भारत पर 50% टैरिफ के बीच अलास्का में होगी ट्रंप-पुतिन की बैठक, विश्व में दिख सकता है नया समीकरण

Edited by Rajneesh Anand
Updated:
विज्ञापन

ट्रंप और पुतिन

Alaska : रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत पर अमेरिका के 50% टैरिफ के बीच ट्रंप और पुतिन की मुलाकात होने जा रही है. इस मुलाकात पर पूरे विश्व की नजर है, क्योंकि इस मुलाकात में होने वाले बातचीत और उसके निचोड़ का असर पूरे विश्व पर पड़ने वाला है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति पुतिन दोनों ही अपने हितों से समझौता करने वाले नहीं हैं, लेकिन यह भी तय है कि ट्रंप अगर अड़ियल रवैया रखेंगे तो विश्व का समीकरण बदल सकता है.

विज्ञापन

Alaska : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह घोषणा की है कि वह अगले सप्ताह अलास्का में रूस के राष्ट्रपति ब्लामिदिर पुतिन से मुलाकात करेंगे. यह मुलाकात कई मायनों में खास होने वाली हैं, क्योंकि एक ओर तो ट्रंप भारत सहित कई अन्य देशों में रूस से तेल खरीदने को लेकर टैरिफ लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रूस-यूक्रेन युद्ध का भी कोई स्थायी समाधान अबतक निकलता दिख नहीं रहा है और यह युद्ध लगातार जारी है. ट्रंप की घोषणा के बाद रूस ने भी इस बात पर मुहर लगा दी है कि पुतिन और ट्रंप की अलास्का में मुलाकात हो रही है.

ट्रंप और पुतिन के मुलाकात के मायने क्या हो सकते हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात वर्तमान वैश्विक स्थिति को देखते हुए बात ही खास है. ट्रंप इस बैठक के दौरान यह कोशिश करेंगे कि रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त हो जाए, लेकिन पुतिन उनकी बातों से कितना सहमत होंगे यह बता पाना संभव नहीं है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि पुतिन रूसी हितों के खिलाफ किसी भी बात पर ट्रंप से सहमत होंगे. यही वजह है कि विशेषज्ञ यह मान रहे हैं कि ट्रंप और पुतिन के बीच बातचीत युद्ध रोकने की दिशा में एक कदम हो सकती है, युद्ध का स्थायी समाधान नहीं. रूस के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने पहले ही यह कह दिया है कि अगर युद्ध समाप्ति पर कोई भी बातचीत होगी तो उसमें यूक्रेन का रहना अनिवार्य है, अन्यथा वह किसी भी समझौते को नहीं मानेगा. इस लिहाज से पुतिन और ट्रंप की बैठक बेनतीजा हो सकती है इसमें कोई दो राय नहीं है, क्योंकि अगर यूक्रेन पर कोई एकतरफा फैसला होता है,तो जेलेंस्की उसे मानने को तैयार नहीं होंगे.

क्या चीन और भारत ट्रंप के टैरिफ के लिए साथ आ सकते हैं

प्रधानमंत्री मोदी अगस्त के अंतिम सप्ताह में एससीओ समिट में भाग लेने के लिए चीन की यात्रा पर जा रहे हैं. जहां उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी. चूंकि अमेरिका ने भारत पर टैरिफ का अटैक कर दिया है और वह अपनी मनमानी दिखा रहा है, भारत चीन के साथ अपने ठंडे रिश्ते को नई जान देने की कोशिश करेगा, ताकि ट्रंप के अविवेकपूर्ण निर्णय का मुकाबला किया जा सके. अमेरिका ने चीन को भी टैरिफ की धमकी दी है, हालांकि चीन के आगे उसकी ज्यादा चलती नहीं है, इसलिए उसने चीन को मोहलत दे रखा है. अमेरिका का कहना है कि चीन के साथ उसका व्यापार घटा बहुत अधिक है. अमेरिका का आरोप है कि चीन सरकार अपने उद्योगों खासकर स्टील, एल्यूमिनियम, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक व्हीकल को भारी सब्सिडी देती है. इससे चीनी सामान वैश्विक बाजार में सस्ता हो जाता है, और अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होता है. इसी वजह से ट्रंप चीन पर भी टैरिफ लगाना चाहते हैं. इस लिहाज से भारत और चीन की परेशानी एक ही तरह की है, ऐसे में अगर दोनों देश साथ आते हैं तो अमेरिका को परेशानी हो सकती है क्योंकि दोनों ही देशों से अमेरिका बड़ी मात्रा में आयात करता है. चीनी राजदूत ने भी भारत पर 25% टैरिफ की तीखी निंदा की है.

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें

अमेरिका का चीन और भारत से आयात कितना है?

Wall Street Journal के अनुसार 2024 में अमेरिका ने चीन से लगभग 438.9 अरब डालर का आयात किया, जो उसके कुल आयात का लगभग 13.3% था. प्रमुख आयातित वस्तुओं में स्मार्टफोन, कंप्यूटर, खिलौने और वीडियो गेम कंसोल शामिल हैं, जिनकी हिस्सेदारी आयात का लगभग 55.5% है. वहीं भारत से 2024 में अमेरिका ने लगभग 91.23 अरब डालर मूल्य के सामान का आयात किया. जिसमें शामिल थे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण , फार्मास्यूटिकल्स , कीमती पत्थर एवं मशीनरी शामिल है.

टैरिफ के मुद्दे पर साथ-साथ हैं भारत और रूस

यूक्रेन में चल रहे युद्ध और भारत पर अमेरिकी टैरिफ के बाद विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को फोन पर बातचीत की. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापार, आर्थिक और निवेश सहयोग पर चर्चा की. अमेरिका ने भारत पर जो 25% टैरिफ लगाया है, उसे 50% करने के पीछे रूस से तेल खरीदना ही वजह है. भारत के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल मास्को गए हुए थे और उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर वहां चर्चा की है, उन्होंने ने ही यह बताया है कि पुतिन भारत की यात्रा करने वाले हैं, जिससे यह साफ है कि अमेरिकी टैरिफ का रूस ना सिर्फ विरोध कर रहा है, बल्कि वह इस मुद्दे पर भारत के साथ खड़ा है.

ये भी पढ़ें : उत्तराखंड में खीरगंगा नदी ने लाई तबाही, जानिए बादल फटने पर कितने मिमी होती है बारिश?

Dictators and his Women 1 : हिटलर अपनी सौतेली भांजी के लिए था जुनूनी, ईवा ब्राउन से मौत से एक दिन पहले की शादी

क्या भारत एक Dead Economy है या फिर तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था, जानिए ट्रंप के बयान में कितनी है सच्चाई

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola