मार्केटिंग के तरीके बदल रहा है जेनरेटिव एआई

जेनरेटिव एआई
जेनरेटिव AI मार्केटिंग के क्षेत्र में क्रांति ला रहा है, जिससे नए विचारों को आकार देना और व्यक्तिगत विज्ञापन बनाना संभव हो गया है. कोका-कोला और कैडबरी जैसे ब्रांड्स ने AI का उपयोग करके अभिनव अभियान चलाए हैं.
Generative AI : मार्केट डॉट यूएस के 2023 के एक अध्ययन के अनुमार्केटिंग के तरीके बदल रहा है जेनरेटिव एआइसार, विपणन (मार्केटिंग) के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का बाजार बढ़ा है. वर्ष 2022 में जिस एआइ का बाजार 1.9 अरब डॉलर का था, उसके वार्षिक चक्रवृद्धि दर के साथ 2032 तक 22.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. वर्तमान में जेनरेटिव एआइ टूल, जैसे- जैस्पर एआइ, एडोब सेंसेइ जेनएआइ, डेल-इ (डीएएलएल-इ), उबर माइकलएंजेलो और सेल्सफोर्स आइंस्टीन व अन्य का इस्तेमाल विपणन संचार (मार्केटिंग कम्युनिकेशन), बाजार अनुसंधान, मूल्य निर्धारण और ग्राहक सेवा जैसे कामों में बड़े पैमाने पर हो रहा है.
हालांकि, जर्मन कंपनी स्टेटिस्टा के 2025 का अध्ययन बताता है कि ब्रांड अब भी पारंपरिक तरीकों से वीडियो विज्ञापन बनाने में प्रत्येक वर्ष लगभग 353 अरब डॉलर खर्च कर रहे हैं. इसके विपरीत, जीपीटी-5, गूगल नैनो बनाना और डेल-इ जैसे जेनरेटिव एआइ मॉडल अब पलक झपकते स्क्रिप्ट, तस्वीरें और कहानियों के लिए वीडियो कंटेंट तैयार करने में सक्षम हैं. यह परिवर्तन केवल काम की गति बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विपणन संचार की पूरी व्यवस्था और प्रक्रिया को बदलने की ताकत रखता है. विज्ञापन में एआइ के उपयोग से पहले तक कॉपी राइटिंग के जरिये टेक्स्ट लिखना, डिजाइनर के हाथों विजुअल तैयार करना, वीडियोग्राफी और अंतिम रूप से एडिटिंग करने के बाद एक विज्ञापन तैयार होता था. तब एक विज्ञापन तैयार होने की प्रक्रिया धीमी थी.
ऐसे में हर ग्राहक की पसंद के अनुसार विज्ञापन तैयार करना संभव नहीं था. जबकि आज के हाइब्रिड दौर में मनुष्य और एआइ मिलकर विज्ञापन तैयार कर रहे हैं. जेनरेटिव एआइ के आने से नये विचारों को आकार देना संभव हुआ है. ब्रांड अब रचनात्मक कंटेंट तैयार करने और एआइ की क्षमता का आकलन करने के लिए उन्नत भाषा प्रतिरूप और विजुअल जेनरेटर का इस्तेमाल कर रहे हैं. उदाहरण के लिए, कोका कोला कंपनी ने अपने ‘वाइ3000’ कैंपेन के लिए एआइ की मदद ली, जिसमें वर्ष 3000 में पसंद किये जाने वाले स्वाद की कल्पना की गयी. इसके लिए कंपनी ने लोगों से ऑनलाइन बातचीत की और विजुअल ट्रेंड्स से डाटा इकट्ठा किया, एआइ एल्गोरिदम की मदद से ग्राहक भविष्य को किस तरह देखते हैं, इसका आकलन किया गया. इसके बाद एआइ टूल ने भविष्य में लोगों को पेय पदार्थ का स्वाद कैसा चाहिए, उसका फॉर्मूलेशन और पैकेजिंग डिजाइन उपलब्ध करा दिया.
‘वाइ3000’ के विजुअल को एआइ ने अत्याधुनिक विजुअल शैली से गढ़ा था, जिसे बाद में एक डिजाइनर ने अंतिम रूप दिया. इस हाइब्रिड रचनात्मक पहल से यह साबित हो गया कि कैसे मनुष्य की रचनात्मक सोच और एआइ से तैयार किये गये कंटेंट एक खास ब्रांडिंग प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं. कोका कोला की पहल चर्चा का विषय बनी, क्योंकि यह पहली बार था जब किसी कंपनी ने एआइ की मदद से पेय पदार्थ के फ्लेवर और ब्रांडिंग डिजाइन को रचनात्मक तरीके से उपभोक्ताओं के बीच पेश किया था. वर्ष 2025 में कोका कोला ने पूरी तरह एआइ से तैयार किया वीडियो एड ‘हॉलीडेज आर कमिंग’ भी जारी किया. क्रिसमस थीम पर तैयार इस विज्ञापन में कंपनी ने लाल ट्रक, बर्फीली पहाड़ी और पशुओं समेत लोगों को दिखाया था.
यह एआइ वीडियो एड कंपनी की ओर से 1955 में जारी किये गये एक वास्तविक एड से प्रेरित था. पूर्व के एड में वास्तविक ट्रक और कलाकार थे. हालांकि, एआइ निर्मित विज्ञापन लोगों की भावना से जुड़ नहीं सका और इसकी भारी आलोचना हुई. दूसरी ओर, कैडबरी ने भी शाहरुख खान के साथ एआइ वीडियो एड ‘नॉट जस्ट ए कैडबेरी एड’ लांच किया और दिवाली के समय छोटे खुदरा विक्रेताओं को सहयोग किया. विज्ञापन में एआइ और वॉयस सिंथेसिस तकलीक का इस्तेमाल किया गया, ताकि शाहरुख खान के साथ दुकानदार अपनी दुकानों के नाम जोड़ सकें. इससे छोटे व्यवसायी एक सेलिब्रिटी के साथ व्यक्तिगत विज्ञापन तैयार करने में सक्षम हो गये.
इस पूरे अभियान ने पारंपरिक ढर्रे को पीछे छोड़ दिया और इस धारणा को बाजार में स्थापित कर दिया कि जेनरेटिव एआइ की मदद से व्यक्तिगत कहानी वाचन प्रक्रिया कैसे आसान बनायी जा सकती है. जेरनेटिव एआइ कहानी साझा करने वाले वीडियो तक सीमित नहीं है. हाल ही में लेवी स्ट्रॉस एंड कंपनी ने कपड़ों की ऑनलाइन प्रदर्शनी को अलग पहचान दी. कंपनी ने अलग-अलग शारीरिक बनावट और रूप-रंग वाले व्यक्ति के लिए एक वर्चुअल मॉडल तैयार किया. इस एआइ पहल की जमकर आलोचना हुई. बाद में एआइ के इस्तेमाल की सीमा और लोगों के बीच से रोजगार के अवसर कम करने वाले मुद्दों पर बहस छिड़ गयी. आज पूरी दुनिया दो विचारधारा में बंटी हुई है. एक, जो जेनरेटिव एआइ को दोस्त मानते हैं और दूसरे, जो इसे दुश्मन मान बैठे हैं. जबकि विपणन के क्षेत्र में वही प्रभावी होंगे, जो एआइ को कब और कितनी प्रमुखता देनी चाहिए, इसे समझ सकेंगे. हमें एआइ को मानवीय प्रतिभा के विकल्प के रूप में न देखकर अपनी रचनात्मक सहयोगी के रूप में अपनाना होगा. (ये लेखिका के निजी विचार हैं.)
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