भारत की दो टूक

Updated:
विज्ञापन
भारत की दो टूक

भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि एक महत्वपूर्ण वैश्विक संस्था के रूप में विश्व व्यापार संगठन और धनी देशों ने अपेक्षित भूमिका नहीं निभायी.

विज्ञापन

कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य कारणों से दुनियाभर में कई वस्तुओं के दामों में भारी वृद्धि हुई है. इसका सबसे अधिक असर खाद्य पदार्थों पर पड़ा है तथा विकासशील व अविकसित देश व्यापक रूप से प्रभावित हुए हैं. इस संकट से उबरने में अग्रणी भूमिका निभाने की जगह धनी देश अन्य देशों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

भारत ने इस रवैये पर विश्व व्यापार संगठन, विशेष रूप से विकासित देशों को आड़े हाथों लिया है. संगठन के 12वें मंत्री-स्तरीय सम्मेलन में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को महामारी और खाद्य संकट से उबरने के लिए अल्प विकसित देशों की मदद करनी चाहिए. उन्होंने उचित ही रेखांकित किया है कि महामारी ने ‘एक विश्व, एक स्वास्थ्य’ के महत्व को फिर से स्थापित किया है.

भारत ने वैक्सीन और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति में बढ़-चढ़कर योगदान किया है. लेकिन एक महत्वपूर्ण वैश्विक संस्था के रूप में विश्व व्यापार संगठन और धनी देशों ने अपेक्षित भूमिका नहीं निभायी. अविकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को आपूर्ति शृंखला में अवरोध का भी सामना करना पड़ रहा है. आगामी महीनों में खाद्य संकट और मुद्रास्फीति का क्या स्वरूप होगा, इसका अनुमान लगाना कठिन है.

ऐसे में धनी देशों को महामारी के समय का व्यवहार नहीं करना चाहिए और वैश्विक स्तर पर स्थिति को बेहतर करने के लिए आगे आना चाहिए. गोयल ने तो यहां तक कह दिया कि महामारी के दौरान समय रहते समुचित पहल नहीं कर पाने के लिए हमें अपना सिर शर्म से झुका लेना चाहिए. खाद्य आपूर्ति के मामले में भी अगर ऐसा किया गया, तो करोड़ों लोगों का जीना मुहाल हो जायेगा.

बढ़ती कीमतों का बोझ गरीब समुदायों और गरीब देशों को अस्थिर बाजार का गुलाम बना देगा. जैसा कि वाणिज्य मंत्री ने कहा है, देशों को अपनी खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए भी ठोस इंतजाम करना है. हमारे देश में दो साल से अधिक समय से 80 करोड़ लोगों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना चल रही है, जो सितंबर तक जारी रहेगी. उसके बाद भी अनेक वर्गों के लिए ऐसी योजनाओं की आवश्यकता पड़ सकती है.

राशन कार्ड वाले लोगों के लिए सस्ती दरों पर खाद्य पदार्थ मुहैया कराने की योजनाएं पहले से ही हैं. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि हम खाद्यान्न का समुचित भंडारण करें. जलवायु परिवर्तन से खेती भी प्रभावित हो रही है. ऐसे में भंडारण के साथ-साथ पैदावार बढ़ाने के लिए उपाय करना भी जरूरी है.

धनी देश इन पहलुओं को अनदेखा कर भारत समेत विकासशील देशों पर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर अधिक अनुदान देने का आरोप लगाते रहे हैं. साथ ही, वे खाद्यान्न निर्यात के लिए भी दबाव बनाते हैं. गोयल ने साफ-साफ कहा है कि विकसित देश असल में अपने किसानों को अधिक अनुदान देते हैं. आशा है कि विकसित देश इन बातों का संज्ञान लेंगे.

विज्ञापन
संपादकीय

लेखक के बारे में

By संपादकीय

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola