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Export: सरकार ने निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच दिलाने के उद्देश्य से 4,531 करोड़ रुपये की छह वर्षीय बाजार पहुंच समर्थन योजना शुरू की है. इससे नये बाजारों में पहुंच बढ़ेगी, आर्थिक बोझ में राहत मिलेगी तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

Export: सरकार ने निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच दिलाने के उद्देश्य से 4,531 करोड़ रुपये की छह वर्षीय बाजार पहुंच समर्थन (एमएएस) हस्तक्षेप योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों और खरीदारों से सीधे संपर्क से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने के लिए वित्तीय सहायता दी जायेगी. जबकि मौजूदा वित्त वर्ष के लिए इस मद में 500 करोड़ रुपये अलग से निर्धारित किये गये हैं. इस योजना का उद्देश्य पहली बार निर्यात करने वाले और प्राथमिकता क्षेत्रों, यानी कृषि, चमड़ा, हथकरघा, खिलौने तथा एमएसएमइ के निर्यातकों को लाभान्वित करना है.

यह कदम सरकार ने ऐसे समय उठाया है, जब भारतीय निर्यातक अमेरिका द्वारा लगाये गये लगभग 50 प्रतिशत आयात शुल्क के कारण दबाव में है. इसके अलावा बीते कुछ वर्षों में वैश्विक आपूर्ति शृंखला में बदलाव, अलग-अलग देशों के बीच तनाव तथा कोरोना जैसे कारणों से निर्यातकों के सामने कई नयी मुश्किलें आयी हैं. सरकार को यह योजना इसलिए लानी पड़ी, क्योंकि भारत का निर्यात अभी अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा. वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी फिलहाल दो से तीन प्रतिशत ही है, जो चीन की तुलना में बहुत कम है.

इसी को देखते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत मार्केट एक्सेस सपोर्ट (एमएएस) योजना के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किये हैं. यह योजना विगत नवंबर में केंद्रीय कैबिनेट से मंजूर हुए बड़े प्रोत्साहन ढांचे का हिस्सा है, जिसका मकसद भारतीय निर्यात को दो ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाना है. नवंबर में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात संवर्धन मिशन को मंजूरी दी थी. सरकार का मुख्य लक्ष्य निर्यात में विविधता लाना है, ताकि यूरोप और अमेरिका जैसे पुराने बाजारों पर निर्भरता कम हो और नये इलाकों में भारतीय उत्पाद पहुंच सकें.

आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए एमएसएमइ क्षेत्र को समर्थन देना भी जरूरी है, क्योंकि रोजगार पैदा करने में इसकी बड़ी भूमिका है. इस योजना में एमएसएमइ की कम से कम 35 फीसदी भागीदारी अनिवार्य होगी. इसके साथ-साथ नये देशों और छोटे बाजारों को प्राथमिकता दी जायेगी, ताकि निर्यात के अवसर बढ़ाये जा सकें. इस योजना से नये बाजारों में पहुंच बढ़ेगी, आर्थिक बोझ में राहत मिलेगी तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. यह योजना केवल निर्यात उत्पादों और बाजार विविधीकरण पर ही केंद्रित नहीं है, बल्कि लाभार्थियों के विविधीकरण पर भी केंद्रित है.

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