Pakistan Bangladesh: बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के गठन के बाद से पाकिस्तान के साथ उसकी नजदीकी तो बढ़ ही रही है, दोनों देशों को निकट लाने में चीन की बड़ी भूमिका भी देखने वाली है, जो बांग्लादेश में चीन की बढ़ती पैठ के बारे में बताती है. विगत अगस्त में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने ढाका में मोहम्मद यूनुस और विदेश मामलों के सलाहकार से मुलाकात की थी. इस बीच दोनों देशों के बीच व्यापार शुरू हुआ है और दोनों ने सार्क को पुनर्गठित करने की भी मांग की है, जबकि पाकिस्तान की संदिग्ध भूमिका के कारण ही सार्क की प्रासंगिकता खत्म हुई. चीन की मध्यस्थता में न सिर्फ पाकिस्तान-बांग्लादेश की बैठक हुई, बल्कि पाक विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह चीन और बांग्लादेश के साथ त्रिपक्षीय सहयोग फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाना जारी रखेगा.
अलबत्ता पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच रक्षा संबंध जिस तरह बढ़ रहा है, वह भारत के लिए चिंताजनक है. पिछले साल दोनों देशों की थलसेना, वायुसेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की कई बैठकें हुई हैं, जिनमें प्रशिक्षण लेने, क्षमता बढ़ाने और पेशेवर आदान-प्रदान से जुड़े कई सहमति पत्रों पर दोनों देशों ने दस्तखत किये हैं. इसके अलावा बांग्लादेश के वायुसेना प्रमुख ने अपने हालिया इस्लामाबाद दौरे में पाकिस्तान से जेएफ-17 ब्लॉक-3 लड़ाकू विमान खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है.
पाकिस्तान और बांग्लादेश आपसी रक्षा समझौते पर न सिर्फ काम कर रहे हैं, बल्कि इसके लिए उन्होंने एक संयुक्त तंत्र बनाया है. यह समझौता पाकिस्तान-सऊदी अरब समझौते की तरह होगा, जिसमें एक देश पर होने वाले हमले को दूसरे देश पर भी हमला माना जाएगा. यही नहीं, आसिम मुनीर की तरह बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के चहेते बनना चाहते हैं. अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका देश गाजा में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल में शामिल होने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार है.
अमेरिकी अधिकारियों का भी कहना था कि वे इस मामले में बांग्लादेश के साथ मिल कर काम करने के इच्छुक हैं. हालांकि गाजा में पाक शांति सेना भेजने के मामले में विवाद है. जहां पाकिस्तान के अंदर सेना भेजे जाने का विरोध हुआ है, वहीं इस्राइल भी पाक सेना के स्थिरीकरण बल में शामिल होने को लेकर सहज नहीं है. लेकिन गाजा में सेना भेजने के प्रति बांग्लादेश की उत्सुकता से यह तो साफ है कि पाकिस्तान की तरह वह भी अमेरिकी समर्थन पाने का इच्छुक है.

