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बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की टीम झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व के पदाधिकारियों को सौंपेगी ध्वज,ये है संदेश

Updated at : 28 Sep 2021 2:06 PM (IST)
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बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की टीम झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व के पदाधिकारियों को सौंपेगी ध्वज,ये है संदेश

बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से वन विभाग के पदाधिकारियों का निकला जत्था महात्मा गांधी की जयंती पर दो अक्तूबर को झारखंड के वन विभाग के वरीय पदाधिकारियों को ध्वज को सौंपेगा.

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Azadi ka Amrit Mahotsav, पलामू न्यूज (संतोष कुमार) : आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित किये जा रहे अमृत महोत्सव को लेकर नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के निर्देश पर भारत-नेपाल के बॉर्डर स्थित बिहार के एकमात्र बाघ अभ्यारण्य वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वरीय वन पदाधिकारियों का जत्था बाघ बचाने के संदेश को लेकर निकाले गये ध्वज के साथ 518 किलोमीटर की दूरी तय करके झारखंड के एकमात्र बाघ अभ्यारण्य पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क पहुंचेगा. महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर दो अक्तूबर को झारखंड के वन विभाग के वरीय पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में उक्त ध्वज को सौंपेगा.

देश के सभी टाइगर रिजर्व को एक सूत्र में बांधने को लेकर प्रयास किया जा रहा है. पलामू टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष ने बताया कि 1973-74 में भारत में बनाये गये सभी नौ टाइगर रिजर्व में अमृत महोत्सव के अवसर इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. हालांकि वर्तमान समय में पूरे देश में 52 टाइगर रिजर्व हैं. 1973 में उत्तराखंड के कार्बेट, मध्य प्रदेश के कान्हा, असम का मानस, महाराष्ट्र के मेलघाट, राजस्थान के रणथंभौर,  उड़ीसा का सिमिलीपाल, कर्नाटक के बंदीपुर, पश्चिम बंगाल के सुंदरवन व झारखंड का पलामू टाइगर रिजर्व की स्थापना की गयी थी. इन सभी नौ टाइगर रिजर्व को देश के अन्य टाइगर रिजर्व के द्वारा ध्वज देकर सम्मानित किया जा रहा है.

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फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि पलामू टाइगर रिजर्व के लिए यह गौरव का पल होगा. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से वन विभाग के पदाधिकारियों का निकला जत्था एक अक्तूबर को पटना से रवाना होकर पलामू के छतरपुर पहुंचेगा, जहां गुलाबचंद प्रसाद अग्रवाल कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेगा. उसके ठीक अगले दिन बेतला में आयोजित भव्य कार्यक्रम में ध्वज सौंपेगा. उन्होंने बताया कि इसकी तैयारी शुरू कर दी गयी है. इस पल को ऐतिहासिक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा जाएगा. प्रत्येक वर्ष मनाये जाने वाले वन्य प्राणी सप्ताह का भी आगाज किया जाएगा.

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Posted By : Guru Swarup Mishra

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