बिहार के 38 हजार एकड़ में होगा ड्रोन से कीटनाशक का छिड़काव, 24 घंटे पहले किसानों को मिलेगी सूचना

Published by : Ashish Jha Updated At : 16 Sep 2023 6:00 AM

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अधिकतम 10 एकड़ तक ड्रोन से छिड़काव पर सरकार की ओर से अनुदान राशि निर्धारित की गयी है. किसान कहीं से भी ऑनलाइन आवेदन अपने क्षेत्र के लिए कर सकते हैं. राज्य के सभी 38 जिलों के 38 हजार एकड़ में ड्रोन से कीटनाशक का छिड़काव का लक्ष्य तय किया गया है.

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मनोज कुमार, पटना. राज्यभर में ड्रोन से कीटनाशक का छिड़काव होगा. डीबीटी पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों को इसका लाभ मिलेगा. ड्रोन परिचालन के लिए सरकार की ओर से एजेंसी का चयन किया जायेगा. इसके लिए प्रति एकड़ 250 रुपये सरकार की ओर से अनुदान मिलेगा. अधिकतम 10 एकड़ तक ड्रोन से छिड़काव पर सरकार की ओर से अनुदान राशि निर्धारित की गयी है. किसान कहीं से भी ऑनलाइन आवेदन अपने क्षेत्र के लिए कर सकते हैं. राज्य के सभी 38 जिलों के 38 हजार एकड़ में ड्रोन से कीटनाशक का छिड़काव का लक्ष्य तय किया गया है.

सभी जिलों में एक-एक हजार एकड़ क्षेत्र में होगा कीटनाशक का छिड़काव

सभी जिलों में एक-एक हजार एकड़ क्षेत्र में कीटनाशक का छिड़काव होगा. ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव की सूचना संबंधित क्षेत्र के लोगों को 24 घंटे पूर्व देनी होगी. पंचायत सचिव, पंचायत समिति सदस्य और प्रखंड कृषि पदाधिकारी की ओर से लोगों को सूचना दी जायेगी. ड्रोन संचालित करने वाली एजेंसी को किसान कीटनाशक उपलब्ध करायेंगे. इस पर कुल 95 लाख रुपये खर्च किये जायेंगे. इसमें केंद्र सरकार की ओर से 57 लाख और राज्य सरकार की ओर से 38 लाख रुपये खर्च किया जायेगा.

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सत्यापित कीटनाशक का ही होगा छिड़काव

पौधा संरक्षण के रूप में ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव के कार्य का सत्यापन कृषि विभाग के कर्मियों की ओर से किया जायेगा. कृषि विभाग और कृषि वैज्ञानिक की ओर से अनुशंसित कीटनाशक का ही प्रयोग करना होगा. कृषि समन्वयक, पौधा संरक्षण कर्मचारी, प्रखंड तकनीकी व सहायक प्रबंधक सत्यापन करेंगे. किसानों की मांग के अनुसार कृषि विभाग के कर्मी की उपस्थिति में कीटनाशक का छिड़काव का घोल तैयार कर छिड़काव किया जायेगा. डीसीजीए की ओर से निबंधित ड्रोन से ही कीटनाशक छिड़काव होगा. डिजिटल स्काइ प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कराये बिना ड्रोन का परिचालन नहीं होगा.

ड्रोन से कीटनाशक के ये फायदें होंगे

कृषि विभाग की ओर कहा गया है कि कीट, खरपतवार, जीवाणु के कारण सालाना 35 फीसदी फसल की बर्बादी होती है. राज्य के किसान पारंपरिक तरीके से अभी कीटनाशक का छिड़काव करते हैं. किसानों की ओर से खुद से कीटनाशक का छिड़काव करने से इसके दुष्प्रभाव की जानकारी भी नहीं होती है. इससे पानी, श्रम और पूंजी की भी बर्बादी होती है. ड्रोन के उपयोग से कीटनाश्क का छिड़काव करने से किसानों के स्वास्थ्य पर खराब प्रभाव नहीं पड़ेगा. श्रम और पानी की भी बचत होगी.

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किसानों के लिए वरदान साबित होगी कृषि ड्रोन योजना

दूसरी ओर , नवादा जिले के कौआकोल प्रखंड के सोखोदेवरा जेपी आश्रम परिसर अवस्थित राजेंद्र भवन में शुक्रवार को नाबार्ड की ओर से वित्तपोषित परियोजना कृषि गतिविधियों में ड्रोन तकनीक उपयोग के तहत कृषि विज्ञान केंद्र सर्वोदय आश्रम सोखोदेवरा नवादा के सौजन्य से तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया है, जिसका उद्घाटन द्वीप प्रज्ज्वलित कर नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ सुनील कुमार, सहायक उप महाप्रबंधक विभोर कुमार, डीडीएम सुशांत रौशन, ग्राम निर्माण मण्डल सर्वोदय आश्रम सोखोदेवरा के प्रधानमंत्री अरविंद कुमार व कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ रंजन कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से किया है. इस कार्यक्रम में जिले के सात प्रखंडों से चयनित तीन दर्जन किसान भाग लिये हैं.

किसानों को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने में वरदान साबित होगी कृषि ड्रोन तकनीक

इस अवसर पर नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ सुनील कुमार ने कहा कि किसानों को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने में कृषि ड्रोन तकनीक वरदान साबित होगी. ड्रोन से किसान पोषक तत्वों एवं कीटनाश दवाओं के छिड़काव आदि कार्य आसानी से कर सकते हैं. इससे समय के साथ मेहनत भी कम लगेगी. अधिकारियों की ओर से किसान हित के लिए ड्रोन परियोजना के महत्व व उसके लाभ के बारे में विस्तार से बताया गया है. नाबार्ड के अधिकारियों ने नाबार्ड प्रायोजित ग्राम निर्माण मण्डल के बैनर तले टीडीएफ योजनांतर्गत झिलार गांव में चल रही परियोजना का भी मूल्यांकन व प्रक्षेत्र भ्रमण किया गया है, मौके पर केवीके के वैज्ञानिक रौशन कुमार, डॉ धनंजय कुमार, डॉ जयवंत कुमार सिंह, रविकांत चौबे, अंगद कुमार, अनुज्ञा भारती, शशांक शेखर सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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