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उत्तराखंड में खीरगंगा नदी ने लाई तबाही, जानिए बादल फटने पर कितने मिमी होती है बारिश?

Updated at : 07 Aug 2025 11:58 AM (IST)
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uttarkashi cloudburst

उत्तराखंड में खीरगंगा नदी का क्रोध

Uttarkashi Cloudburst : उत्तराखंड में खीरगंगा नदी का क्रोध इतना बढ़ा कि उत्तरकाशी जिले का एक गांव धराली पूरी तरह से बर्बाद हो गया. पानी ने यहां के घरों को पूरी तरह नेस्तानाबूद कर दिया. वजह है अचानक बादल का फटना. हिमालयी क्षेत्रों में बादल फटना एक बड़ी प्राकृतिक आपदा है. 2013 की प्राकृतिक आपदा को शायद ही कोई भूल पाया हो, उसके बाद से लगातार इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हुई है. इसके पीछे मानवीय भूल भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं.

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Uttarkashi Cloudburst : उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बादल फटने की घटना से अबतक 4 लोगों की मौत हुई है और आशंका जताई जा रही है कि 100 से अधिक लोग लापता हैं. बादल फटने की घटना ऊंचाई पर हुई जिससे खीरगंगा नदी में पानी का सैलाब आ गया और भयंकर तबाही हुई. बताया जा रहा है कि कई सड़क पानी में बह गए और कई गाड़ियां फंस गईं.राहत और बचाव कार्य जारी है और अबतक 120 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है.

क्या है बादल फटने की घटना?

बादल फटना उस प्राकृतिक घटना को कहते हैं, जिसमें अचानक किसी खास जगह पर बहुत अधिक मात्रा में वर्षा होती है. वर्षा इतनी अधिक होती है कि उसके प्रभाव से भारी बाढ़ और भूस्खलन की घटना होती है. इसके प्रभाव से जान और माल की भारी हानि होती है. जब किसी क्षेत्र में गर्मी और नमी बहुत अधिक हो जाती है, तब वहां अस्थिर वायुमंडलीय परिस्थितियां बनती हैं, जो बादल फटने की वजह बनता है.

कैसे फटता है बादल?

बादल फटने की घटना में एक ही जगह पर एक घंटे में 100 मिमी से अधिक बारिश हो जाती है. यह प्राकृतिक क्रिया तब होती है जब पृथ्वी की सतह से गर्म हवा उठकर ऊपर की ओर जाती है. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हवा जब ऊपर जाती है, तो अपने साथ नमी भी लेकर जाती. ऊंचाई पर यह भाप ठंडी होकर संघनित होने लगती है यानी वे एक साथ जुड़ जाते हैं और जलकण में तब्दील हो जाते हैं. कई बार ये भाप बर्फ के कणों में भी बदल जाते हैं. उसके बाद शुरू होती है बादल बनने की प्रक्रिया. संघनित होने के बाद ये जलकण बादल में तब्दील हो जाते हैं और बड़े बादल का रूप ले लेते हैं. जब हवा की गति अधिक होती है और नमी बहुत ज्यादा होती है, तो जलकण बादल के अंदर ही एकत्रित होते रहते है, नीचे नहीं गिरते हैं, लेकिन एक समय ऐसा आता है जब बादल नमी को और बर्दाश्त नहीं कर पाता है, जिसकी वजह से अचानक पानी बादल से गिरने लगता है और पानी की बौछार गिरने लगती है और इस क्रिया को बादल फटना कहते हैं.

बादल फटने की घटना किन इलाकों में ज्यादा होती है

बादल फटने की घटना पर्वतीय इलाकों में ज्यादा होती है, इसकी वजह यह है कि पहाड़ों से टकराकर हवा ऊपर उठती है, जिससे भारी मात्रा में संघनन होता है. प्रसिद्ध भूवैज्ञानिक और पर्यावरणविद्‌ नीतीश प्रियदर्शी बताते हैं कि पहाड़ी इलाकों में बादल फटने की घटना ज्यादा इसलिए होती है कि पहाड़ों की वजह से बादल नीचे ही फंस जाते हैं और उनमें संघनन शुरू हो जाता है. चूंकि यहां नमी ज्यादा होती है, इसलिए बादल एक सीमा के बाद नमी को संभाल नहीं पाते हैं और बादलों से पानी गिरना शुरू हो जाता है, जिसे बादल फटना कहा जाता है. यही वजह है कि हिमालय के क्षेत्रों में बादल फटने की घटना ज्यादा होती है.

बादल फटने की घटना प्राकृतिक है या मानव निर्मित

बेशक बादल फटने की घटना प्राकृतिक है, लेकिन विगत कुछ वर्षों में इसमें जितनी तेजी आई है, वह मानवनिर्मित है. भूवैज्ञानिक नीतीश प्रियदर्शी बताते हैं कि धरती लगातार गर्म हो रही है, जिसकी वजह से वाष्पीकरण ज्यादा हो रहा है और बादल काफी नीचे ही बन रहे हैं. साथ ही पहाड़ों को काटकर मानव जो निर्माण कर रहा है, उसकी वजह से भी पहाड़ कमजोर हो रहे हैं और मिट्टी ढीली हो रही है. नदियां जब ऊपर से नीचे की ओर आती हैं, तो बारिश के मौसम में वे काफी गाद भी ला रही हैं. टूरिज्म को बढ़ावा देने के नाम कई तरह के निर्माण कार्य किए गए हैं, जिसने नदियों के बहाव को बाधित किया है. अब जबकि नदियों का बहाव बाधित है, तो नदियां क्रोधित हैं और उसके प्रकोप का असर सबको दिख रहा है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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