History of Munda Tribes 10 : नागवंशी राजा फणिमुकुट राय को कब मिली थी शासन की बागडोर?

नागवंशी राजा, एआई द्वारा बनाई गई तस्वीर
History of Munda Tribes : मुंडा जनजाति के इतिहास को पढ़ते हुए हमें एक आदर्श स्थिति देखने को मिलती है, जिसमें एक मुंडा राज्य नागवंशियों के पास चला गया और नागवंशियों के शासन को कमोबेश मुंडा समाज ने स्वीकार भी किया. कुछ लोगों के मन में इस निर्णय से असंतोष भी हुआ हो, तो ऐसे कोई प्रमाण नहीं मिलते हैं कि मुंडा समाज ने नागवंशी राजा को अस्वीकार किया हो.1789 में नागवंशी राजा दर्पनाथ शाह ने भारत के गवर्नर जनरल को नागवंशियों की वंशावली या कुर्सीनामा सौंपा था. इस कुर्सीनामे में यह बताया गया है कि फणिमुकुट राय नागवंशियों के पहले राजा थे.
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History of Munda Tribes : नागवंशियों की परंपरा के अनुसार मुंडा राजा मदरा मुंडा के उत्तराधिकारी फणिमुकुट राय, नागवंशियों के पहले राजा हुए. उन्होंने मुंडा समाज की शासन व्यवस्था के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं और उन्हें उसी तरह चलने दिया. कुछ बदलाव उन्होंने नामों में किया. नागवंशी राजाओं ने अन्य जातियों के लोगों को छोटानापुर में बसाने का काम किया, जिसमें कायस्थ जाति को दीवान बनाकर छोटानागपुर में बसाने का उल्लेख इतिहासकार वीरोत्तम करते हैं. फणिमुकुट राय का विवाह पंचेत के गोवंशी राजपूत घराने की राजकुमारी से हुआ था.
कब हुआ था फणिमुकुट का राज्याभिषेक
नागवंशी परंपरा की मानें तो छोटानागपुर में नागवंशियों का शासनकाल पहली शताब्दी से ही शुरू हो जाता है. लेकिन इतिहासकर बालमुकुंद वीरोत्तम ने अपनी किताब झारखंड : इतिहास एवं संस्कृति में लिखा है कि नागवंशियों का यह दावा सही नहीं जान पड़ता है. वे लिखते हैं कि नागवंशियों के कुर्सीनामे में कुछ राजाओं का शासनकाल असाधारण रूप से बड़ा बताया जाता है. जिसमें यह कहा जाता है कि फणिमुकुट राय ने 94, मुकुट ने 55, उदय ने 60, मोहन ने 58 और रघुनाथ ने 60 तक की आयु में औसतन 29 साल तक शासन किया. बालमुकुंद वीरोत्तम लिखते हैं कि कुशान और गुप्तकालीन ऐतिहासिक स्रोतों में इस राजवंश का जिक्र नहीं मिलता है. रांची जिला के गजेटियर ने इन राजाओं के शासनकाल को औसतन 25 साल का मानते हुए यह माना है कि नागवंशियों के शासनकाल की शुरुआत चौथी शताब्दी में हुई होगी. लेकिन इस तिथि को भी वीरोत्तम ने खारिज करते हुए लिखा है लिखा है कि समुद्रगुप्त ने प्रयाग प्रशस्ति में इस इलाके का जिक्र मुरुंड के रूप में किया है. अगर उस काल में नागवंशी यहां होते तो समुद्रगुप्त के प्रयाग प्रशस्ति में उनका जिक्र होता.बालमुकुंद जे रीड के सर्वे और गजेटियर का जिक्र करते हुए कहते हैं कि नागवंशी राज्य की स्थापना 10वीं शताब्दी में हुई होगी.
प्रताप उदयनाथ शाही देव थे नागवंशियों के 61वें महाराजा
शरतचंद्र राय ने अपनी किताब The Mundas and Their Country में लिखा है कि वर्तमान राजा प्रताप उदयनाथ शाही देव नागवंशियों के 61वें महाराजा थे, इस हिसाब से प्रत्येक राजाओं के शासनकाल को औसतन 23 वर्ष का मानने से कुल अवधि 1525 वर्ष की होती है, जो 384 ईसवी के आसपास की बताई जाती है. इस लिहाज से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि नागवंशियों का शासनकाल चौथी शताब्दी से शुरू हुआ माना जा सकता है.
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नागवंशी कौन थे?

नागवंशी परंपरा के अनुसार पुंडरीक नाग और वाराणसी की ब्राह्मण कन्या पार्वती के पुत्र थे फणिमुकुट राय, जिन्हें मुंडा राजा मदरा मुंडा ने अपना दत्तक पुत्र मानकर उसका लालन-पालन अपने पुत्र मुकुट के साथ किया था. चूंकि फणिमुकुट, मुकुट से ज्यादा मेधावी और प्रतिभाशाली था, इसलिए मदरा मुंडा ने अपने राज्य के प्रमुख लोगों से सलाह करके उसे राजा बना दिया. इस बात को समाज के लोग स्वीकार करते हैं और इस बात को आदर्श स्थिति मानते हैं कि एक राजा ने अपने समुदाय का हित देखते हुए दूसरे कुल के व्यक्ति को अपनी सत्ता सौंप दी. हालांकि इस बात से नाराजगी आम लोगों में थी, लेकिन अपनी प्रशासकीय व्यवस्था से बंधे लोगों ने इसका विरोध नहीं किया.हां, यह बात जरूर सामने आती है कि मुंडा समाज के लोगों का नागवंशी राजाओं ने भरपूर सम्मान किया और उनकी जो पड़हा शासन व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया और उन्होंने अपना ध्यान राज्य के कामकाज में लगाया. फणिमुकुट को मदरा मुंडा का उत्तराधिकारी स्वीकार करने के साथ ही छोटानागपुर में एक नए राजवंश की स्थापना हुई, जिसने पूरे राज्य को एकत्र किया और पड़हा से ऊपर राज्य को स्थापित किया. कर्नल डाल्टन नागवंशियों को कोल वंश का मानते हैं, लेकिन फादर एफए ग्रिगनार्ड उन्हें चेरो परिवार की एक शाखा बताते हैं.
मुंडा समाज के इतिहास और शासन प्रणाली पर पढ़ें प्रभात खबर की विशेष प्रस्तुति :-
History of Munda Tribes 2 : मगध से झारखंड की ओर साथ आए थे मुंडा और संताल
History of Munda Tribes 3 : छोटानागपुर में मुंडाओं ने 50–100 घरों के गांव बसाए और अखरा बनाया
History of Munda Tribes 4 : मुंडा समाज में कानून की दस्तक था ‘किलि’, जानें कैसे हुई थी शुरुआत
History of Munda Tribes 6 : मुंडा संस्कृति में क्या है पड़हा, कैसे चलती थी पड़हा की सरकार?
History of Munda Tribes 8 : मुंडा समाज में मौजूद हैं दो शाखाएं, लोककथाओं में मिलते हैं प्रमाण
FAQ : पहले नागवंशी राजा कौन थे?
फणिमुकुट राय को पहला नागवंशी राजा माना जाता है.
पुंडरीक नाग से किस राजवंश का इतिहास जुड़ा है?
नागवंशी राजवंश
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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