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गरीबों को आवास

Updated at : 24 Oct 2022 8:12 AM (IST)
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गरीबों को आवास

हर परिवार का सपना होता है कि उसका अपना घर हो. गरीबों और मामूली आमदनी पाने वाले तबके के लिए इस सपने को साकार कर पाना असंभव सा होता है. इसे संभव बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में है. वर्ष 2015 में प्रारंभ हुई प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब तक 3.5 करोड़ गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा चुका है.

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हर परिवार का सपना होता है कि उसका अपना घर हो. गरीबों और मामूली आमदनी पाने वाले तबके के लिए इस सपने को साकार कर पाना असंभव सा होता है. इसे संभव बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में है. वर्ष 2015 में प्रारंभ हुई प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब तक 3.5 करोड़ गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह जानकारी धनतेरस के पवित्र अवसर पर मध्य प्रदेश के साढ़े चार लाख से अधिक लाभार्थियों को आवास प्रदान करते हुए दी. आवास के अलावा शौचालय, बिजली, पानी, रसोई गैस जैसी मूलभूत सुविधाओं एवं आवश्यकताओं को भी उपलब्ध कराने के लिए अनेक सरकारी प्रयास हो रहे हैं. इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव भी दिखने लगा है.

हाल में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि बीते डेढ़ दशकों में भारत में 41 करोड़ से अधिक लोगों को बहुआयामी गरीबी के अभिशाप से मुक्त कराया गया है. पेंशन, भत्ता, मजदूरी, सम्मान राशि आदि जैसी वित्तीय सहायता अब सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंच रही है. आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना दुनिया की सबसे बड़ी सार्वभौमिक बीमा योजना है, जिसका लाभ 50 करोड़ से अधिक गरीब उठा रहे हैं. कोरोना के शुरुआती दिनों से चल रही मुफ्त राशन योजना से 80 करोड़ वंचितों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी है.

इन सभी प्रयासों के साथ आवास योजना का विस्तार भारत के सर्वांगीण विकास में बड़ी भूमिका निभायेगा. सर पर छत होना केवल एक मुख्य आवश्यकता मात्र नहीं है, वह परिवार के लिए आत्मसम्मान तथा सुरक्षा बोध का माध्यम भी है. अगर एक परिवार में औसतन पांच लोग भी होते हों, तो इस हिसाब से सात-आठ वर्षों में ही प्रधानमंत्री आवास योजना से 17 करोड़ से अधिक लोगों को रहने का स्थायी ठिकाना मिल चुका है. उल्लेखनीय है कि इस वर्ष मार्च तक दो करोड़ घर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. इसका अर्थ यह है कि योजना लक्ष्य से आगे बढ़ चुकी है.

पर्यवेक्षकों का मानना है कि कोरोना महामारी के दौर में आये गतिरोध के समाप्त होने तथा अर्थव्यवस्था में बेहतरी होते जाने के साथ आवास योजना की गति भी बढ़ेगी. इस योजना के तहत बनाये जा रहे घरों को हवादार बनाने के साथ-साथ उनमें आवश्यक सुविधाएं भी मुहैया करायी जा रही हैं. सरकार द्वारा बनायी जा रही आवासीय परिसरों पर 22 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया जा चुका है. प्रधानमंत्री मोदी अक्सर यह भरोसा दिलाते रहते हैं कि हर भारतवासी के लिए अपना घर सुनिश्चित करने के संकल्प को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है.

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