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क्रिप्टो पर कसा शिकंजा

Cryptocurrency Scams: वर्ष 2024 में 22,812 करोड़ रुपये के क्रिप्टोकरेंसी घोटाले के साथ भारत दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर रहा. ऐसे में, क्रिप्टो बाजार में अवैध गतिविधियां रोकने के उद्देश्य से जारी किये गये नये दिशानिर्देश उम्मीद जगाते हैं.

Cryptocurrency Scams: देश में क्रिप्टोकरेंसी घोटालों के बढ़ते मामलों को देखते हुए वित्तीय खुफिया इकाई (एफआइयू) ने क्रिप्टो बाजार में अवैध गतिविधियां रोकने के उद्देश्य से जो नये दिशानिर्देश जारी किये हैं, वे उम्मीद जगाते हैं. अब देश में सक्रिय सभी क्रिप्टो एक्सचेंज को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर माना गया है. यानी इन पर भी वही सख्ती लागू होगी, जो बैंकों और वित्तीय कंपनियों पर होती है. यह कदम क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के लिए मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण विरोधी दिशानिर्देश का हिस्सा है. इनमें जो कदम उठाये गये हैं, उनमें आइसीओ और टोकन लॉन्च जैसी गतिविधियां रोकने के प्रावधान हैं, क्योंकि इन मामलों में धोखाधड़ी का खतरा ज्यादा होता है. ऐसे क्रिप्टो टूल्स का इस्तेमाल रोकने के भी निर्देश दिये गये हैं, जो लेनदेन छिपाने में मदद करते हैं.

इसी तरह नयी व्यवस्था में सिर्फ पैन कार्ड या दूसरे दस्तावेज अपलोड कर क्रिप्टो अकाउंट नहीं खुलेगा. इसमें यूजर अकाउंट बनाते समय अब सजीव सेल्फी देनी होगी, जिसमें पलक झपकाने या सिर हिलाने के लिए कहा जायेगा. इसमें ऐसे सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जायेगा, जो इसकी पुष्टि करेगा कि व्यक्ति खुद वहां मौजूद है. यह कदम फोटो या डीपफेक के जरिये होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है. अब क्रिप्टो एक्सचेंज यह भी रिकॉर्ड करेंगे कि यूजर किस जगह से अकाउंट बना रहा है. इसमें यूजर की लोकेशन, तारीख, समय और आइपी एड्रेस होगा. यानी यूजर की जियो टैगिंग होगी.

इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कोई गलत गतिविधि कहां से हो रही है. इसमें केवाइसी प्रक्रिया को सख्त कर दिया गया है, जिसमें क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए ग्राहक का पैन, लाइव डिटेक्शन सेल्फी और ऑनबोर्डिंग लोकेशन के साथ आइपी एड्रेस लेना अनिवार्य है. ऑनबोर्डिंग के समय यह सुनिश्चित करना होगा कि दी गयी जानकारी उसी व्यक्ति की है, जो एप का उपयोग कर रहा है और खाता बना रहा है. इसी तरह मोबाइल नंबर और ई-मेल का ओटीपी के जरिये सत्यापन जरूरी है, ताकि फर्जी अकाउंटों पर अंकुश लगाया जा सके.

क्रिप्टो एक्सचेंजों को ग्राहकों के पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड या वोटर आइडी जैसे अन्य पहचान दस्तावेज एकत्र करने के निर्देश भी दिये गये हैं. यही नहीं, उच्च जोखिम वाले ग्राहकों को हर छह महीने में केवाइसी कराना होगा. आंकड़ा बताता है कि 2024 में 22,812 करोड़ रुपये के क्रिप्टोकरेंसी घोटाले के साथ भारत दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर रहा और 2025 में ऐसे अपराध के मामले बढ़ने की ही आशंका है.

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