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यूपीआइ से रिकॉर्ड लेन-देन

Updated at : 04 Sep 2023 8:27 AM (IST)
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यूपीआइ से रिकॉर्ड लेन-देन

आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि जल्दी ही साधारण फीचर फोन से भी यूपीआइ की सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास किये जा रहे हैं.

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मोबाइल फोन से खरीदारी या पैसों के लेन-देन का चलन लगातार बढ़ रहा है. बड़ी से लेकर छोटी खरीदारी आज बिना पर्स, पैसे या कार्ड निकाले बस फोन से कोड स्कैन कर हो जाती है. मोबाइल फोन के जरिये पैसों के लेन-देन की यह सुविधा डिजिटल तकनीक से संभव हो सकी है. यूपीआइ यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस एक ऐसा सिस्टम है, जिसमें एक ही मोबाइल ऐप पर बहुत सारे बैंकों के खाते जुड़ जाते हैं और तत्काल लेन-देन हो जाता है.

अगस्त का महीना यूपीआइ के लिए ऐतिहासिक रहा. अगस्त में पहली बार किसी एक महीने में यूपीआइ से 10 अरब से ज्यादा लेन-देन हुए. फोन पे, गूगल पे, पेटीएम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है. जानकारों के अनुसार यूपीआइ से लेन-देन हर साल दोगुना गति से बढ़ रहा है. यूपीआइ की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी. भारतीय रिजर्व बैंक और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के द्वारा गठित संस्था नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया या एनसीपीआई द्वारा संचालित यूपीआइ से शुरू में 21 बैंक जुड़े थे.

आज देश के सरकारी और निजी बैंकों से लेकर तमाम क्षेत्रीय, ग्रामीण, सामुदायिक या अन्य बैंक यूपीआइ से जुड़ चुके हैं. भारत में यूपीआइ से लेन-देन की चर्चा सारी दुनिया में हो रही है. तीन साल पहले माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने यूपीआइ और आधार की प्रशंसा करते हुए कहा था कि इससे गरीबों तक पैसों के वितरण का खर्च बहुत घटा है. गेट्स ने सारी दुनिया को भारत से सीख लेने की सलाह दी थी. जी-20 की अध्यक्षता करते हुए भारत ने देश में एक डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए किये जा रहे प्रयासों को जोर-शोर से सामने रखा है.

इन तकनीकों को लेकर दूसरे देशों ने भी दिलचस्पी दिखायी है. सरकार ने बताया है कि बहुत सारे देशों के साथ इन्हें लेकर समझौते हुए हैं. फ्रांस, यूएइ, सिंगापुर और श्रीलंका जैसे देशों में भी यूपीआइ को जारी किया गया है तथा जापान ने भी इसमें रुचि दिखायी है. पिछले महीने बेंगलुरु में जी-20 की एक बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत आज ऐसे समाधान पेश कर रहा है, जिनका दुनिया में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

हालांकि, भारत में आबादी का एक बड़ा हिस्सा तकनीकी ज्ञान की कमी या स्मार्टफोन के अभाव या खराब नेटवर्क जैसे कारणों से यूपीआई की सुविधा का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा है. आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि जल्दी ही साधारण फीचर फोन से भी यूपीआइ की सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास किये जा रहे हैं. डिजिटल जगत से अधिकाधिक लोगों को जोड़ने के ऐसे प्रयास जारी रहने चाहिए.

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