बिहार के यंग साइंटिस्ट श्रेयस ने थाईलैंड में लहराया तिरंगा, इनके नाम से स्पेस में घूम रहे Asteroids

औरंगाबाद के श्रेयस ने थाईलैंड में जीता गोल्ड मेडल
Success Story: औरंगाबाद के यंग साइंटिस्ट श्रेयस बी. चंद्रा ने बैंकॉक में इंटरनेशनल इनोवेशन प्रदर्शनी में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया. क्यूआर टेक्नोलॉजी बेस्ड उनके इनोवेशन को ग्लोबल लेवल पर वाहवाही मिली. साथ ही एनआरसीटी आउटस्टैंडिंग इंटरनेशनल इन्वेंशन एंड इनोवेशन प्राइज से सम्मानित किया गया.
Success Story: जब इरादे मजबूत हो और मेहनत को दिशा मिल जाए, तो कामयाबी इतिहास रच देती है. बिहार के औरंगाबाद जिले के होनहार यंग साइंटिस्ट श्रेयस बी. चंद्रा ने थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित इन्वेंशन, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी एक्सपोजिशन 2026 में गोल्ड मेडल जीतकर न सिर्फ जिले, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है. इस इंटनेशनल आयोजन में दुनिया के 20 से अधिक देशों के साइंटिस्ट ने भाग लिया था.
सालों बाद मिला भारत को यह गौरव
श्रेयस ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर क्यूआर टेक्नोलॉजी बेस्ड एक विशेष डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया, जिसे इंटरनेशनल एक्सपर्ट ने बेहद खास बताया. इस रिसर्च के लिए उनकी टीम को गोल्ड मेडल के साथ-साथ एनआरसीटी आउटस्टैंडिंग इंटरनेशनल इन्वेंशन एंड इनोवेशन प्राइज से भी सम्मानित किया गया. यह सम्मान वर्ल्ड लेवल पर सिर्फ 6 देशों को ही दिया जाता है और कई सालों बाद यह गौरव भारत को मिला है.
माता-पिता ने क्या कहा?
श्रेयस के पिता सूर्यकांत सिन्हा और माता निभा सिन्हा, दोनों शिक्षक हैं और शहर के सत्येंद्र नगर के निवासी हैं. बेटे की इस हिस्टोरिकल अचीवमेंट से परिवार में खुशी और गर्व का माहौल है. उन्होंने ने बताया कि श्रेयस को बचपन से ही रिसर्च और इनोवेशन में इंटरेस्ट रहा है. उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे टैलेंट्स को इंटरनेशनल मंच तक पहुंचने के लिए हर तरह से मदद दी जाए.
श्रेयस के नाम से अंतरिक्ष में घूम रहे हैं दो क्षुद्र ग्रह
श्रेयस इससे पहले भी कई बड़ी अचीवमेंट्स हासिल कर चुके हैं. अप्रैल 2022 में उसने वूमन सेफ्टी डिवाइस बनाया था. अक्टूबर 2022 में उसने दो क्षुद्र ग्रहों (Asteroid) की खोज की, जिन पर नासा ने भी ध्यान दिया. दोनों क्षुद्र ग्रह उसके नाम से अंतरिक्ष में घूम रहे हैं. मार्च 2023 में स्पेस किड्स इंडिया की राष्ट्रीय युवा वैज्ञानिक प्रतियोगिता में भी वे चुने गए थे.
अब श्रेयस अपने रिसर्च को पोलैंड और स्विट्जरलैंड के इंटरनेशनल मंचों पर पेश करने की तैयारी कर रहे हैं. औरंगाबाद के इस यंग साइंटिस्ट की सफलता न सिर्फ जिले के लिए गर्व की बात है, बल्कि देश के उभरते साइंटिस्टों के लिए एक बड़ी इंस्पीरेशन भी हैं.
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लेखक के बारे में
By Preeti Dayal
डिजिटल जर्नलिज्म में 3 साल का अनुभव. डिजिटल मीडिया से जुड़े टूल्स और टेकनिक को सीखने की लगन है. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं. बिहार की राजनीति और देश-दुनिया की घटनाओं में रुचि रखती हूं.
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