठबंधन है इन पार्टियों ने अपने घोषणापत्र में यह साफ किया है कि वे सरकार बनने पर आर्टिकल 370 को बहाल करेगी. साथ ही उन्होंने उन तमाम बातों का जिक्र घोषणा पत्र में कर चुके हैं, जो प्रदेश के विशेषाधिकार से जुड़े हैं.

2024 में जम्मू-कश्मीर चुनाव की खासियत

  • पहला चुनाव है जब जम्मू-कश्मीर में एक आम राज्य की तरह चुनाव होंगे, यानी कोई विशेषाधिकार नहीं होगा.
  • चुनाव में पहली बार जम्मू-कश्मीर में रहने वाले सभी 18 साल के युवा मतदान का प्रयोग करेंगे
  • हुर्रियत काॅन्फ्रेंस और अलगाववादी नेताओं के प्रभाव से मुक्त चुनाव
  • पाकिस्तान का झंडा नहीं लहराएगा
  • पहला चुनाव जिसमें वोट बहिष्कार की घोषणा नहीं हुई
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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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