सुप्रीम कोर्ट के अंदर: 'मनीष कश्यप कोई पत्रकार नहीं,आदतन कानून तोड़ता है' तमिलनाडु व बिहार सरकार की दलील जानें

Updated at : 23 Apr 2023 6:01 AM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट के अंदर: 'मनीष कश्यप कोई पत्रकार नहीं,आदतन कानून तोड़ता है' तमिलनाडु व बिहार सरकार की दलील जानें

Manish Kashyap News: तमिलनाडु प्रकरण में गिरफ्तार मनीष कश्यप ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. मनीष कश्यप के लिए तमिलनाडु और बिहार सरकार की तरफ से पक्ष रखने वाले दिग्गज वकीलों ने क्या कहा, जानिए कोर्ट रूम के अंदर की बातें..

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Manish Kashyap News: तमिलनाडु प्रकरण में गिरफ्तार बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की थी उसपर सुनवाई शुक्रवार को की गयी. इस दौरान बिहार व तमिलनाडु में दर्ज सभी एफआइआर को क्लब करने और एनएसए लगाए जाने के मामले को भी दोनों पक्षों की ओर से सुना गया. वहीं बिहार सरकार व तमिलनाडु सरकार की ओर से दलील पेश कर रहे वकीलों ने कोर्टरूम में क्या कहा, जानिए..

3 मई तक रिमांड पर मनीष कश्यप

तमिलनाडु में बिहार समेत उत्तर भारतीय मजदूरों के साथ हिंसा व दुर्व्यवहार मामले में फेक व भ्रामक वीडियो को प्रसारित करने के आरोप में मनीष कश्यप (Manish Kashyap)ऊपर शिकंजा कसा गया है. तमिलनाडु व बिहार में अलग-अलग केस दर्ज किए गए हैं. वहीं बिहार पुलिस की पूछताछ के बाद अब मनीष कश्यप को तमिलनाडु पुलिस अपने साथ लेकर गयी है. मदुरै कोर्ट ने 3 मई तक रिमांड पर मनीष कश्यप को भेजा है. इधर सुप्रीम कोर्ट में मनीष कश्यप ने याचिका दायर की है जिसपर शुक्रवार को सुनवाई हुई.

तमिलनाडु सरकार की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा

मनीष कश्यप पर लगे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून(रासुका) मामले (Manish Kashyap nsa)पर तमिलनाडु सरकार को नोटिस भेजा गया है और पूछा गया है कि इस मामले में एनएसए लगाने का आधार क्या है. सुप्रीम कोर्ट ने इसपर नाराजगी जाहिर की.जब एनएसए लगाए जाने की वजह तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कश्यप के 60 लाख फॉलोअर्स हैं और फर्जी वीडियो डालने से प्रवासी मजदूरों में डर फैल गया. यह कोई पत्रकार नहीं है और फर्जी वीडियो राजनीतिक मकसद से डाले गये. बता दें कि रासुका को चुनौती देने की छूट याचिकाकर्ता को दी गयी है.

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मनीष कश्यप की ओर से बोले वकील

मनीष कश्यप की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि याचिकाकर्ता बिहार का रहने वाला है और सभी एफआईआर को एक साथ जोड़कर वहीं सुनवाई होनी चाहिए. इसपर तमिलनाडु सरकार का पक्ष रख रहे वकील कपिल सिब्बल ने एफआईआर को एक साथ जोड़ने का विरोध करते हुए कहा कि एफआईआर विभिन्न धाराओं में दर्ज किया गया है.

बिहार सरकार की ओर से वकील की दलील

बिहार सरकार की ओर से पेश वकील मनीष कुमार ने भी सभी एफआईआर को एक साथ जोड़ने का विरोध करते हुए कहा कि कश्यप आदतन कानून तोड़ता रहा है और उसके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं. हालांकि खंडपीठ ने कहा कि सभी एफआईआर एक जैसे हैं और इसे एक साथ जोड़ा जा सकता है. मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी.

Published By: Thakur Shaktilochan

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